गोरखपुर में एक बार फिर पुलिस की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह खड़ा हुआ है, यहां एक किशोरी के गायब होने का मुकदमा सिर्फ दो थानों में उलझा होने के कारण नहीं लिखा जा रहा है।
गोरखपुर जिले में एक बार फिर थाना पुलिस पर गंभीर प्रश्नचिन्ह उठा है, यहां एक किशोरी तीन दिनों से लापता है लेकिन थाने पर उसके पिता की सुनने वाला कोई नहीं है। पिता थाने का चक्कर लगा रहा है और पुलिस दो थानों के बीच उलझी हुई है।
पीड़ित पिता का आरोप है कि बेटी के लापता होने के बाद से वह लगातार दोनों थानों के बीच भटक रहा है। पुलिसकर्मी कभी घटना स्थल तो कभी निवास स्थान का हवाला देकर मुकदमा दर्ज करने से इनकार कर रहे हैं। पुलिस की नजर अंदाजी से वह किसी अनहोनी से डरा हुआ है। मिली जानकारी के अनुसार, सहजनवा थाना क्षेत्र के पाली ब्लॉक निवासी व्यक्ति ने अपनी बेटी को पढ़ाई के लिए उरुवा थाना क्षेत्र में स्थित रिश्तेदारी में रखा था। चार दिन पहले एक युवक किशोरी को बहला-फुसलाकर भगा ले गया। परिजनों को युवक की पहचान की जानकारी भी है, इसके बावजूद पुलिस कार्रवाई आगे नहीं बढ़ा रही।
अपहरण की सूचना मिलने पर पिता सबसे पहले सहजनवा थाने पहुंचा, जहां पुलिस ने मामला उरुवा थाना क्षेत्र का बताकर पल्ला झाड़ लिया। उरुवा थाने पहुंचने पर वहां की पुलिस ने यह कहकर लौटा दिया कि पीड़िता सहजनवा की निवासी है, इसलिए मुकदमा वहीं दर्ज होगा। इस बीच पिता कभी थाने के अंदर कभी थाने के बाहर चक्कर लगा रहा है। बता दें कि पुलिस मैनुअल और सुप्रीम कोर्ट के उस स्पष्ट निर्देश का उल्लंघन है, जिसमें महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों में जीरो एफआईआर दर्ज करने की बात कही गई है।