ग्वालियर

कमाने वाली पत्नी को नहीं मिलेगा गुजारा भत्ता, ग्वालियर हाईकोर्ट का अहम फैसला

Gwalior High Court Order on Alimony: ग्वालियर हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि पर्याप्त आय वाली सरकारी नौकरीपेशा पत्नी अंतरिम गुजारा भत्ता पाने की हकदार नहीं है।
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Jul 24, 2026
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Gwalior High Court Order on Alimony: पत्नी को मिलने वाली एलीमोनी पर ग्वालियर हाईकोर्ट का अहम फैसला (फोटो सोर्स- Patrika)

Gwalior High Court on Wife Alimony: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने पारिवारिक विवाद से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था दी है। अदालत ने कहा कि यदि पत्नी सरकारी नौकरी में है और उसकी आय स्वयं के भरण-पोषण के लिए पर्याप्त है, तो वह पति से अंतरिम गुजारा भत्ता पाने की हकदार नहीं होगी। हालांकि, मां के कमाने भर से पिता अपनी नाबालिग संतान के पालन-पोषण और शिक्षा की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकता। कोर्ट ने ग्वालियर फैमिली कोर्ट के आदेश को सही ठहराते हुए पति और पत्नी, दोनों की पुनरीक्षण याचिकाएं खारिज कर दीं।

फैमिली कोर्ट के आदेश को हाईकोर्ट ने रखा बरकरार

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि अंतरिम भरण-पोषण का उद्देश्य जरूरतमंद पक्ष को मुकदमे की अवधि में आर्थिक सहारा देना है। फैमिली कोर्ट ने दोनों पक्षों की आय और देनदारियों का सही मूल्यांकन किया है। इसलिए उसके आदेश में हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की पुनरीक्षण याचिकाएं खारिज करते हुए फैमिली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा और निचली अदालत को छह महीने के भीतर मुख्य मामले का अंतिम निराकरण करने के निर्देश दिए।

हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

  • पर्याप्त आय वाली पत्नी अंतरिम गुजारा भत्ते की हकदार नहीं।
  • नाबालिग संतान के पालन-पोषण की जिम्मेदारी पिता की बनी रहेगी।
  • फैमिली कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं।
  • मुख्य प्रकरण का छह माह में अंतिम फैसला सुनाने के निर्देश।

क्या था मामला?

मामला ये है कि प्रदीप और कल्याणी (दोनों परिवर्तित नाम) का विवाह वर्ष 2010 में हुआ था। दहेज प्रताड़ना के आरोपों के बाद अक्टूबर 2019 से दोनों अलग रह रहे हैं। उनकी वर्ष 2012 में जन्मी एक नाबालिग बेटी है। पत्नी ने अपने और बेटी के लिए अंतरिम भरण-पोषण की मांग करते हुए फैमिली कोर्ट में आवेदन दायर किया था। फैमिली कोर्ट ने पाया कि पत्नी आयुर्वेदिक विभाग में कंपाउंडर है और उसे 39,368 रुपए प्रतिमाह वेतन मिलता है। इसलिए उसे अंतरिम गुजारा भत्ता देने से इनकार कर दिया गया, लेकिन बेटी के लिए 6 हजार रुपए प्रतिमाह अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश दिया गया। इस आदेश के खिलाफ पति और पत्नी दोनों हाईकोर्ट पहुंचे।

Updated on:
24 Jul 2026 12:47 pm
Published on:
24 Jul 2026 12:47 pm