
Guna Heart Disease Risk After 30: दिल की बीमारी अब सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गई है। दुकान पर दिनभर बैठना हो या ऑफिस की कुर्सी पर लगातार 8-10 घंटे, इसके साथ तनाव, कम चलना और खान-पान की गड़बड़ी 30 की उम्र के बाद दिल पर असर डाल रही है। मध्यप्रदेश के गुना में सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों के आंकड़े भी इसी तरफ इशारा कर रहे हैं। वर्ष 2025 में सरकारी अस्पतालों में हाई रिस्क हृदय रोगियों की संख्या 756 थी, जो अब करीब दोगुनी होकर लगभग 1500 पहुंच गई है। इसमें निजी अस्पतालों में इलाज करा रहे मरीज शामिल नहीं हैं। इसलिए सावधानी जरुरी है और 30 प्लस के बाद युवा अपनी जांच कराएं तो खतरे को टाला जा सकता है।
जिला अस्पताल में रोजाना औसतन 20 से 25 लोग दिल से जुड़ी परेशानी लेकर पहुंच रहे हैं। तो वहीं निजी अस्पताल और क्लीनिकों को मिलाकर यह संख्या 125 से 150 मरीज प्रतिदिन तक पहुंचती है। हालांकि सरकारी अस्पतालों में हाईरिस्क मरीजों की संख्या हर दिन 4 से 5 पहुंच रही है। जिला अस्पताल में टीएमटी जांच की सुविधा है। निजी अस्पताल में इसी जांच पर करीब 2 से 2.5 हजार रुपए खर्च होते हैं। गंभीर हार्ट अटैक के मरीजों को क्रिटिकल यूनिट में तत्काल उपचार देने की व्यवस्था भी है।
सीपीएचसी सलाहकार सत्येंद्र शर्मा ने बताया कि 30 प्लस उम्र के लोगों की स्क्रीनिंग के दौरान स्वास्थ्यकर्मी सामुदायिक निगरानी पत्रक भरते हैं। इसमें व्यक्ति की उम्र, शारीरिक गतिविधि, तंबाकू सेवन, परिवार में बीमारी का इतिहास और दूसरी जीवनशैली से जुड़ी बातों के आधार पर स्कोर बनता है। स्कोर 4 से अधिक होने पर व्यक्ति को हाई रिस्क मानकर आगे जांच के लिए भेजा जाता है। यानी यह सिर्फ एक फॉर्म नहीं है। इसका मकसद ऐसे लोगों को भी पकड़ना है जिन्हें अभी कोई बड़ी शिकायत नहीं है, लेकिन आगे चलकर बीपी, शुगर या दिल की बीमारी का खतरा हो सकता है।
गुना जिले में 30 वर्ष से अधिक उम्र की करीब 7.18 लाख आबादी है। इन लोगों की स्क्रीनिंग में करीब 38 फीसदी में शुगर का खतरा पाया जा रहा है। यानी दोनों बीमारियों ही दिल के रोग का खतरा बढ़ा रही हैं। 38 फीसदी का आंकड़ा देखें तो करीब 2.73 लाख लोग जोखिम में आ रहे हैं या भविष्य में आ सकते हैं। यह बीमारी की पुष्टि नहीं, बल्कि आगे जांच की जरूरत बताने वाला संकेत है।
महिलाएं सबसे ज्यादा टालती हैं लक्षण
घर और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच महिलाएं अक्सर अपनी तकलीफ को पीछे कर देती हैं। थकान, सांस फूलना, सीने में दबाव या बेचैनी को कई बार सामान्य कमजोरी समझकर टाल दिया जाता है। हार्ट की समस्या में ऐसे संकेतों को नजरअंदाज करना महंगा पड़ सकता है।
डॉ. सुनील यादव, कंसल्टेंट फिजिशियन ने बताया कि दिल की सुरक्षा किसी एक दिन की कवायद नहीं है। रोज कम से कम कुछ समय पैदल चलना, लगातार बैठने के बीच उठकर चलना, तंबाकू से दूरी और खाने में नमक-तेल कम रखना जरूरी है। 30 की उम्र के बाद बीपी और शुगर की नियमित जांच कराते रहें। सीने में दबाव या दर्द, अचानक सांस फूलना, ठंडा पसीना या असामान्य कमजोरी महसूस हो तो इसे गैस या थकान मानकर घर पर न बैठें। समय पर अस्पताल पहुंचना सबसे जरूरी है।