प्रतिद्वंद्वी थे तो रुपये-साड़ी बांटने का लगाया था आरोप, साथ आ गए तो सरकार ने केस ही वापस ले लिया
यूपी के काबीना मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य को चुनाव को प्रभावित करने के लिए साड़ी व रुपये बांटने के केस सहित चार मामलों में राहत मिल गई है। प्रदेश सरकार ने उन पर चल रहे इस केस को वापस लेने का निर्णय ले लिया है। राज्यपाल की संस्तुति के बाद अब यह मामला खत्म हो चुका है। न्यायालय ने उनको बरी कर दिया है।
प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य सन् 2012 में बसपा के सिंबल पर पडरौना विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े थे। उस वक्त 24 जनवरी 2012 को उनके विरुद्ध नगर कोतवाली में मुकदमे दर्ज हुए थे।
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स्वामी प्रसाद मौर्य व उनके समर्थकों पर पडरौना में रुपये व साड़ी बांटने का आरोप लगा था। इसी तरह बिना अनुमति बैठक कर रुपये बांटने, बिना अनुमति खिरकिया बाजार में सभा करने तथा शाम को काफिले के साथ सिधुआ बाजार में बैठक करने के मामले में कोतवाली पुलिस काबीना मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य पर कई केस दर्ज किए थे।
2017 में स्वामी प्रसाद मौर्य बसपा से भाजपा में चले आए। भाजपा के सिंबल पर विधानसभा चुनाव लड़े और जीते। सूबे में भाजपा की सरकार बनने के बाद वह मंत्री बने।
भाजपा सरकार ने इसके बाद उन पर केस वापस लिए जाने की प्रक्रिया प्रारंभ की। सरकार की संस्तुति पर बीते दिनों राज्यपाल ने अनुमति दे दी। राज्यपाल से अनुमति मिलने के बाद कुशीनगर में अभियोजन पक्ष की ओर से डीजीसी गोरख प्रसाद यादव ने अपर सत्र न्यायालय/विशेष
अदालत एमपी/एमएलए में पत्रावलि पेश कर केस से बरी किए जाने की मांग की। इसके बाद उनको सभी चार केसों से बरी किए जाने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई।
बता दें कि बीते दिनों इन केसों में काबीना मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य पर गैर जमानती वारंट भी जारी किया गया। लेकिन वह किसी भी सुनवाई में पेश नहीं हुए थे। अब सरकार के आदेश के बाद उन पर से केस वापस कर लिया गया है।