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अंकित बालियान केस में गोगी गैंग का नाम, फिर खुली टिल्लू-गोगी की पुरानी गैंगवार की फाइल, जानिए कैसे शुरू हुई थी दो गैंगस्टरों की दुश्मनी

Gogi Gang vs Tillu Gang: अंकित बालियान हत्याकांड की जांच में गोगी गैंग का नाम सामने आने के बाद दिल्ली-एनसीआर की पुरानी टिल्लू ताजपुरिया-जितेंद्र गोगी गैंगवार फिर चर्चा में है। जानिए दोनों गैंगस्टरों की दुश्मनी कैसे शुरू हुई और इसका कनेक्शन अंकित केस से कैसे जुड़ रहा है।
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गाज़ियाबाद

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Dimple Yadav

•

Updated: 1 Sep 2026, 8:18 AM IST

Ankit Baliyan Murder Case Ankit Baliyan Murder Gogi Gang

टिल्लू ताजपुरिया

Ankit Baliyan Gang Connection:शामली में हरियाणवी सिंगर और यूट्यूबर अंकित बालियान की हत्या ने दिल्ली-एनसीआर की करीब डेढ़ दशक पुरानी गैंगवार की कहानी को फिर चर्चा में ला दिया है। पुलिस की अब तक की जांच में अंकित की हत्या का कनेक्शन जितेंद्र मान उर्फ गोगी के गैंग से सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, हत्या की वजह गोगी की मौत के बाद अंकित की ओर से तैयार कराया गया एक गाना भी हो सकता है।

अंकित हत्याकांड में पुलिस ने जिन दो शूटरों मोहित और सुमित को मुठभेड़ में मार गिराया, उन्हें गोगी गैंग से जुड़ा बताया गया है। दोनों पर 50-50 हजार रुपये का इनाम था। अब जांच का फोकस केवल शूटरों तक सीमित नहीं है, बल्कि पुलिस कथित साजिश और इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

तिहाड़ की वो सुबह, जब टिल्लू ताजपुरिया की हत्या हुई

2 मई 2023 की सुबह दिल्ली की तिहाड़ जेल में टिल्लू ताजपुरिया पर हमला हुआ था। जेल में बंद टिल्लू पर लोहे की जालियों और कथित तौर पर जेल से निकाली गई सलाखों से हमला किया गया। गंभीर रूप से घायल टिल्लू को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी। टिल्लू ताजपुरिया का असली नाम सुनील बालियान था और वह गोगी का सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी माना जाता था। उसकी हत्या को गोगी की हत्या के बदले से जोड़कर भी देखा गया था।

रोहिणी कोर्ट में गोगी की हत्या से शुरू हुआ नया अध्याय

इससे करीब दो साल पहले 24 सितंबर 2021 को दिल्ली की रोहिणी कोर्ट में जितेंद्र मान उर्फ गोगी की हत्या कर दी गई थी। कोर्ट परिसर में वकीलों के भेष में पहुंचे हमलावरों ने गोगी पर गोलियां चलाई थीं। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में दोनों हमलावर भी मारे गए। जांच में इन हमलावरों को टिल्लू गैंग से जोड़कर देखा गया था। यही घटना गोगी और टिल्लू के बीच चली आ रही पुरानी दुश्मनी का सबसे बड़ा चेहरा बन गई।

कभी दोस्त थे गोगी और टिल्लू

दिलचस्प बात यह है कि जिस गोगी और टिल्लू को बाद में एक-दूसरे का सबसे बड़ा दुश्मन माना गया, उनके बीच शुरुआती दिनों में दोस्ती थी। रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों के बीच विवाद की शुरुआत 2010 के आसपास दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ चुनाव से हुई थी। अलग-अलग उम्मीदवारों के समर्थन ने दोनों के रिश्ते में दरार पैदा की और धीरे-धीरे यह टकराव गैंगवार में बदल गया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच बदले का सिलसिला बढ़ता गया। पुलिस और मीडिया रिपोर्टों में इस दुश्मनी की कई घटनाओं का जिक्र मिलता रहा है।

'गोगी का जीजा' वाले स्टिकर से बिगड़ी बात?

इस गैंगवार की शुरुआत से जुड़ी एक कहानी राजू ताजपुरिया की हत्या से भी जोड़ी जाती है। रिपोर्टों के मुताबिक, राजू का एक महिला से संबंध था और इस रिश्ते को लेकर गोगी गैंग नाराज था। कथित तौर पर गोगी को चिढ़ाने के लिए कार पर 'गोगी का जीजा' लिखा गया था। इसके बाद राजू की हत्या कर दी गई और ताजपुरिया पक्ष ने इसे बदले की शुरुआत माना। बाद में टिल्लू गैंग की तरफ से भी हमले हुए और दोनों पक्षों के बीच दुश्मनी लगातार गहराती चली गई।

अब अंकित के गाने ने क्यों बढ़ाई रंजिश?

अंकित बालियान केस में सामने आया नया एंगल इसी पुरानी दुश्मनी से जुड़ता है। पुलिस के मुताबिक, अंकित ने गोगी की मौत के बाद 'भरी कोर्ट में गोली मारेंगे' नाम से एक गाना तैयार कराया था। जांच में यह बात सामने आई है कि इस गाने को लेकर गोगी गैंग से जुड़े लोगों में अंकित के प्रति नाराजगी थी। पुलिस को आशंका है कि अंकित को टिल्लू गैंग के करीब समझे जाने की वजह से भी वह निशाने पर आया। यानी जांच की मौजूदा कड़ी में कहानी सिर्फ एक गाने तक सीमित नहीं दिख रही, बल्कि इसके पीछे गोगी-टिल्लू गैंग की पुरानी दुश्मनी, उससे जुड़े नेटवर्क और बदले की मानसिकता की परतें भी खंगाली जा रही हैं।

गोगी और टिल्लू दोनों मारे गए, फिर भी नेटवर्क क्यों जिंदा?

इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल यही है। गोगी 2021 में मारा गया और टिल्लू 2023 में तिहाड़ जेल में खत्म हो गया, लेकिन दोनों से जुड़े नेटवर्क और पुरानी दुश्मनी का असर अब भी अलग-अलग घटनाओं में सामने आता रहा है। अंकित बालियान हत्याकांड ने यह सवाल फिर खड़ा कर दिया है कि क्या गैंगस्टरों के मारे जाने के बाद भी उनके बनाए नेटवर्क और पुरानी दुश्मनियां खत्म हो जाती हैं? फिलहाल पुलिस की जांच इस बात पर केंद्रित है कि अंकित की हत्या की साजिश किसने रची, शूटरों को किसने निर्देश दिए और इस पूरी वारदात के पीछे कितने लोग जुड़े हैं। डीजीपी राजीव कृष्ण ने भी कहा है कि जांच शूटरों तक सीमित नहीं रहेगी और साजिश में शामिल लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जाएगी।

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