Assam Assembly Election 2026: असम चुनाव से पहले सियासत गरमा गई है। मंत्री पीयूष हजारिका ने कांग्रेस और ओवैसी पर समाज को बांटने का आरोप लगाया है। जानिए जुबीन गर्ग के नाम पर क्यों मचा है घमासान और क्या है बीजेपी का मास्टर प्लान।
Assam Assembly Election 2026: असम की राजनीति में सियासी घमासान मचा हुआ है। 2026 के विधानसभा चुनाव पास आते ही आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
हाल ही में असम सरकार के कद्दावर मंत्री पीयूष हजारिका ने कांग्रेस और एआईएमआईएम (AIMIM) चीफ असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
यह मामला सिर्फ विकास तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब इसमें असम की शान कहे जाने वाले सांस्कृतिक नायकों की एंट्री भी हो गई है।
हजारिका ने साफ कहा है कि कांग्रेस अपनी गंदी राजनीति के लिए महान कलाकारों के परिवार को बीच में ला रही है, जो उसे भारी पड़ेगा।
शनिवार को मंत्री पीयूष हजारिका कहा कि बीजेपी सरकार ने पिछले सालों में असम की तस्वीर बदल दी है। सड़कों का जाल हो या आम जनता की भलाई के काम, सरकार ने हर मोर्चे पर रिकॉर्ड बनाया है। हजारिका ने दावा किया कि असम की जनता एक बार फिर बीजेपी और उसके साथियों पर ही भरोसा जताएगी और उन्होंने कांग्रेस की चुनावी रणनीति को आलोचना की
हजारिका ने कांग्रेस को घेरते हुए कहा कि पार्टी ने असम के चहेते संगीतकार जुबीन गर्ग के परिवार का नाम राजनीति में घसीट कर अपनी सबसे बड़ी गलती की है। उन्होंने कहा कि कलाकार पूरे समाज के होते हैं, उन्हें वोट बैंक की राजनीति के लिए इस्तेमाल करना गलत है। हजारिका के अनुसार , जुबीन गर्ग के परिवार ने भी इस बात पर नाराजगी जताई है। बीजेपी अब इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस से माफी की मांग कर रही है, ताकि सांस्कृतिक धरोहरों का सम्मान बना रहे।
यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) पर बात करते हुए मंत्री ने साफ संदेश दिया कि देश में 'एक विधान और एक संविधान' होना चाहिए, उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि असम के विशेष क्षेत्रों (Sixth Schedule Areas) के अधिकारों का पूरा सम्मान किया जाएगा। वहीं, असदुद्दीन ओवैसी पर निशाना साधते हुए हजारिका ने कहा कि बाहर से आकर भड़काऊ नारे लगाने वाले लोग असम की शांति और भाईचारे को नहीं बिगाड़ सकते। उन्होंने ओवैसी के बयानों को समाज को बांटने वाला बताया और कहा कि बीजेपी असमिया पहचान और यहां के मूल निवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए चट्टान की तरह खड़ी है।
हजारिका ने यह भी कहा की चुनाव सिर्फ सत्ता के लिए नहीं, बल्कि असम की आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित करना है। सरकार का लक्ष्य राज्य की डेमोग्राफी और सांस्कृतिक विरासत को बचाना है। उन्होंने जनता को भरोसा दिलाया कि विकास और असमिया पहचान के मुद्दे पर बीजेपी पीछे नहीं हटेगी।