Protest
नागरिकता संशोधन बिल (CAB) व राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लेकर सबसे अधिक रोष मुसलमानों में देखने को मिल रहा है। मुस्लिम समाज का गुस्सा अब सड़कों पर आने लगा है। जुमा की नमाज के बाद सैकड़ों की तादाद में मुसलमान सड़क पर उतर आए। बैनर पोस्टर लेकर सुल्तान खां मस्जिद चैराहा तुर्कमानपुर से तुर्कमानपुर तिराहे तक विरोध मार्च निकाला। इस दौरान पुलिस से काफी नोकझोंक भी हुई। पुलिस ने एआईएमआईएम के जिलाध्यक्ष मो. इस्लाम, नाजिम शाही, अली अकबर, मसऊद अशरफ को हिरासत में लेकर उन्हें राजघाट थाना लाया। लेकिन लोगों ने विरोध प्रदर्शन खत्म नहीं किया। सैकड़ों की तादाद में नौजवान कैब व एनआरसी के विरोध में नारा लगाते हुए हुजूम की शक्ल में तुर्कमानपुर से पांडेहाता, घंटाघर चैराहा से होते हुए हाल्सीगंज चैक, पहाड़पुर पहुंचे। भीड़ को तितर बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया।
तुर्कमानपुर की रहने वाली राना फातिमा व जेबा ने बताया कि उनके घर के फरीद अहमद, शम्स अहमद को पुलिस ने जबरन घर का गेट खोलवाकर हिरासत में ले लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब घर की महिलाओं ने इसका विरोध किया तो पुलिस ने उनको अपशब्द कहे। जिसके बाद मोहल्ले वाले आक्रोशित हो गए और राजघाट थाने का घेराव किया। परिजनों ने मांग किया कि हिरासत में रखे गए युवाओं को जल्द छोड़ा जाए।
इसी तरह कैब व एनआरसी का विरोध करते हुए एक हुजूम टाउनहॉल गांधी प्रतिमा के पास पहुंचा। ये लोग नागरिकता संशोधन बिल वापस लेने की मांग कर रहे थे। लोगों ने कहा कि केंद्र सरकार का यह बिल धर्म के नाम पर बांटने वाला व असंवैधानिक है। एनआरसी के बायकॉट की मांग जोरशोर से उठी। बारिश और सर्द मौसम में विरोध प्रदर्शन जोरदार रहा।
बता दें कि कैब और एनआरसी को लेकर मुस्लिम मोहल्लों में काफी सरगर्मी देखी गई। शुक्रवार को तकरीबन हर मुस्लिम मोहल्ले में हलचल थी। जुमा की नमाज की तैयारियों के साथ विरोध प्रदर्शन के लिए भी तैयारियां चल रही थी। जुमा की नमाज के बाद काफी तादाद में लोग सुल्तान खां मस्जिद चैराहा तुर्कमानपुर पहुंचे। यह विरोध प्रदर्शन की शुरुआत करने वाला पहला चैराहा था। यहां पुलिस से भी नोकझोंक हुई। बारिश में भी प्रदर्शनकारियों की संख्या कम नहीं रही।
विरोध प्रदर्शन करने वालों ने बताया कि नागरिकता संशोधन बिल धर्म के आधार पर लाया गया है। इसमें एक खास धर्म के लोगों के साथ भेदभाव किया जा रहा है, जो अनुच्छेद-14 का उल्लंघन है। अनुच्छेद 14 समानता का अधिकार के तहत साफ तौर पर कहा गया है कि राज्य, भारत के राज्यक्षेत्र में किसी व्यक्ति को कानून के समक्ष समता से या कानून के समान संरक्षण से वंचित नहीं करेगा। भारतीय संविधान में अनुच्छेद-14 की यही परिभाषा है। इसका मतलब हुआ कि सरकार भारत में किसी भी व्यक्ति के साथ भेदभाव नहीं करेगी।
भारतीय संविधान के भाग-3 समता का अधिकार में अनुच्छेद-14 के साथ ही अनुच्छेद-15 जुड़ा है। इसमें कहा गया है, राज्य किसी नागरिक के खिलाफ सिर्फ धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान या इनमें से किसी के आधार पर कोई भेद नहीं करेगा। कैब संविधान के खिलाफ है। इसे किसी भी रुप में स्वीकार नहीं किया जा सकता है। एनआरसी भी स्वीकार नहीं है। इसीलिए यह विरोध प्रदर्शन किया गया है।