
Gariaband Bridge Collapse: गरियाबंद जिले के बिन्द्रानवागढ़-सातधार मार्ग पर करीब 50 लाख रुपए की लागत से बनाया गया रपटा पुल बारिश के दौरान धंस गया है। पुल के क्षतिग्रस्त होने से दर्जनों गांवों का मुख्य मार्ग से संपर्क प्रभावित हो गया है। रास्ता बंद होने के कारण ग्रामीणों को रोजमर्रा के काम के साथ-साथ इलाज और जरूरी सेवाओं के लिए भी परेशानी उठानी पड़ रही है। सबसे गंभीर स्थिति यह है कि सड़क बाधित होने के कारण इस मार्ग पर एंबुलेंस और अन्य बड़े वाहन नहीं पहुंच पा रहे हैं।
रपटा पुल के टूटने के बाद क्षेत्र में आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। रोजाना स्कूल और कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। तेज बहाव और क्षतिग्रस्त रास्ते के बीच ग्रामीणों को जरूरी काम के लिए आवाजाही करनी पड़ रही है। कई जगह रास्ता बेहद जोखिम भरा होने के कारण दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।
ग्रामीणों के मुताबिक रास्ता बंद होने का सबसे ज्यादा असर आपातकालीन सेवाओं पर पड़ा है। एंबुलेंस के गांव तक नहीं पहुंच पाने के कारण मरीजों को खाट या पैदल मुख्य मार्ग तक ले जाने की स्थिति बन गई है। गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में विशेष परेशानी हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो किसी आपात स्थिति में बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है।
ग्रामीणों के अनुसार बिन्द्रानवागढ़-सातधार मार्ग पर यह रपटा करीब 18 वर्ष पहले बनाया गया था। ग्राम पंचायत पतोरा के सरपंच कृष्णकुमार नाग का कहना है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत इस रपटे के निर्माण में 50 लाख रुपए से अधिक की राशि खर्च हुई थी। समय के साथ रपटा धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त हो रहा था। ग्रामीणों की ओर से इसकी जानकारी संबंधित विभाग को दिए जाने के बावजूद समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई।
सरपंच के मुताबिक लगातार बारिश के कारण करीब एक सप्ताह पहले रपटा धंस गया। इसके बाद क्षेत्र के दर्जनों गांवों और पाराटोला क्षेत्र के हजारों लोगों का आवागमन प्रभावित हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि मौजूदा रपटे की मरम्मत के साथ भविष्य में बड़े और मजबूत पुल का निर्माण जरूरी है, ताकि बारिश के दौरान बार-बार रास्ता बंद होने की स्थिति न बने।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना गरियाबंद के कार्यपालन अभियंता राहुल चंद्राकर ने बताया कि बारिश के कारण रपटा धंस गया है और फिलहाल इस मार्ग पर आवागमन पूरी तरह बंद है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दोनों तरफ जिला प्रशासन की ओर से चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि रपटा पुल का निर्माण विभाग या ग्राम पंचायत की ओर से कराया गया था, इसकी जानकारी संबंधित फाइल देखने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
रास्ता बंद होने के बाद ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से तत्काल वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि स्थायी पुल बनने में समय लग सकता है, इसलिए फिलहाल अस्थायी रपटा या अन्य सुरक्षित रास्ते की व्यवस्था की जाए। इससे स्कूल जाने वाले बच्चों, ग्रामीणों और सबसे जरूरी मरीजों को समय पर मुख्य मार्ग और अस्पताल तक पहुंचने में राहत मिल सकेगी।