Highlights - जिलाधिकारी अजय शंकर पांडे ने एनडीडीटीसी के अधिकारियों-कर्मचारियों को जारी किए निर्देश - जिले में नशे पर काबू पाने के लिए जिलाधिकारी ने शुरू की बड़ी कवायद, विशेष समिति गठित की- सभी एसएचओ को पत्र लिखकर कहा- तस्करों पर कार्रवाई करो, वरना मैं आया तो आप पर करुंगा
आशुुतोष पाठक/गाजियाबाद. जिलाधिकारी अजय शंकर पांडे ने नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर (एनडीडीटीसी) के अधिकारियों-कर्मचारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि जिले के ऐसे सभी शेल्टर होम जहां से नशे से प्रभावित लोगों को इलाज हो रहा है, उन्हें दवाएं सिर्फ डॉक्टरों की मौजूदगी में ही दी जाएं और डॉक्टर यह सुनिश्चित करें कि दवा संबंधित पीड़ित व्यक्ति ने मौके पर खा ली है। उन्होंने कहा, ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिसमें पीड़ितों को जब दवा दी जाती है तो वह खाते नहीं हैं और बाद में इन्हें बाहर ले जाकर मेडिकल स्टोर पर बेच देते हैं। जिलाधिकारी ने इस संबंध में ड्रग इंस्पेक्टर को भी निर्देश दिए हैं कि वे ऐसे सभी मेडिकल स्टोर पर खास नजर रखें।
तस्करों पर कार्रवाई करें एसएचओ, नहीं तो उन पर होगी
जिलाधिकारी ने जिले के सभी थानों के एसएचओ (थाना प्रभारी) को भी एक खास पत्र लिखा है। पत्र के माध्यम से सभी एसएचओ को निर्देशित किया गया है कि वह अपने-अपने थाना क्षेत्र में नशे के कारोबार में लिप्त सभी छोटे-बड़े तस्करों पर त्वरित कार्रवाई करें। उन्होंने साथ ही यह नसीहत भी दी है कि यदि आप तस्करों पर कार्रवाई नहीं करते हैं और मेरे औचक निरीक्षण के दौरान कुछ गड़बड़ी मिली तो सीधे आप पर कार्रवाई की जाएगी।
बता दें कि बीतें कुछ वर्षों में दिल्ली, गुरुग्राम और नोएडा के बाद अब गाजियाबाद भी नशे का बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। तमाम शिकायतों, नशे की बढ़ती गतिविधियों और इस पर बिगड़ते हालात को देखते हुए जिला प्रशासन अब अलर्ट मोड में आ गया है। उड़ता पंजाब की तर्ज पर गाजियाबाद जिस तरह नशा और नशेड़ियों का बड़ा अड्डा बनकर सामने आया है, उससे पता चलता है कि स्थिति कितनी गंभीर हो चुकी है। यह शायद पुलिस की नाकामी का ही नतीजा है कि जिलाधिकारी को खुद इस शहर को उड़ता गाजियाबाद बनने से रोकने के लिए आगे आना पड़ा है।
एडीएम के नेतृत्व में विशेष समिति
गाजियाबाद के जिलाधिकारी अजय शंकर पांडे ने शहर में नशे के कारोबार पर काबू पाने के लिए विशेष समिति गठित की है। एडीएम सिटी, शैलेंद्र सिंह के नेतृत्व में गठित यह समिति नशे से जुड़ी शिकायतों का त्वरित निस्तारण करेगी। जिले में नशे के कारोबारी कौन हैं, कौन हैं जो नशे को बढ़ावा दे रहे हैं, ऐसे सभी छोटे-बड़े तस्करों पर कार्रवाई की जाएगी। समिति यह भी तय करेगी कि जो लोग नशे सेे पीड़ित हैं, उनका इलाज कराया जाए। समिति ऐसे लोगों के लिए अलग से शेल्टर होम भी बनाएगी, जो नशा मुक्ति की तर्ज पर काम करेगा। जिलाधिकारी अजयशंकर पांडे ने 'पत्रिका' को बताया कि समिति और इसमें शामिल सदस्यों की समीक्षा बैठक हर पंद्रह दिन में होगी। बैठक में इस बीच आने वाली शिकायतों, उनके निस्तारण और इस दौरान की गई कार्रवाइयों पर भी बात होगी।
पीड़ित बच्चों-युवाओं का इलाज कराएंगे
समाज विकास कल्याण अधिकारी को इस संबंध में निर्देश देते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि वे ऐसे बच्चों और युवाओं को चिन्हित करें, जो नशे से पीड़ित हैं। इनमें वह लोग भी शामिल हैं, जिनके पास घर नहीं है और सड़कों पर रहते हैं। ऐसे लोगों को शेल्टर होम भेजा जाएगा, जहां नशा से मुक्ति दिलाने में इनकी मदद की जाएगी। यह कार्य संकल्प समूह के माध्यम से किया जाएगा। इसमें कुछ गैर सरकारी संगठनों की भी मदद ली जाएगी।