
MP High Court News: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने लोक निर्माण विभाग (PWD) गुना में अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े मामले में गंभीर लापरवाही और अदालत के समक्ष गलत तथ्य पेश करने पर सख्त नाराजगी जताई है। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि प्रदेश के कुछ विभाग क्लास-वन अधिकारियों के बजाय क्लास-थ्री कर्मचारियों यानी बाबुओं द्वारा चलाए और नियंत्रित किए जा रहे हैं। अदालत ने मामले में गुना संभाग के कार्यपालन यंत्री (EE) केएस उइके और यूडीसी (क्लर्क) शरद श्रीवास्तव पर 50-50 हजार रुपए की व्यक्तिगत कॉस्ट लगाई है।
हाईकोर्ट ने दोनों अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे एक सप्ताह के भीतर अपने निजी बैंक खातों से चेक के माध्यम से जुर्माने की राशि जमा करें। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह राशि सरकारी खजाने से नहीं, बल्कि संबंधित अधिकारियों को अपनी जेब से भरनी होगी। निर्धारित समय में राशि जमा नहीं करने पर प्रिंसिपल रजिस्ट्रार को उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
पूरा मामला अनुकंपा नियुक्ति के एक प्रकरण से जुड़ा है। आरोप है कि पीडब्ल्यूडी गुना में संबंधित पत्र और फाइल को दबाकर रखा गया। इसके साथ ही अदालत के समक्ष गलत जानकारी पेश कर न्यायिक प्रक्रिया को गुमराह करने की कोशिश की गई। मामले की सुनवाई के दौरान सामने आए तथ्यों पर हाईकोर्ट ने विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव को पूरे प्रकरण की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही 21 नवंबर तक जांच रिपोर्ट पेश करने को कहा है। कोर्ट की इस कार्रवाई से विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही को लेकर सख्त संदेश गया है। अब जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि फाइल दबाने और अदालत में गलत तथ्य पेश करने के लिए कौन-कौन जिम्मेदार हैं।