
Salim Wastik Ghaziabad: तारीख 27 फरवरी 2026 थी और दिन जुमे का था। सुबह करीब साढ़े 7 बजे गाजियाबाद के लोनी इलाके में सनसनीखेज हमला हुआ। यूट्यूबर और एक्स-मुस्लिम सलीम वास्तिक पर जीशान और गुलफाम नाम के दो युवकों ने अचानक हमला कर दिया। एक के हाथ में पेपर कटर और दूसरे के हाथ में चाकू था। हमलावरों का मकसद सलीम का ‘सर तन से जुदा’ करना बताया जा रहा है। करीब साढ़े तीन मिनट तक चले इस हमले में सलीम की गर्दन, पेट, पीठ और सीने पर कुल 14 वार किए गए। इसी बीच एक महिला के शोर मचाने पर दोनों हमलावर मौके से फरार हो गए, जिसके बाद घायल सलीम को अस्पताल पहुंचाया गया।
घटना के बाद सोशल मीडिया और टेलीग्राम ग्रुप में हमले से जुड़ी तस्वीरें भी सामने आईं, जिनमें लिखा था कि सलीम एक्स-मुस्लिम को अस्पताल पहुंचा दिया गया है और पूरी घटना का वीडियो भी होने का दावा किया गया। मामले की जांच में जुटी पुलिस ने इलाके के सीसीटीवी फुटेज, गाड़ी के नंबर और लोकेशन के आधार पर दोनों हमलावरों की पहचान कर ली। पुलिस से मुठभेड़ के दौरान 1 मार्च को जीशान और 3 मार्च को गुलफाम मारे गए। अब जांच इस बात पर भी केंद्रित है कि इस हमले की साजिश किसने रची, इसके पीछे कौन लोग थे और आखिर जीशान का बाबरी मस्जिद से जुड़े मुद्दे से क्या संबंध था।
मिली जानकारी के अनुसार पता चला है कि अमरोहा के सैदनगली कस्बे के रहने वाले दोनों आरोपी भाई जीशान और गुलफाम ने हमले से पहले नमाज पढ़ा था। दोनों के पिता एक साधारण इंसान हैं और वह लकड़ी का काम करते हैं। अपने पिता के काम में दोनों आरोपी बेटे भी हाथ बढ़ाया करते थे। वहीं, इन दोनों के अलावा पिता बुनियाद के परिवार में और पांच बेटियां भी हैं। परिवार से जुड़ी जानकारी के अनुसार, बुनियाद अली ने अपने सभी बच्चों की शादी कर दी थी। गुलफाम परिवार में सबसे बड़ा था, जबकि जीशान सबसे छोटा बताया जा रहा है। साल 2013 में गुलफाम अमरोहा छोड़कर खोड़ा कॉलोनी इलाके में आकर बस गया था। यहां वह मंगल बाजार क्षेत्र में अली हसन नाम के व्यक्ति के घर किराए के कमरे में रहता था और वहीं से अपना कामकाज करता था।
परिवार के मुताबिक जीशान धार्मिक रूप से काफी कट्टर माना जाता था। इसी कारण वह रविवार के बजाय हर शुक्रवार को काम से छुट्टी लेता था। वह लगभग हर हफ्ते घर भी आ जाता था, इसलिए परिजनों को उसकी गतिविधियों पर कोई शक नहीं हुआ। घटना के बाद भी उसने सामान्य दिनचर्या जारी रखी और अगले दिन रोजा रखा। सुबह नमाज अदा करने के बाद वह बस से गाजियाबाद के लिए निकल गया। दोपहर में उसने अपनी मां से फोन पर बात भी की और बताया कि वह नमाज पढ़ने जा रहा है, जिससे परिवार को किसी तरह का संदेह नहीं हुआ।