गुडगाँव

Russia-Ukraine War: युद्ध में दलालों के धोखे से गई गुरुग्राम के अंशु की जान, 6 महीने तक परिवार अनजान, फिर ताबूत में शव पहुंचा गांव

Russia-Ukraine War: रूस में MBA करने गए रेवाड़ी के 22 वर्षीय अंशु की यूक्रेन युद्ध में मौत हो गई। जब उसका शव ताबूत में गांव पहुंचा, तो रूसी वर्दी देख हर कोई रो पड़ा। पिता का आरोप है कि दलालों ने धोखे से उसे सेना में भर्ती कर युद्ध में झोंक दिया था।

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Apr 18, 2026

Anshu Death Russia:हरियाणा के रेवाड़ी स्थित काठुवास गांव में शुक्रवार को तब मातम छा गया जब रूस में शिक्षा का सपना देखने गए 22 वर्षीय अंशु का शव एक बंद ताबूत में घर लौटा। श्मशान घाट पर जब कटर मशीन की गूंज के बीच उस लोहे के ताबूत को खोला गया, तो भीतर अंशु के पार्थिव शरीर के साथ रखी रूसी सेना की वर्दी और जूते चीख-चीख कर उसकी त्रासदी बयां कर रहे थे। बिलखते पिता ने आरोप लगाया कि उनके बेटे को दलालों ने शिक्षा का झांसा देकर धोखा किया और धोखे से रूसी फौज में भर्ती कर उसे मौत के मैदान (रूस-यूक्रेन युद्ध) में झोंक दिया।

जिस बेटे को पिता ने अपनी आंखों का तारा बनाकर, सुनहरे भविष्य की उम्मीद के साथ बाहर पढ़ने भेजा था, उसे यूं बेजान देख पूरे गांव का दिल दहल उठा। श्मशान घाट पर बड़े भाई मोहित ने कांपते हाथों से अंशु की चिता को मुखाग्नि दी। ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि यह महज एक मौत नहीं, बल्कि उन बेरहम दलालों की सोची-समझी साजिश है, जिन्होंने शिक्षा का झांसा देकर एक होनहार छात्र की जिंदगी का सौदा कर दिया और उसे जबरन मौत के मोर्चे पर धकेल दिया।

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'6 महीने से बेटे से बात नहीं हुई'

परिवहन विभाग में काम करने वाले पिता राकेश कुमार की आंखों के आंसू नहीं सूख रहे। रो रो के बूरा हाल हो गया है। पिता ने बताया कि अंशु बीए करने के बाद एमबीए विदेश से करने का सपना लेकर 30 अप्रैल 2025 में स्टडी वीजा पर रूस गया था। कुछ महीने कॉलेज में पढ़ाई भी की, लेकिन फिर दलालों के जाल में फंस गया। पिता का आरोप है कि दलालों ने बेटे अंशु को जबर्दस्ती सितंबर 2025 में रूसी सेना में भर्ती करा दिया। अंशु ने आखिरी बार 18 अक्टूबर 2025 को घर बात की थी। अंशु ने बताया था कि सितंबर में वह रूस की सेना में भर्ती हुआ है। अब युद्ध के लिए उसे यूक्रेन की फर्स्ट लाइन में जा रहा है और अब कुछ दिनों के बाद ही बातचीत हो पाएगी।

'जमा-पूंजी लगाकर रूस पढ़ने भेजा था'

काठुवास निवासी राकेश कुमार की पत्नी का देहांत पहले ही हो चुका था। तीन भाई-बहनों में अंशु सबसे छोटा और सबका लाडला था। पिता ने अपनी जमा-पूंजी लगाकर उसे पढ़ने के लिए रूस भेजा था ताकि वह बड़ा आदमी बन सके, लेकिन घर लौटी तो सिर्फ उसकी यादें और ताबूत। गांव वालों का कहना है कि सरकार को उन दलालों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए जो मासूम युवाओं को पढ़ाई के नाम पर मौत के मुंह में धकेल रहे हैं। रूस गए हरियाणा के सात बेटे अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

इन बातों से अनजान था परिवार

● जानकारी के अनुसार फोन पर बातचीत के कुछ समय बाद ही अंशु की मौत को हो चुकी थी, लेकिन परिवार छह महीने तक अनजान रहा। 2 अप्रैल को देश के विदेश मंत्री से मुलाकात हुई।

● 4 अप्रैल 2026 को पिता राकेश कुमार के पास रूस के मॉस्को से फोन आया। उन्हें बताया गया कि अंशु की मौत हो चुकी है और उसका शव मिल चुका है और भारत में भेजने में 10 से 15 दिन लगेंगे।

● 16 अप्रैल को सूचना मिली कि शव शुक्रवार को दिल्ली एयरपोर्ट आ रहा है। शुक्रवार सुबह दिल्ली से शव लेने के बाद परिवार 10 बजे गांव के श्मशान घाट में उसका अंतिम संस्कार किया गया।

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