
Gwalior News :मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में लापता पति को तलाशने के लिए दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) याचिका की सुनवाई के दौरान रोचक मामला सामने आया। पत्नी की मौसेरी बहन के साथ घर से निकला युवक पुलिस से बचने के लिए जयपुर में दूसरे के पहचान पत्र पर सिम लेकर रेस्टोरेंट में डिलीवरी बॉय का काम कर रहा था। कोर्ट ने युवक को अपनी मर्जी से रहने की स्वतंत्रता देते हुए बच्चे के भरण-पोषण के लिए हर महीने 6 हजार रुपए देने का आदेश दिया है।
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में आरोप लगाया था कि, उसका पति लापता है। पुलिस जांच और पेश किए गए वीडियो साक्ष्यों से पता चला कि, युवक के परिजन को उसके ठिकाने की जानकारी थी। कोर्ट में पेश युवक ने स्वीकार किया कि, वो पत्नी की मौसेरी बहन के साथ पहले भोपाल, राजकोट, पनवेल, गोवा और फिर जयपुर में रहने लगा था। पुलिस से बचने के लिए उसने मोबाइल बंद रखा और दूसरे व्यक्ति के पहचान पत्र पर सिम लेकर जयपुर के मानसरोवर में डिलीवरी बॉय की नौकरी करने लगा। युवती सिलाई का काम कर रही थी।
सुनवाई के दौरान युवक ने अपनी आय 13 हजार रुपए प्रतिमाह बताई, लेकिन कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने पाया कि, युवक का एक चाचा लंदन में है, फूफा सेना में मेजर हैं और दूसरा चाचा बेंगलुरु में सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि, अगर युवक ने जान बूझकर कम आय वाला काम चुना है, तब भी सक्षम व्यक्ति होने के नाते वो बच्चे के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से नहीं बच सकता।
कोर्ट ने कहा कि, पत्नी को बच्चे के नाम से बैंक खाता खुलवाना होगा। युवक को हर महीने की 2 तारीख तक खाते में 6 हजार रुपए जमा कराने होंगे। भुगतान में चूक को अदालत की अवमानना माना जाएगा। युवक को जांच अधिकारी के समक्ष 1 लाख रुपए का निजी मुचलका और इतनी ही राशि का जमानती पेश करना होगा। युवक को अपना वर्तमान मोबाइल नंबर चालू रखना होगा और पुलिस जांच में सहयोग करना होगा। पुलिस और पत्नी द्विविवाह सहित अन्य मामलों में कानून के तहत आगे की कार्रवाई के लिए स्वतंत्र होंगे।