
ग्रेटर नोएडा. शाहबेरी में बनी अवैध इमारतों को ध्वस्त करने के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने नोटिस भेज दिए हैं। उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास अधिनियम की धारा दस के तहत भेजे गए नोटिस में बिल्डरों को एक सप्ताह में अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के आदेश दिए हैं। अगर बिल्डरों ने अवैध निर्माण को ध्वस्त नहीं किया तो प्राधिकरण खुद यह कार्रवाई करेगा और इसका खर्च बिल्डर से वसूल करेगा। ये नोटिस दर्जनों बायर्स को मिला है, जिसके बाद शाहबेरी के बायर्स में हलचल मच गई है। इससे उनकी रातों की नींद उड़ गई है। उन्हें सिर की छत छिनने का डर सता रहा है। इससे आहत बायर्स का कहना है कि बिल्डर्स, भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई करने के बजाय सरकार ने सारा बोझ हम पर डाल दिया है।
गले की फांस बन चुकी शाहबेरी की अवैध इमारतों को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण जल्द जमींदोज कर सकता है। पिछले साल जुलाई में बहुमंजिला दो इमारतों के धराशायी होने के कारण उसमें नौ लोगों की दबकर दर्दनाक मौत हो गई थी। इसके बाद से शासन से लेकर प्राधिकरण तक शाहबेरी में अवैध इमारतों को मुद्दा गूंज रहा है। शासन ने अवैध इमारतों का निर्माण करने वाले बिल्डरों के खिलाफ मामला दर्ज कराने, गैंगस्टर आदि की कार्रवाई के निर्देश के अलावा इसके लिए जिम्मेदार पुलिस व प्राधिकरण के अधिकारियों के नाम मांगे थे। अब ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने बायर्स को नोटिस भेजना शुरू कर दिया है. नोटिस में बायर्स को साफतौर पर चेतावनी दी गई है कि 7 दिन के अंदर निवेशक अपने घर को तोड़ें नहीं तो फिर प्राधिकरण कार्रवाई करेगा। बायर्स का का कहना है वे अपने घरो को छोड़ कर कही नही जाने वाले है।
प्राधिकरण की बगैर अनुमति किसी तरह का निर्माण अवैध है। क्षेत्र में अवैध निर्माण किया जा रहा है। जिससे इस क्षेत्र का समुचित नियोजन व जनता के हितों पर प्रतिकूल असर होगा। इसलिए शासन के निर्देश पर प्राधिकरण आइआइटी दिल्ली से 426 अवैध इमारतों का सुरक्षा ऑडिट करा रहा है। इसका काम लगभग पूरा हो चुका है। करीब चार दिन का कार्य शेष है। इसके बाद आइआइटी अपनी रिपोर्ट प्राधिकरण को सौंपेगी।
इस मामले पर शाहबेरी संघर्ष समिति का कहना है कि प्राधिकरण ने अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के लिए बिल्डरों को नोटिस जारी किए हैं। बिल्डरों ने फ्लैट खरीदारों को इसकी जानकारी नहीं दी है। फ्लैट खरीदार नोटिस के खिलाफ आंदोलन तेज करेंगे।