
Income Tax Return: आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम घड़ियां चल रही है और टैक्स प्रोफेशनल्स से लेकर आम करदाता तक रिटर्न सबमिट करने की दौड़ में लगे हैं लेकिन, बड़ी संख्या में लोग यह गलती कर बैठते हैं कि पोर्टल पर आइटीआर अपलोड होते ही उनका काम खत्म हो गया। जानकारों के अनुसार, ई-वेरिफिकेशन के बिना आयकर विभाग आपके रिटर्न को वैध ही नहीं मानता। यदि तय समय सीमा (वर्तमान में 30 दिन) के भीतर सत्यापन नहीं हुआ, तो आपका रिटर्न अमान्य घोषित हो सकता है। आयकर रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई है।
रिटर्न दाखिल करने के तुरंत बाद करदाता को आधार ओटीपी, नेट बैंकिंग, डीमैट अकाउंट या प्री-वैलिडेटेड बैंक खाते जैसी उपलब्ध ऑनलाइन सुविधाओं के माध्यम से ई-वेरिफिकेशन कर लेना चाहिए। यदि किसी कारणवश ऑनलाइन सत्यापन संभव नहीं हो तो निर्धारित समय सीमा के भीतर हस्ताक्षरित आइटीआर-वी को सीपीसी, बेंगलुरु भेजना आवश्यक है। ई-वेरिफिकेशन सफल होने के बाद पोर्टल पर उसकी पुष्टि अवश्य देखनी चाहिए तथा ई-मेल एवं मोबाइल पर प्राप्त कन्फर्मेशन संदेश को सुरक्षित रखना चाहिए।
आपके बैंक खाते में भेजता है। इसलिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि आयकर पोर्टल पर आपका बैंक खाता प्री-वैलिडेटेड हो, वह आपके नंबर से लिंक हो और व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह अपडेट हो। छोटी सी गलती भी आपके रिफंड को हफ्तों या महीनों अटका सकती है।
आयकर रिटर्न दाखिल करने के बाद उसका ई-वेरिफिकेशन करना उतना ही आवश्यक है, जितना रिटर्न भरना। बिना ई-वेरिफिकेशन के प्रक्रिया पूरी नहीं मानी जाती और रिफंड जारी नहीं होता। जिन करदाताओं का टैक्स अधिक कटा है, वे समय पर सही रिटर्न और तत्काल ई-वेरिफिकेशन के जरिए आसानी से अपना रिफंड पा सकते हैं। समय पर ई-वेरिफिकेशन करने से रिटर्न तेजी से प्रोसेस होता है, रिफंड जल्दी मिलता है और आप विभाग के किसी भी अनावश्यक नोटिस या कानूनी झंझट से बच जाते हैं। - पंकज शर्मा, सीए
-31 जुलाई, नौकरीपेशा, पेंशनभोगी और ऐसे व्यक्तिगत करदाता जिनका ऑडिट आवश्यक नहीं है।
-31 अगस्त, ऐसे व्यवसायी और प्रोफेशनल्स, जिन पर टैक्स ऑडिट लागू नहीं होता।
-31 अक्टूबर, टैक्स ऑडिट के दायरे में आने वाले व्यवसाय व फर्म।
-30 नवंबर, ट्रांसफर प्राइसिंग से जुड़े विशेष मामलों के करदाता।