
ग्रेटर नोएडा. तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती की सरकार के दौरान ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी में कर्मचारियों की भर्ती की जांच फिर से शुरू हो गई है। इस संबंध में योगी सरकार की ओर से अथॉरिटी के अधिकारियों को जल्द से जल्द जांच कार्रवाई करने के आदेश दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि बसपा के शासनकाल में करीब 54 कर्मचारियों की भर्तियां नियम-कायदों को ताक पर रखकर की गई थीं। इन भर्तियों में उस दौरान सत्ता पक्ष से जुड़े लोगों को लाभ पहुंचाया गया था।
बता दें कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में बसपा सरकार में की गई 54 कर्मचारियों की भर्ती को लेकर योगी सरकार के प्रमुख सचिव प्रभांशु श्रीवास्तव ने अथॉरिटी के सीईओ को पत्र भेजकर तुरंत कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। इस पत्र में प्रमुख सचिव ने अथॉरिटी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी को जांच के कुछ बिंदुओं का भी हवाला दिया, जिसमें मनोज कुमार, कमलेश कुमार, जगमोहन व दीपक आनंद की नियुक्ति पर आपत्ति जताई गई है।
बताया जा रहा है कि उस दौरान चतुर्थ श्रेणी के तहत 23 नियुक्तियां ऐसी हैं, जो बैकलॉग से अधिक हैं। इसके अलावा 10 नियुक्तियों में शैक्षिक योग्यता के आधार की भी अनदेखी करते हुए भर्ती की गई है। इतना ही बड़ी संख्या में ऐसी भी नियुक्तियां सामने आई हैं, जिन्हें संविदा पर रखना था, लेकिन नियम-कानून को ताक पर रखते हुए उन्हें स्थायी कर्मचारी के तौर पर भर्ती कर लिया गया।
दरअसल, इस मामले को पहले भी विधानसभा में गर्मजोशी से उठाया गया था। उस दौरान ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी कर्मचारियों की भर्ती मामले में विधान परिषद सदस्यों की एक आश्वासन समिति बनाई गई, जिसमें 2006 में प्राधिकरण के तत्कालीन सीईओ बृजेश कुमार को जांच अधिकारी भी नियुक्त कर दिया गया। सीईओ ने जांच के बाद 8 कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से हटा दिया था। हालांकि इसके बाद हटाए गए कर्मचारियों में से 4 हाईकोर्ट की शरण में चले गए थे, जिन्हें कोर्ट के आदेश पर बहाल कर दिया गया था। वहीं शेष कर्मचारियों को लेकर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है।