8 मई 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

काम नहीं मिलने से नाराज सरपंचों का धरना, सुशासन तिहार में शामिल होने से किया इनकार

Sushasan Tihar: विकास कार्य नहीं मिलने से नाराज 53 पंचायतों के सरपंचों ने “सुशासन तिहार” से दूरी बना ली। सरपंचों ने धरने पर बैठकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा और पंचायतों की लगातार उपेक्षा का आरोप लगाया।

2 min read
Google source verification
सरपंचों का धरना (photo source- Patrika)

सरपंचों का धरना (photo source- Patrika)

Sushasan Tihar: गरियाबंद जिले के देवभोग ब्लॉक में प्रशासन जहां “सुशासन तिहार” के जरिए जनता से जुड़ने का प्रयास कर रहा है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र के सरपंचों ने इस कार्यक्रम से दूरी बना ली है। माडागांव में आयोजित प्रशासनिक शिविर में अधिकांश सरपंच शामिल नहीं हुए और आगामी शिविरों में भी सहयोग नहीं करने का निर्णय लिया है।

Sushasan Tihar: 53 पंचायतों के सरपंचों ने लिया सामूहिक फैसला

ब्लॉक सरपंच संघ के अध्यक्ष पवन यादव ने बताया कि देवभोग ब्लॉक की 53 पंचायतों के सरपंचों ने बैठक कर सर्वसम्मति से यह फैसला लिया है। सरपंचों का कहना है कि वे सरकार के “सुशासन तिहार” का विरोध नहीं कर रहे, लेकिन लगातार हो रही उपेक्षा के कारण कार्यक्रम में सहयोग नहीं करेंगे।

“जनता की मांग पर भी नहीं करा पा रहे काम”

सरपंच रौशनी प्रधान ने कहा कि पंचायतों में जनता की छोटी-छोटी मांगें भी पूरी नहीं हो पा रही हैं। उन्होंने कहा कि एक नाली निर्माण तक की स्वीकृति नहीं मिल पा रही है। उनके अनुसार, सरपंचों ने कलेक्टर से लेकर मंत्रियों और मुख्यमंत्री तक अपनी मांगें पहुंचाई हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावशाली और सक्षम लोग काम मंजूर करवा लेते हैं, जबकि सरपंचों के हिस्से में सिर्फ जिम्मेदारी आती है, अधिकार नहीं।

“देवभोग ब्लॉक की लगातार हो रही उपेक्षा”

सरपंचों का कहना है कि पिछले दो वर्षों से देवभोग ब्लॉक की पंचायतों की लगातार अनदेखी की जा रही है। अन्य ब्लॉकों में जहां विकास कार्यों को मंजूरी मिल रही है, वहीं देवभोग की पंचायतों को अपेक्षित स्वीकृतियां नहीं मिल रही हैं। उनका कहना है कि धरना और बहिष्कार का उद्देश्य सरकार का विरोध नहीं, बल्कि प्रशासन का ध्यान क्षेत्र की समस्याओं की ओर आकर्षित करना है।

ज्ञापन में छलका सरपंचों का दर्द

धरने पर बैठे 40 से अधिक पंचायतों के सरपंचों ने कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में लिखा गया कि क्षेत्र में रोजगार मूलक और हितग्राही मूलक कार्यों को मंजूरी नहीं दी जा रही है। सरपंचों ने आरोप लगाया कि केवल मिट्टी कार्य देकर खानापूर्ति की जा रही है, जबकि पंचायतों को मटेरियल वर्क की भी जरूरत है। इसके अलावा पीएम आवास योजना के हितग्राहियों को रॉयल्टी मुक्त रेत उपलब्ध नहीं कराने को लेकर भी नाराजगी जताई गई।

Sushasan Tihar: सरपंचों से मिलने पहुंचे जिला पंचायत सीईओ

धरने की सूचना मिलने के बाद प्रखर चंद्राकर प्रदर्शन कर रहे सरपंचों के बीच पहुंचे। उन्होंने सरपंचों से चर्चा कर उनकी समस्याएं सुनीं। सीईओ ने आश्वासन दिया कि सरकारी योजनाओं के तहत आवश्यक निर्माण कार्यों को मंजूरी दिलाने और पंचायतों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास किए जाएंगे।