गोरखपुर

आप भी यूज करते हैं UPI तो हो जाएं सावधान! फर्जी स्क्रीनशॉट भेजकर शातिरों ने कारोबारी को लगाया ₹24 करोड़ का चूना

आमतौर पर लोग रोजमर्रा का सामान खरीदने के लिए UPI के जरिए छोटे-बड़े ट्रांजेक्शन (UPI Transaction) करते हैं। लोगों की आदत बन चुके UPI ट्रांजेक्शन के जरिए करोड़ों रुपए की हेराफेरी (UPI Fraud) का मामला सामने आया है। शातिरों ने UPI ट्रांजेक्शन के फर्जी स्क्रीनशॉट भेजकर एक रियल एस्टेट कारोबारी (Real estate dealer) को करोड़ों रुपए का चूना लगा दिया।
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May 08, 2026
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UPI ट्रांजेक्शन का फर्जी स्क्रीनशॉट भेजकर ठगी (Photo- IANS)

Fraud through UPI: गोरखपुर में UPI के जरिए शातिरों ने रियल एस्टेट कारोबारी को 24 करोड़ रुपए का चूना (UPI Scam in Gorakhpur) लगा दिया। आरोपियों ने फर्जी UPI ट्रांजेक्शन का स्क्रीनशॉट भेजकर व्यापारी को चूना लगाया है। अब पीड़ित पक्ष ने मदद की गुहार लगाई है। पीड़ित व्यापारी की शिकायत के बाद कोर्ट के आदेश पर गुलरिहा पुलिस ने 21 नामजद आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज करके जांच शुरू कर दी है।

UPI ट्रांजेक्शन का स्क्रीनशॉट भेजकर 24 करोड़ का चूना लगाया

गोरखपुर के रियल एस्टेट कारोबारी और शेयर मार्केट ब्रोकर विश्वजीत श्रीवास्तव की कंपनी को शातिरों ने 24 करोड़ रुपए का चूना लगा दिया। आरोप है कि शातिरों ने विश्वजीत श्रीवास्तव की कंपनी से साल 2023 से ठगी करना शुरू किया था। वित्तीय वर्ष के ऑडिट में जब खातों का मिलान हुआ तो फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ। आरोपी गूगल-पे, फोन-पे और बैंक ट्रांजेक्शन के फर्जी स्क्रीनशॉट भेजकर कंपनी को गुमराह करते रहे।

आरोपियों पर FIR, कई राज्यों से जुड़े तार

कारोबारी विश्वजीत श्रीवास्तव की कंपनी से फर्जी UPI स्क्रीनशॉट के जरिए करीब 24 करोड़ रुपए की ठगी करने वालों के खिलाफ पुलिस ने FIR दर्ज हो गई है। विश्वजीत को चूना लगाने वाले आरोपी बिहार, झारखंड और कुशीनगर के रहने वाले हैं। विश्वजीत श्रीवास्तव के मुताबिक, वर्ष 2023 में उनकी पहचान कुशीनगर निवासी सोनू जायसवाल से हुई थी। बाद में सोनू ने अपने रिश्तेदार शिवम जायसवाल से मुलाकात कराई। शिवम ने खुद को दिल्ली में कमीशन आधारित मार्केटिंग का अनुभवी कारोबारी बताया और दोनों कंपनी में एजेंट के रूप में काम करने लगे।

शिवम और सोनू ने मिलकर अलग-अलग लोगों से निवेश कराया और कंपनी के अकाउंटेंट हरिकेश प्रसाद को फर्जी ट्रांजेक्शन स्क्रीनशॉट भेजे। इन्हीं स्क्रीनशॉट के आधार पर रकम कंपनी के खाते में जमा मान ली जाती थी, जबकि वास्तविक भुगतान नहीं होता था। जांच में सामने आया कि आरोपी मोबाइल और लैपटॉप की मदद से फर्जी भुगतान रसीद तैयार करते थे। एक लाख रुपए भेजने के नाम पर सिर्फ 1 रुपया खाते में ट्रांसफर किया जाता था।

पुलिस से मदद नहीं मिली को कोर्ट पहुंचा पीड़ित

विश्वजीत श्रीवास्तव के मुताबिक, उन्होंने पूरे मामले की शिकायत पुलिस से की। उन्होंने ASP से भी शिकायत की, लेकिन कोई मदद नहीं मिली। इसके बाद व्यापारी ने कोर्ट में अपील की। विश्वजीत ने बताया कि ऑडिट में गड़बड़ी मिलने के बाद आरोपियों से पूछताछ की गई। पहले उन्होंने आरोपों से इन्कार किया, लेकिन दस्तावेज दिखाने पर रकम लौटाने का भरोसा दिया। इसके बावजूद रुपये वापस नहीं किए। अब कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने FIR दर्ज की है।

Updated on:
08 May 2026 04:58 pm
Published on:
08 May 2026 04:38 pm