गुना

एक कहानी ऐसी भी… अंग्रेजों की हिट लिस्ट में थे जेपी नारायण, तब MP का ये परिवार बना था उनकी ढाल

Independence Day 2025: भारत छोड़ो आंदोलन के नायक जयप्रकाश नारायण और उनकी पत्नी प्रभादेवी को अंग्रेजों से बचाते हुए MP के लुंबा परिवार ने अपने घर में चार दिन तक सुरक्षित रखा था।

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Aug 15, 2025
jp narayan guna lumba family Quit India Movement independence day 2025 (फोटो- सोशल मीडिया)

Independence Day 2025: देश को आजादी दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले जयप्रकाश नारायण का गुना से जुड़ाव रहा है। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement) के दौरान जाने माने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जयप्रकाश नारायण (जेपी) राम मनोहर लोहिया आदि जेल से फरार हो गए थे। जेपी ने भूमिगत रहकर आंदोलन का नेतृत्व किया था। इस कारण से जेपी अंग्रेजों की सरकार की सर्वाधिक वांछित सूची में थे। जेल से फरार होने के बाद जयप्रकाश नारायण (JP Narayan) गुना आ गए थे और उन्होंने यहा लुंबा परिवार के यहां शरण ली थी। इसके बाद 1969-70 में गुना के गिरधारी लाल लुंबा, उनके पुत्र यशवंत राव लुंबा और सुरेन्द्र लुंबा को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का दर्जा मिला था।

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जेपी और पत्नी प्रभा देवी को दी थी शरण

इस परिवार से जुड़े अतुल लुंबा आजादी के लिए संघर्ष से जुड़ा यह वाक्या सुनाते हुए बताते हैं कि 1945 में जीनघर में आयोजित कांग्रेस के प्रजामंडल का सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया था, जिसमें शामिल होने जेपी और उनकी पत्नी प्रभादेवी को भी शामिल होना था। परंतु अंग्रेजी सरकार को जेपी की तलाश थी।

उसके उ‌द्घाटन के लिए आने वाले जेपी को शासन ने लालकोठी के नाम से पहचाने जाने वाले विश्रामगृह में ठहरने की अनुमति नहीं दी थी। उन्हें उस समय के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी गिरधारीलाल लुंबा ने अपने घर रुकवाया था। ऐसे व्यक्ति के सुपुत्र यशवंत राव लुंबा और सुरेन्द्र लुंबा भी बचपन से ही राष्ट्र भक्त रहे थे।

जेपी को शरण देने की मिली सजा

साहित्यकार लुंबा बताते हैं कि इसका खामियाजा यूं भी भुगता था उस समय उज्जैन में बर्फ बनती थी, जिसका एकाधिकार मिलना था, लेकिन उसे रद्द कर दिया। लुंबा परिवार के अतुल लुंबा बताते हैं कि 1945 में आजादी के दीवानों को भरोसा था कि अब देश को स्वतंत्र होने में ज्यादा देर नहीं हैं।

इस बीच कांग्रेस के स्थानीय प्रजामंडल संगठन के बाद ही गुना में प्रजामंडल सम्मेलन हुआ जिसमें स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सागर सिंह सिसौदिया, रतनलाल लाहोटी, जानी चन्द्र मॉडल, श्याम नारायण विजयवर्गीय, शिवचरण गर्ग, घनश्याम विजयवर्गीय, रमनलाल प्रेमी, वेदप्रकाश सूद सहित सैकड़ों लोग शामिल हुए थे। हालांकि गिरधारीलाल और उनके परिवार को इससे कई समस्याओं का सामना करना पड़ा। गिरधारीलाल के बाद उनके पुत्र यशवंतराव लुंबा जिनका जन्म 2 जुलाई 1924 को हुआ था। वे भी राजनीति में सक्रिय थे। 1933 में किसान सम्मेलन में सक्रिय रूप से शामिल हुए थे।

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Updated on:
15 Aug 2025 02:39 pm
Published on:
15 Aug 2025 02:38 pm
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