बच्चों के पोषाहार पर प्रतिमाह करोड़ों रुपये खर्च करती है सरकार, लेकिन जरूरतमंदों तक नहीं पहुंचता लाभ
गोंडा. उत्तर प्रदेश सरकार सेहत को लेकर काफी जागरूक है। योगी सरकार ने अपने दूसरे बजट में बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर खासा फोकस किया है। लेकिन गोंडा जिले में करीब एक लाख कुपोषित बच्चों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर कुपोषित बच्चों को सरकारी योजनाओं को लाभ देने में बेईमानी की जा रही है। लापरवाही का आलम यह है कि जिले में 50 हजार बच्चे कुपोषित और 27 हजार बच्चे अति कुपोषित श्रेणी में है। इसका खुलासा वजन दिवस की रिपोर्ट से हुआ है। जबकि बच्चों की सेहत के सुधार के लिये प्रतिमाह करोड़ों रुपये खर्च किये जाते हैं।
क्या है योजना कुपोषण दूर करने के लिये
शासन की तरफ से 5वर्ष तक बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए उन्हें पूरक पोषाहार उपलब्ध कराने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। इन केंद्रों पर बच्चों को पूरक पोषाहार के साथ ही पूर्व प्राथमिक शिक्षा भी उपलब्ध कराई जाती है। जिले के कुल 2913 आंगनबाड़ी केंद्रों पर 4.88 लाख बच्चों का पंजीकरण है। इनमें 2.33 लाख बच्चे 0 से 3 वर्ष के है, 1.78 लाख बच्चों की उम्र 3 से 5 वर्ष है। इन बच्चों को पोषाहार के साथ साथ अन्य आहार भी उपलब्ध कराए जाते हैं, जिन पर सरकार करोड़ों रुपये खर्च करती है।
सामने आये चौंकाने वाले खुलासे
इन बच्चों के स्वास्थ की हकीकत जानने के लिए आयोजन दिवस कर जब वजन जांचा गया तो जो रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे सामने आये। दो श्रेणी में तैयार रिपोर्ट में पीली श्रेणी में 50640 बच्चे कुपोषण के शिकार पाये गए। इनमें 29950 बच्चे 0 से 3 वर्ष के हैं, जबकि 20690 बच्चे तीन से 5 वर्ष के हैं।
ब्लाकवार क्या है क्या है कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चे
ब्लॉक कुपोषित अतिकुपोषित
पंडरी कृपाल 2194 934
बेलसर 2101 1374
बभनजोत 4830 2070
छपिया 1990 1725
हलधरमऊ 3490 1813
इटियाथोक 2625 1554
झंझरी 2433 1860
कर्नलगंज 2842 2086
कटरा बाजार 3975 2199
मनकापुर 1682 1517
मुजेहना 3496 1157
नवाबगज 4433 1184
परसपुर 3948 1834
रुपईडीह 5780 2039
तरबगज 2947 1513
वजीरगज 1243 1316
शहर 728 620
योग 50640 26795
इस तरह से देखा जाय तो रूपयीडीह व बभनजोत विकास खंड में सबसे अधिक कुपोषित है।