गाज़ियाबाद

‘ससुर पीछे नहीं खींचते तो चेहरा झुलस जाता’, ‘आंखों के सामने जल गया पूरा घर’, उन 45 मिनटों के खौफ की दास्तान

Ghaziabad Fire News: गाजियाबाद की गौड़ ग्रीन एवेन्यू सोसायटी में भीषण आग से चार फ्लैट खाक हो गए, 45 मिनट तक धुएं में फंसे बुजुर्गों और बच्चों को रेस्क्यू किया गया।
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Ghaziabad Fire News
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Ghaziabad Fire News: गाजियाबाद के इंदिरापुरम स्थित गौड़ ग्रीन एवेन्यू सोसायटी में एक भीषण अग्निकांड हुआ, जिसने चार परिवारों के आशियानों को पूरी तरह खाक कर दिया। इस हादसे के दौरान कई लोग करीब 45 मिनट तक आग और धुएं के बीच फंसे रहे। दमकलकर्मियों और स्थानीय निवासियों की बहादुरी से ऑक्सीजन पर निर्भर बुजुर्गों और महिलाओं समेत सभी को सुरक्षित निकाला गया, हालांकि संपत्ति का भारी नुकसान हुआ है।

45 मिनट तक अटकी रहीं सांसें

इंदिरापुरम की इस पॉश सोसायटी में सुबह का समय था, जब अचानक भड़की आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। देखते ही देखते आग की लपटें नौवीं और दसवीं मंजिल तक फैल गईं। फ्लैटों में फंसे लोग चीख-पुकार मचा रहे थे और गलियारों में घना काला धुआं भर गया था। स्थिति इतनी नाजुक थी कि लोग अपने ही घरों में कैद होकर रह गए। लगभग पौन घंटे तक मौत से जूझने के बाद, दमकल विभाग की मुस्तैदी और राहत कार्यों की बदौलत लोगों को सुरक्षित नीचे लाया गया। नीचे आने के बाद अपने जीवनभर की जमा-पूंजी को जलता देख निवासियों की आंखों में आंसू और जुबां पर खौफ साफ नजर आ रहा था।

दरवाजा खोलते ही आई लपटें

सोसायटी के नौवें फ्लोर पर रहने वाली रुचि शर्मा ने बताया कि उनका फ्लैट कमल पालीवाल के फ्लैट के सामने ही है। धुआं और तपिश महसूस होने पर उन्होंने गेट खोला तो अचानक से आग की लपटें उनकी ओर आईं। पीछे से उनके ससुर ने उन्हें पीछे खींचकर दरवाजा बंद किया, जबकि उनकी सास कुसुम शर्मा बाथरूम में गईं और पानी के नल खोल दिए। दहशत के बीच सभी को मदद के लिए परिवार कॉल करता रहा।

ऑक्सीजन पर निर्भर बुजुर्ग का रेस्क्यू

हादसे के दौरान मानवीय संवेदनाओं और बहादुरी की मिसाल भी देखने को मिली। सोसायटी के निवासी अजय शर्मा ने बताया कि आग की सूचना मिलते ही वह फायर फाइटिंग सिस्टम का कांच तोड़कर मदद के लिए दौड़े। इसी बीच एक युवती ने रोते हुए गुहार लगाई कि उसके दादा, मोहम्मद अय्यूब, बिस्तर पर हैं और ऑक्सीजन पर निर्भर हैं। गाजियाबाद के दमकलकर्मियों और स्थानीय लोगों ने जान जोखिम में डालकर बुजुर्ग अय्यूब और एक अन्य महिला अनीता को सुरक्षित बाहर निकाला और तुरंत अस्पताल पहुंचाया।

स्टूल और कुर्सी से बचाई जान

आग की तपिश ने 10वीं मंजिल पर रह रहे परिवारों को भी अपनी चपेट में ले लिया। कारोबारी वरुण अग्रवाल के फ्लैट और आसपास रह रहे पुष्पेंद्र, अहमद और संदीप ने हिम्मत का परिचय दिया। जब आग सीढ़ियों तक पहुंच गई, तो उन्होंने बच्चों और महिलाओं को सुरक्षित निकालने के बाद खुद मोर्चा संभाला। उन्होंने स्टूल और कुर्सियों फ्लैट की खिड़कियों और दरवाजों के कांच तोड़े, ताकि फायर फाइटिंग का पानी अंदर जा सके। धुएं के कारण दम घुटने वाली स्थिति के बावजूद, इन तीनों ने एकजुट होकर साहस बनाए रखा और सुरक्षित निकलने में कामयाब रहे।

स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई

हादसे के बाद प्रशासन भी हरकत में आया। सोसायटी परिसर में ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक मेडिकल कैंप लगाया गया। नीचे लाए गए सभी लोगों और घायलों की प्राथमिक जांच की गई। गनीमत यह रही कि किसी को भी ऐसी गंभीर चोट नहीं आई थी जिसके लिए बड़े अस्पताल में रेफर करना पड़े, हालांकि धुएं और सदमे के कारण लोगों की हालत काफी खराब थी।

Updated on:
30 Apr 2026 02:12 pm
Published on:
30 Apr 2026 02:12 pm
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