
Akhilesh Yadav Birthday: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) के जन्मदिन पर उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर (Om Prakash Rajbhar) ने उन्हें शुभकामनाएं देने के साथ एक राजनीतिक नसीहत भी दी है। सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में राजभर ने अखिलेश यादव से एसी कमरों और सोशल मीडिया की राजनीति से बाहर निकलकर गांव-देहात, किसानों, दलितों और पिछड़े वर्गों के बीच जाने की सलाह दी।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी का दौर एक बार फिर तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के जन्मदिन के अवसर पर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए एक लंबा संदेश साझा किया। जो अब राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। राजभर ने अपने संदेश की शुरुआत अखिलेश यादव को जन्मदिन की बधाई और उनके उत्तम स्वास्थ्य व दीर्घायु की कामना के साथ की। इसके बाद उन्होंने कहा कि काफी सोचने के बाद उन्हें लगा कि वह अखिलेश यादव को कोई भौतिक उपहार नहीं दे सकते। इसलिए एक “बेशकीमती सलाह” ही उनके लिए सबसे उपयुक्त उपहार होगी।
अपने संदेश में राजभर ने अखिलेश यादव के राजनीतिक कार्यशैली पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें आरामतलबी और एसी कमरों की राजनीति से बाहर निकलना चाहिए। उन्होंने लिखा कि गांव-देहात की पगडंडियों पर चलकर लोगों के बीच जाने से ही वास्तविक राजनीति को समझा जा सकता है। राजभर ने गैर-यादव पिछड़ों, दलितों, गरीबों और वंचित वर्गों के बीच जाकर उनके सुख-दुख में शामिल होने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि केवल सोशल मीडिया या वीडियो के माध्यम से किसानों और ग्रामीण जीवन को समझना पर्याप्त नहीं है। बल्कि खेतों में जाकर वास्तविक परिस्थितियों को जानना जरूरी है।
संदेश में राजभर ने तंज भरे अंदाज में यह भी कहा कि शुरुआत में गांव की मेड़ों और पगडंडियों पर चलते समय दिक्कतें आ सकती हैं। धूप और गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन लगातार प्रयास करने से प्रदेश की राजनीति का असली रास्ता समझ में आ जाएगा।
उन्होंने आगे लिखा कि जमीन से जुड़ने का कोई शॉर्टकट नहीं होता और इसके लिए लगातार जनता के बीच रहना पड़ता है। राजभर ने खुद का उदाहरण देते हुए कहा कि वह भीषण गर्मी में भी गांव-गांव जाकर लोगों से मिलते हैं।
राजभर के इस संदेश को राजनीतिक हलकों में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों और विपक्ष पर हमले के रूप में देखा जा रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि समाजवादी पार्टी या अखिलेश यादव की ओर से इस टिप्पणी पर कोई प्रतिक्रिया सामने आती है या नहीं।