
ग्वालियर के पुनीत माहेश्वरी की तीन पीढिय़ों का सफर कैमरे की आंख की पूरी कहानी को बयां करता है।
ग्वालियर. काले पर्दे के पीछे से झांकता वह बड़ा सा लकड़ी का कैमरा, केमिकल की खुशबू से महकते डार्क रूम और नेगेटिव से तस्वीर उभरने का वह जादुई अहसास-फोटोग्राफी ने पिछले कई दशकों में तकनीक का एक ऐसा लंबा सफर तय किया है, जो इतिहास के पन्नों से निकलकर आज सीधे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की वर्चुअल दुनिया तक पहुंच चुका है। तकनीक चाहे ब्लैक एंड व्हाइट के दौर की हो या आज के एआई युग की, कैमरे के पीछे की भावना और यादों को कैद करने की ललक हमेशा से एक सी रही है। ग्वालियर में माहेश्वरी परिवार की तीन पीढिय़ों की यह कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि कैसे पीढिय़ों के साथ तकनीक बदली, लेकिन विरासत का यह सफर थमा नहीं।
सत्यनारायण से पुनीत तक : फोटोग्राफी की तीन पीढिय़ों की अनूठी विरासत
इस शानदार सफर की शुरुआत 1940 से 1960 के बीच के उस दौर से हुई, जब ब्लैक एंड व्हाइट फोटोग्राफी का बोलबाला था। पुनीत माहेश्वरी के दादाजी सत्यनारायण माहेश्वरी उन शुरुआती दौर के फोटोग्राफर्स में से थे, जो भारी-भरकम और बड़े कैमरों से तस्वीरें खींचा करते थे। उस समय तस्वीर खींचने की प्रक्रिया अपने आप में किसी कला से कम नहीं थी—फोटोग्राफर कैमरे के पीछे लगे काले पर्दे के अंदर जाकर फ्रेमिंग और फोकस तय करता था। इसके बाद तस्वीरें प्लेट या फिल्म पर कैद होती थीं और फिर केमिकल की मदद से डार्क रूम में डेवलप होकर प्रिंट के रूप में बाहर आती थीं। इस विरासत को पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ाया उनके पुत्र राम मोहन माहेश्वरी ने, जिनका जन्म 1962 में हुआ। राम मोहन माहेश्वरी करीब 40 साल से फोटोग्राफी के इस जीवंत क्षेत्र से गहराई से जुड़े रहे हैं। उन्होंने तकनीक के हर एक बड़े बदलाव को अपनी आंखों के सामने बदलते देखा है-ब्लैक एंड व्हाइट कैमरों से लेकर कलर फिल्म, फिर डिजिटल कैमरों का आगमन और आज के आधुनिक हाई-टेक कैमरा सिस्टम तक, उन्होंने हर दौर को अपने काम में बखूबी अपनाया। पारिवारिक परंपरा की इस श्रृंखला में तीसरी पीढ़ी के रूप में पुनीत माहेश्वरी ने कदम रखा। अपने पिता राम मोहन माहेश्वरी के मार्गदर्शन और प्रेरणा से उन्होंने इस पारिवारिक फोटोग्राफी व्यवसाय को एक नई ऊंचाई दी। सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की दुनिया से जुड़े होने के बावजूद, पुनीत ने अपनी तकनीकी समझ को फोटोग्राफी के साथ जोड़ा और आज उन्हें इस क्षेत्र में लगभग 15 वर्ष हो चुके हैं। उनका मानना है कि आने वाला समय फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के लिए और अधिक तकनीकी, रचनात्मक और रोमांचक होने वाला है।
ऐसे बदली फोटोग्राफी की दुनिया - प्लेट से एआई तक
फोटोग्राफी का सफर किसी टाइम मशीन से कम नहीं।
1940-60 : बड़ा कैमरा, काला पर्दा, ग्लास प्लेट और केमिकल डेवलपिंग।
1970-90 : 35 एमएम फिल्म, कलर लैब और नेगेटिव का दौर।
2000-2015 : फिल्म की जगह मेमोरी कार्ड, कंप्यूटर, फोटोशॉप और डिजिटल कैमरा।
2015-2025 : मिररलेस कैमरे, तेज ऑटोफोकस, 4के-8के वीडियो और वायरलेस तकनीक।
2026 : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का युग। अब एआई पुरानी धुंधली फोटो को साफ करता है, वीडियो से किसी भी व्यक्ति या वस्तु को गायब कर देता है और एक क्लिक में नई डिजाइन तैयार कर देता है।
एआई ने बदल दी वेडिंग की तस्वीर
Updated on:
19 Aug 2026 11:22 am
Published on:
19 Aug 2026 11:22 am
