
BJP Won In Gorakhpur: गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतगणना में करीब 35 घंटे तक चली गिनती के बाद भाजपा प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने 276 मतों से जीत दर्ज की है। हालांकि, निर्वाचन अधिकारी की ओर से परिणाम की आधिकारिक घोषणा होना बाकी है। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच 27 अक्टूबर को सुबह आठ बजे शुरू हुई मतगणना बुधवार तक चली। द्वितीय वरीयता के मतों की गणना के कारण चुनाव परिणाम को लेकर आखिरी समय तक रोमांच बना रहा।
मतगणना के दौरान कुल 14 प्रत्याशी एलिमिनेट हुए। इसके बाद उनके मतपत्रों पर दर्ज द्वितीय वरीयता के मतों की गणना कर नियमानुसार संबंधित प्रत्याशियों के खाते में जोड़ा गया। इसी प्रक्रिया के चलते भाजपा प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी और निर्दलीय प्रत्याशी राजीव यादव के बीच मुकाबला लगातार दिलचस्प बना रहा।
मतगणना के एक चरण में ध्रुव त्रिपाठी की बढ़त 901 मतों की थी, जो बाद में घटकर 880 मतों पर आ गई थी। इसके बाद संजयन के मतपत्रों पर दर्ज द्वितीय वरीयता के मतों को लेकर भी निगाहें टिकी थीं। आखिरकार मतगणना पूरी होने के बाद ध्रुव त्रिपाठी ने 276 मतों के अंतर से जीत हासिल की।
27 अक्टूबर की सुबह आठ बजे शुरू हुई मतगणना लगातार करीब 35 घंटे तक चली। पूरी प्रक्रिया के दौरान मतगणना स्थल पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। अब निर्वाचन अधिकारी की ओर से आधिकारिक परिणाम घोषित किए जाने की औपचारिकता बाकी है।
गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक MLC सीट पर हार के बाद प्रत्याशी राजीव यादव ने मतगणना में गड़बड़ी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उन्हें जानबूझकर हराया गया है और 1000 वोटों की चोरी हुई है। राजीव यादव ने कहा कि वह इस मामले को लेकर निर्वाचन आयोग जाएंगे और कोर्ट में भी अपील करेंगे। उन्होंने चौथे राउंड में गिने गए 1,612 मतों की फोरेंसिक जांच कराने की मांग की। गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक एमएलसी चुनाव की मतगणना के दौरान लगातार करीब 35 घंटे से ड्यूटी कर रहे एजेंट भी थककर चूर हो गए।
पहले राउंड और प्रथम वरीयता की गिनती में ध्रुव त्रिपाठी को 11,881 मत, निर्दलीय राजीव यादव को 11,415 मत और समाजवादी पार्टी के डॉ.संजयन त्रिपाठी को 8,301 वोट मिले थे।
प्रथम वरीयता में किसी प्रत्याशी को निर्धारित कोटा न मिलने पर दूसरी वरीयता की गिनती शुरू हुई, जिसमें एलिमिनेशन राउंड के तहत 13 से अधिक प्रत्याशी बाहर होते गए।इस दौरान ध्रुव त्रिपाठी और राजीव यादव के बीच बढ़त का अंतर घटकर कभी 901 तो कभी महज 224 वोटों पर आ गया था। अंतिम चरण की मतगणना के दौरान दीनदयाल परिसर में भारी गहमागहमी देखने को मिली।