
ग्वालियर। क्या किसी मासूम को ऐसी मौत भी दी जा सकती है जिसकी कल्पना करने से पहले हर किसी की रूह कांप जाएगी। लेकिन आरोपियों ने इस बात की जरा भी चिंता नहीं की और उस 17 साल के मासूम को ऐसी मौत दे दी कि उसकी बॉडी को पहचाने वाले भी किसी तरह उसकी पहचान नहीं कर सके। किसान की पुश्तैनी जमीन का सौदा उसके १७ साल के बेटे की जान का दुश्मन बन गया। जमीन करीब ढाई करोड़ में बिकी है। पड़ोसी को पता चला तो उसने चचेरे भाईयों के साथ किसान के बेटे को अगवा कर उसका गला घोंट दिया। शव को अपने खेत में दफन कर हत्यारे उसके परिजन से 50 लाख की फिरौती मांगने की प्लानिंग में थे। शनिवार को परिजन के शक जाहिर करने पर पुलिस ने उन्हें उठा लिया।
इंट्रोगेट करने पर हत्यारों ने वारदात का खुलासा किया। लडक़े की नृशंस हत्या से मऊ गांव में तनाव हो गया। गांववालों ने हत्यारों के घर पर हमला कर उसे जमींदोज कर दिया।दिनेश लोधी निवासी धौलपुर ने बताया भानजे राजू (17) पुत्र मोहरसिंह को पड़ोसी कमलेश लोधी, उसके चचेरे भाई प्रदीप और दीपक ने मार डाला। क्योंकि जीजा मोहर सिंह के पास मऊ गांव में करीब 18 बीघा जमीन थी। यहां जीडीए की प्लानिंग चल रही है इस आशंका पर मोहर सिंह ने जमीन का करीब ढाई करोड़ में सौदा कर दिया था। जमीन महंगी कीमत पर बिकने की जानकारी पूरे गांव को थी।
पड़ोसी कमलेश लोधी का प्लान था कि राजू को अगवा कर उसके पिता से 50 लाख की फिरौती वसूली जाए। इसलिए उसने चचेरे भाई प्रदीप और दीपक के साथ मिलकर 17 अक्टूबर को राजू को अगवा किया। नवदुर्गा पर आरती में शामिल होने के बहाने बुलाया, फिर उसे मार डाला। शव को कमलेश ने अपने खेत में दफन कर दिया शव गल जाए इसलिए हत्यारे उसमें नमक और पानी डालते रहे।
केबल वायर से गला घोंट दिया
हत्या का मास्टरमाइंड कमलेश मलेशिया में ड्राइवर की नौकरी करता था। करीब दो महीने पहले वापस गांव लौटा था। मोहर सिंह की जमीन के सौदे का पता चलने पर राजू को अगवा करने की प्लानिंग में था। हत्या से दो दिन पहले कमलेश, प्रदीप, दीपक उर्फ दीपू उसे शीतला माता दर्शन के लिए ले गए थे। वहां से लौटते वक्त रात हो गई तो रात को शहर में ही रुके। दूसरे दिन राजू को सही सलामत घर ले आए।
जिससे उसके परिजन को शक नहीं हो। 17 अक्टूबर को हत्यारों ने लग्जरी का इंतजाम कर रखा था। राजू को गाने सुनने का शौक था इसलिए उसे बहाने से बुलाया। फिर ड्राइवर सीट पर बैठा लिया। राजू कार में बैठकर गाने सुनने लगा उस दौरान दीपक और प्रदीप ने उसके हाथ, पैर पकड़ लिए। कमलेश ने केबल वायर से उसका गला घोंट दिया। हत्या करने के बाद शव को दफन किया।
यह थी योजना, पहचान जाएगा इसलिए मार डाला
हत्यारों ने पुलिस को बताया राजू को अगवा करने के तुरंत बाद ही उसकी हत्या कर दी। क्योंकि उसे जिंदा छोड़ते तो वह पहचान जाता। राजू मोबाइल फोन रखता था। योजना थी कि उसके शव को ठिकाने लगाकर राजू के मोबाइल फोन से सिम निकाल कर फेंक देंगे। फिर कुछ दिन पुलिस और राजू के परिवार के मूवमेंट पर नजर रखी जाएगी। हालात देखकर राजू के फोन से उसके घर 50 लाख की फिरौती के मैसेज भेजते।
100 जवानों से घेरा गांव तब खोदा शव
राजू के परिजन लगातार कमलेश और उसके भाईयों पर शक जाहिर कर रहे थे। परिजन का कहना है राजू के साथ वारदात में सचिन भी शामिल था। उसने ही राजू के लापता होने के बाद सबसे पहले फोन किया था। फिर उसे आगरा, धौलपुर और मुरैना में उसके होने की जानकारियां दी थी। उनकी सूचना पर पुलिस ने सचिन को राउंडअप भी किया लेकिन फिर उसे क्लीन चिट दे दी।
सभी आरोपियों को पुलिस ने शनिवार को दबोच लिया। इंट्रोगेट करने पर कमलेश, दीपक और प्रदीप ने राजू को दफन करने का ठिकाना बताया तो पुलिस रात करीब डेढ़ बजे के बाद तीनों को गांव में ले गई। लेकिन उसे खुटका था कि गांव में हालात बिगड़ सकते हैं। इसलिए करीब क्यूआरटी सहित करीब 100 जवानों के फोर्स ने गांव को घेर लिया। कमलेश के खेत से राजू के शव को निकाला।
गांव वालों ने ढहाया आरोपी का घर
राजू का शव मिलने से गांव में तनाव हो गया, आक्रोशित लोगों ने हत्यारोपी कमलेश के घर पर हमला कर उसे गिरा दिया। स्थिति को भांपकर पुलिस ने आरोपी के परिजन को वहां से निकाल लिया था। सुरक्षा के लिए वहां पुलिस तैनात कर दी। लेकिन फिर भी लोगों का आक्रोश कंट्रोल नहीं हुआ। रविवार दोपहर को महिलाओं खाली पड़े टूटे मकान पर पथराव कर दिया।
हत्यारों के परिजन से मिला मोबाइल
अपहरण और हत्याकांड के खुलासे के बाद पुलिस और राजू के परिजन की दलीलों में अंतर है। पुलिस बता रही है कि कमलेश ने राजू की हत्या का तरीका क्राइम सीरियल से सीखा। उसी तर्ज पर उसने राजू को कार में बैठाकर हत्या की, उसके कपड़े उतार कर खेत में ले जाकर जला दिए। शव को जल्दी नष्ट करने के लिए नमक और पानी का इस्तेमाल करता रहा। उसने राजू का मोबाइल फोन आनंद नगर में रेल पटरियों के पास दफन कर वहां चिन्ह बना दिया था। जबकि परिजन का कहना है कि राजू का शव दफन करने के बाद हत्यारे उसका मोबाइल फोन परिवार के बुजुर्ग पंचम सिंह को दे गए थे।
कोर्ट में बताएंगे सच
परिजन का कहना है कि राजू के साथ वारदात में सचिन लोधी भी शामिल रहा है, पुलिस ने तफ्तीश में उसे दोषी क्यों नहीं माना है यह उन्हें नहीं पता लेकिन वे अदालत में उसका सच बताएंगे। उनके पास सचिन के खिलाफ पुख्ता सुबूत हैं। पुलिस को भी सब जानकारियां दी थीं। उसके आधार पर ही राजू के किडनेप और हत्या का खुलासा हुआ था।
"छात्र के किडनेप और हत्या की वारदात में विवेचना की जा रही है। आरोपियों की कॉल डिटेल, लोकेशन के आधार पर कई सुबूत मिलेंगे। इसमें उनके आधार कार्रवाई होगी। घटना में शामिल किसी आरोपी को नहीं बख्शा जाएगा।"
नवनीत भसीन, एसपी ग्वालियर