राष्ट्र कथा महोत्सव के दौरान पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के आवास पर एक भावुक और मुस्कान भरा दृश्य सामने आया। गुल्लक लेकर दान देने पहुंचे नन्हे मदन मोहन जायसवाल ने आत्मविश्वास से कहा-“हमें भी सांसद बनना है”, जिसने सभी का दिल जीत लिया।
BrijBhushanSharan Singh Rashtra Katha Mahotsav 2026 : पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के आवास पर आयोजित राष्ट्र कथा महोत्सव के दौरान एक ऐसा भावुक और प्रेरक दृश्य देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान बिखेर दी। यह दृश्य न केवल हल्का-फुल्का था, बल्कि अपने भीतर एक गहरा संदेश भी समेटे हुए था,देश का भविष्य आत्मविश्वास से भरे बच्चों के सपनों में आकार ले रहा है।
राष्ट्र कथा महोत्सव के दौरान जब मंच पर कथा का प्रवाह चल रहा था, तभी अचानक एक छोटा सा बच्चा मंच के पास पहुंचा। उसकी उम्र भले ही कम थी, लेकिन चेहरे पर गजब का आत्मविश्वास और आंखों में कुछ कर दिखाने का जज्बा साफ झलक रहा था। उसके हाथ में एक गुल्लक थी, जो पैसों से भरी हुई थी। बच्चे ने पूरे आत्मविश्वास के साथ मंच के समीप मौजूद लोगों से कहा कि वह यह गुल्लक कथा आयोजन के लिए दान करना चाहता है। उसकी मासूम लेकिन दृढ़ आवाज ने कुछ ही पलों में सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
जब उससे प्यार से उसका नाम पूछा गया, तो उसने बिना किसी हिचक के बड़े सलीके से जवाब दिया-“मेरा नाम मदन मोहन जायसवाल है। नाम बताने के बाद उसने गुल्लक आगे बढ़ा दी। यह सिर्फ पैसों का दान नहीं था, बल्कि यह उस बच्चे की सोच, संस्कार और समाज के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक था। इतने कम उम्र में दान और सामाजिक योगदान की भावना देखकर वहां मौजूद लोग भावुक हो उठे।
लेकिन कहानी का सबसे दिलचस्प और यादगार मोड़ तब आया, जब गुल्लक देने के बाद उस बच्चे ने सीधे पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह की ओर देखते हुए बेझिझक कहा-“हमें भी सांसद बनना है।” यह सुनते ही पूरे पंडाल में हंसी और तालियों की गूंज फैल गई। बच्चे की मासूमियत और आत्मविश्वास ने माहौल को एकदम जीवंत कर दिया। पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह भी बच्चे की इस बात से खासे प्रभावित नजर आए। उन्होंने मुस्कुराते हुए उसी अंदाज में जवाब दिया- बनेंगे सांसद? पक्का बनेंगे?” इस छोटे से संवाद ने पूरे कार्यक्रम में एक अलग ही ऊर्जा भर दी। यह सिर्फ एक मजेदार पल नहीं था, बल्कि यह दिखाता है कि आज की नई पीढ़ी कितनी जागरूक, आत्मविश्वासी और सपने देखने की हिम्मत रखने वाली है।
मदन मोहन जायसवाल का यह व्यवहार कई स्तरों पर संदेश देता है। एक ओर वह अपने गुल्लक के पैसे दान करके सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण पेश करता है, वहीं दूसरी ओर “सांसद बनना है” कहकर अपने बड़े सपनों और नेतृत्व की आकांक्षा को खुलकर सामने रखता है। विशेषज्ञों और शिक्षाविदों का मानना है कि बच्चों में अगर कम उम्र से ही समाज, देश और नेतृत्व को लेकर ऐसी सोच विकसित हो जाए, तो यह भविष्य के लिए बेहद सकारात्मक संकेत है।
पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के आवास पर आयोजित राष्ट्र कथा महोत्सव का उद्देश्य केवल धार्मिक या सांस्कृतिक कथाओं तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके माध्यम से राष्ट्रप्रेम, संस्कार, सामाजिक जिम्मेदारी और सांस्कृतिक मूल्यों को समाज तक पहुंचाना भी था। इस महोत्सव में देशभक्ति, संस्कृति, इतिहास और नैतिक मूल्यों से जुड़ी कथाओं का वाचन किया जा रहा है। ऐसे माहौल में एक बच्चे का आगे बढ़कर दान देना और अपने सपनों की बात कहना, आयोजन के उद्देश्य को और भी सार्थक बना देता है।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इस दृश्य को लंबे समय तक याद रखने वाला बताया। कई लोगों का कहना था कि यह पल दिखाता है कि बच्चे सिर्फ मोबाइल और पढ़ाई तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे समाज और देश के बारे में भी सोचते हैं। कुछ लोगों ने इसे “भविष्य की राजनीति की झलक” तक करार दिया। वहीं कई बुजुर्गों ने कहा कि ऐसे ही बच्चों के हाथों में देश का भविष्य सुरक्षित है।
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, बच्चों में आत्मविश्वास और सपने देखने की क्षमता का विकास बेहद जरूरी है। मदन मोहन जायसवाल जैसे उदाहरण यह बताते हैं कि अगर बच्चों को सही वातावरण, प्रेरणा और संस्कार मिलें, तो वे बहुत कम उम्र में भी बड़े लक्ष्य तय कर सकते हैं। हमें भी सांसद बनना है”-यह वाक्य सिर्फ एक मासूम इच्छा नहीं, बल्कि यह उस आत्मविश्वास का प्रतीक है, जो आगे चलकर नेतृत्व में बदल सकता है।