
MP ELECLTION 2018: MP के इस क्षेत्र की 5 में से 4 सीटों पर रहता है इस रॉयल फैमली की कब्जा, जानिए क्या है यहां का पॉलिटिकल गणित
शिवपुरी। जिले में पांच विधानसभा सीट हैं, जिनमें से करैरा व पोहरी का संसदीय क्षेत्र ग्वालियर है, जबकि पिछोर, शिवपुरी व कोलारस विधानसभा, गुना-शिवपुरी संसदीय क्षेत्र में आती हैं। शिवपुरी जिले में दोनों प्रमुख दल कांगे्रस व भाजपा की राजनीति महल से शुरू होकर वहीं पर खत्म भी होती है। कांगे्रस में एकमात्र नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया हैं, तो भाजपा में यशोधरा राजे सिंधिया। हर बार चुनाव में यह आरोप भी लगते रहे हैं कि जब भी यशोधरा राजे स्वयं चुनाव लड़ती हैं तो ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस प्रत्याशी की बजाय अपनी बुआ की मदद करते हैं। इन आरोप-प्रत्यारोप के बीच शिवपुरी की राजनीति इन दो ध्रुवों के इर्द-गिर्द ही घूमती रहती है।
गौरतलब है कि बीते 2013 के आम चुनाव में शिवपुरी विधानसभा से जब यशोधरा राजे के खिलाफ कांगे्रस से वीरेंद्र रघुवंशी ने चुनाव लड़ा तो परिणाम वो ही आया और वीरेंद्र को हार मिली। हारने के बाद वीरेंद्र रघुवंशी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया पर न केवल खुलकर आरोप लगाए, बल्कि हार की समीक्षा करने भोपाल आए राहुल गांधी से भी कहा कि मुझे कांगे्रस ने ही हरवाया।
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उसके बाद से ही वीरेंद्र रघुवंशी ने कांग्रेस को छोडकऱ भाजपा का दामन थाम लिया है। दोनों ही दल के राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा हर बार रहती है कि देखने-दिखाने के लिए बुआ और भतीजा एक-दूसरे पर कटाक्ष करते हैं, लेकिन पर्दे के पीछे एक-दूसरे की मदद करते हैं। पिछोर को छोड़ दिया जाए तो शेष चारों विधानसभा शिवपुरी, कोलारस, पोहरी व करैरा में महल का वर्चस्व रहता है और महल जिसे चाहता है, वो ही विधायक बनता आया है।
शिवपुरी विधानसभा के ऐेसे बन रहे हालात
शिवपुरी विधानसभा में विधायक भाजपा की यशोधरा राजे सिंधिया हैं, जो प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री भी हैं। यशोधरा राजे सिंधिया यहां से तीसरी बार विधायक हैं, जबकि उनसे पूर्व भी भाजपा से जो विधायक रहे, वो उनके ही सहयोग से बन सके। चुनाव जीतने के बाद यशोधरा राजे का सपना था कि शिवपुरी विधानसभा को वे अलग पहचान दे पाएंगी, लेकिन नगरपालिका कांग्रेस की होने की वजह से उनका अधिकांश समय नपा से विवाद में ही व्यतीत हो गया।
इतना ही नहीं फर्जी बीपीएल कार्ड के मामले में कथित तौर पर यशोधरा के इशारे पर ही पुलिस ने नपाध्यक्ष मुन्नालाल कुशवाह को रातोंरात ग्वालियर से गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। विधायक व नपाध्यक्ष के बीच चली खींचतान के चलते शहर का विकास नहीं हो पाया। अब जबकि भाजपा से यशोधरा राजे हैं, तो उनके सामने कांग्रेस का कौन सा प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरेगा, यह देखना भी दिलचस्प होगा।
उपचुनाव के बाद भी उठे थे ऐसे सवाल
कोलारस उपचुनाव में एक तरफ जहां कांग्रेस की कमान ज्योतिरादित्य सिंधिया के हाथ में थी, वहीं भाजपा की स्टार प्रचारक उनकी बुआ यशोधरा राजे सिंधिया रहीं। हालांकि उपचुनाव के शुरुआती दौर में यशोधरा राजे को भाजपा ने दूर रखा था, लेकिन बाद में उन्हें ही स्टार प्रचारक बनाकर मैदान में उतारा गया। चुनाव जीतने के लिए भाजपा ने सभी हथकंडे अपनाए, लेकिन जीत कांग्रेस को ही मिली। जब चुनाव परिणाम आए तो कुछमहल विरोधियों ने इस बात को भी हवा देने का प्रयास किया कि कहीं पर्दे के पीछे से बुआ ने भतीजे की मदद तो नहीं कर दी। हालांकि हार का अंतर कम होने से इन बातों को ज्यादा हवा नहीं मिल सकी।
Updated on:
22 Oct 2018 05:55 pm
Published on:
22 Oct 2018 05:12 pm
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