गुना

गुना में 600 में मिल रहा 1000 रुपए किलो वाला देशी घी, कैसे ? ऐसे करें असली-नकली की पहचान

Packed fake ghee: पैक्ड और डेयरी घी के तीन साल में सिर्फ 122 सैंपल लिए गए, जिनमें 9 फेल हुए और 2.25 लाख रुपये जुर्माना लगा, जांच की नियमितता पर संदेह जताया गया है।
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Oct 07, 2026
असली और नकली घी, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source: AI Image)
असली और नकली घी, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source: AI Image)

Guna news: मध्यप्रदेश में गुना शहर के बाजार में बिक रहे पैक्ड और डेयरी के घी की शुद्धता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। दूध उत्पादक शुद्ध देशी घी की कीमत से 1000 रुपए प्रति किलो के आसपास बताते हैं। दूसरी ओर बाजार में 500 से 600 रुपए किलो, खासकर करीब 600 रुपए में पैक्ड और डेयरी का घी उपलब्ध है। थाली में जहर अभियान के तहत पत्रिका ने खुले से लेकर पैक्ड घी की पड़ताल की तो सबसे बड़ा सवाल कीमत के इस अंतर पर सामने आया। पत्रिका ने अलग-अलग डेयरियों और दुकानों से घी लेकर बाजार की स्थिति को समझाने की कोशिश की। पैक्ड घी पर शुद्धता, गुणवत्ता, निर्माण और अन्य दावे दर्ज मिले, लेकिन उपभोक्ता के सामने यह स्पष्ट नहीं है कि जिस उत्पाद की कीमत देशी घी के मुकाबले करीब आधी है, उसकी निर्माण प्रक्रिया या और गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच कब और कितनी बार हुई।

सिर्फ पैकेट पर दर्ज दावे उपभोक्ता के लिए गुणवत्ता की पूरी तस्वीर नहीं बताते। ऐसे में सवाल कीमत से आगे बढकर जांच और निगरानी का है। पड़ताल के दौरान कुछ दुकानों पर पूजा के नाम से प्रसिद्ध चालू घी 400 रुपए प्रति किलोग्राम तक बिक रहा है। यह इतना ज्यादा ठोस होता है कि, गर्मियों में भी बर्फ और पत्थर की तरफ जमा हुआ नजर आता है।

3 साल में लिए महज 122 सैंपल

खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा पिछले तीन साल में घी कुल 122 नमूने लिए हैं। इनमें 85 खुले और 37 पैक्ड घी के है। लेकिन जिस हिसाब से शहर सहित जिलेभर में डेयरियों व किराना दुकानों पर घी बिक रहा है उसके मुकाबले यह काफी कम है। विभागीय स्तर पर तीन साल में जो सैंपल लिए हैं उनमें से 9 नमूने फेल हुए हैं। इन पर 2.25 लाख रुपए जुर्माना कोर्ट के जरिए लगाया गया है। हालांकि जानकारों का कहना है कि, घी की बिक्री के हिसाब से सैंपलिंग काफी कम है। वहीं पैक्ड घी के नमूनों की जांच को लेकर भी सवाल बने हुए हैं। ऐसे में उपभोक्ता के सामने यह स्पष्ट नहीं है कि बाजार में बिक रहे घी की गुणवत्ता की निगरानी किस स्तर पर और कितनी नियमितता से हो रही है।

घी की कीमत में आधे से ज्यादा का अंतर

स्थानीय स्तर पर तैयार देशी घी की कीमत करीब 900 से 1000 रुपए किलो बताई जा रही है। जबकि बाजार में करीब 500-600 रुपए किलो में घी उपलब्ध है। यानी कीमत में करीब 400 से 500 रुपए तक का अंतर है। 'थाली में जहर' अभियान की पड़ताल का केंद्र यही अंतर है। सवाल यह नहीं कि सस्ता घी अपने आप में खराब है, बल्कि सवाल यह है कि इतनी कम कीमत में तैयार होने वाले घी की वास्तविक निर्माण प्रकिया क्या है, उसमें इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल क्या है और उसकी गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर हुई है।

बड़ा सवाल पैक्ड घी जांच के दायरे में क्यों नहीं

बाजार में अलग-अलग ब्रांड के पैक्ड घी उपलब्ध हैं। पैकेट पर शुद्धता, गुणवत्ता, निर्माण और अन्य जानकारियां दर्ज रहती हैं। अभियान के तहत अलग-अलग स्थानों से घी लेने पर यह सामने आया कि पैकिंग पर किए गए दावों की वास्तविक गुणवत्ता का पता सिर्फ पैकेट देखकर नहीं लगाया जा सकता। इसके लिए प्रयोगशाला जांच जरूरी है। ऐसे में सवाल है कि बाजार में बिक रहे पैक्ड घी के कितने नमूने विभाग ने लिए और उनकी रिपोर्ट क्या रही ?

असली और नकली घी ऐसे पहचानें

  • सबसे पहले हथेली पर थोड़ा सा घी रखें।
  • अगर घी असली है तो ये हाथ की गर्मी से तुरंत पिघल जाता है।
  • अगर घी काफी समय तक ठोस ही रहता है या देर से पिघलता है तो इसमें मिलावटी है।
  • आप पानी के माध्यम से भी इसे चेक कर सकते है। पानी में एक चम्मच घी डालें। शुद्ध घी पानी की सतह पर तैरता है।मिलावटी घी पानी के नीचे बैठ जाता है।

तीन साल में घी के कुल 122 सैंपल लिए हैं। इसमें 85 खुले और 37 पैक्ड घी के हैं। इनमें से 9 सैंपल फेल हुए हैं। इन 9 केस में अदालत के जरिए 2.25 लाख का जुर्माना लगाया गया है।- नवीन जैन, खाद्य सुरक्षा अधिकारी गुना

Updated on:
07 Oct 2026 02:52 pm
Published on:
07 Oct 2026 02:52 pm