जिला पूर्ति अधिकारी रामेंद्र प्रताप सिंह द्वारा कालाबाजारी पर लगातार नजर रखी जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। लोगों से भी अपील की गई है कि अवैध रूप से गैस भरवाने से बचें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल प्रशासन को दें।
भारत सरकार ने कमर्शियल एलपीजी उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए आवंटन को 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया है। इस फैसले से होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा, औद्योगिक इकाइयों और अन्य वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को गैस की बेहतर उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
इस संबंध में जानकारी देते हुए जिला पूर्ति अधिकारी रामेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा लिया गया यह निर्णय बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए किया गया है। इसके तहत अतिरिक्त 20 प्रतिशत एलपीजी आवंटन उन क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर दिया जाएगा, जहां इसकी खपत और आवश्यकता अधिक है।
उन्होंने बताया कि विशेष रूप से रेस्टोरेंट, ढाबे, होटल, औद्योगिक कैंटीन, फूड प्रोसेसिंग यूनिट और डेयरी इकाइयों को इस बढ़े हुए आवंटन का सीधा लाभ मिलेगा। इसके अलावा सरकारी सब्सिडी वाले कैंटीन, सामुदायिक रसोई (कम्युनिटी किचन) तथा प्रवासी मजदूरों के लिए उपयोग में आने वाले 5 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर भी इस प्राथमिकता सूची में शामिल किए गए हैं।
जिला पूर्ति अधिकारी ने कहा कि इस निर्णय से न केवल वाणिज्यिक गतिविधियों को गति मिलेगी, बल्कि छोटे व्यवसायियों और खाद्य सेवा से जुड़े लोगों को भी बड़ी राहत मिलेगी। अब उन्हें गैस की कमी का सामना कम करना पड़ेगा और उनका काम सुचारू रूप से चलता रहेगा।
उन्होंने यह भी बताया कि कई बार एलपीजी की सीमित उपलब्धता के कारण होटल और ढाबा संचालकों को परेशानी का सामना करना पड़ता था, जिससे उनके व्यवसाय पर असर पड़ता था। नए निर्णय से ऐसी समस्याओं में काफी हद तक कमी आने की उम्मीद है।
रामेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि प्रशासन स्तर पर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बढ़ा हुआ आवंटन सही उपभोक्ताओं तक पहुंचे और किसी प्रकार की कालाबाजारी या अनियमितता न हो। इसके लिए संबंधित विभागों को सतर्क रहने और नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने आमजन से भी अपील की कि एलपीजी का उपयोग सावधानीपूर्वक करें और किसी भी प्रकार की अनियमितता या शिकायत होने पर संबंधित विभाग को सूचित करें, ताकि त्वरित कार्रवाई की जा सके। सरकार के इस निर्णय को व्यापारिक वर्ग के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।