ग्वालियर

BJP के दो सांसद आमने-सामने, ज्योतिरादित्य सिंधिया-भारत सिंह कुशवाहा की अंदरूनी रार फिर आई सामने

Jyotiraditya Scindia-Bharat Singh Kushwaha Rift: केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और ग्वालियर भारत सिंह के बीच पुरानी खींचतान ने बढ़ाई सियासी गर्मी। भाजपा के मंच पर भाजपा का विरोध, काले झंडों से फिर खुल कर आई अंदरूनी खींचतान।
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Sep 23, 2026
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BJP political tension: ज्योतिरादित्य सिंधिया-भारत सिंह कुशवाहा की अंदरूनी रार फिर आई सामने (फोटो सोर्स- Jyotiraditya Scindia/Bharat Singh Kushwaha X Handle)

Jyotiraditya Scindia-Bharat Singh Kushwaha Rift: मध्य प्रदेश के ग्वालियर में सजे मंच पर भाजपा का विरोध और निशाने पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया। शहर के बेला की बावड़ी में कुशवाहा छात्रावास के भूमिपूजन कार्यक्रम में सोमवार को जैसे ही केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) ने भाषण शुरू किया, कुछ लोगों ने काले झंडे दिखाकर विरोध शुरू कर दिया। विरोध करने वालों को भारत सिंह कुशवाह के समर्थक बताए जाने की चर्चा के बीच सिंधिया समर्थक कार्यकर्ता भी सामने आ गए। देखते ही देखते बात नारेबाजी से बात मारपीट तक पहुंच गई।

सिंधिया और भारत सिंह के बीच पुरानी खींचतान ने बढ़ाई सियासी गर्मी

घटना इसलिए भी राजनीतिक मायने रखती है क्योंकि ग्वालियर भाजपा में सिंधिया और सांसद भारत सिंह कुशवाह के बीच राजनीतिक दूरी की चर्चाएं लंबे समय से चलती रही है। अलग-अलग मौकों पर विकास कार्यों, स्थानीय कार्यक्रमों और शहर में राजनीतिक सक्रियता को लेकर दोनों खेमों की अलग-अलग सक्रियता दिखाई देती रही है। कैप्टन रूप सिंह स्टेडियम की लीज का मुद्दा भी इसका एक उदाहरण रहा, जहां सांसद भारत सिंह कुशवाह ने जीडीसीए को लीज दिए जाने का विरोध किया था, उसके बाद भी भाजपा नेताओं ने सिंधिया का साथ दिया और लीज बढ़ गई। और सांसद को इस मुद्दे पर हार हुई।

मुद्दा निमंत्रण का या सियासी संदेश का ?

इस बार विवाद की शुरुआत कुशवाहा समाज के छात्रावास के भूमिपूजन से हुई। विरोध करने वालों की ओर से कहा गया कि समाज के लिए बनने वाले छात्रावास के कार्यक्रम में समाज से जुड़े नेताओं और जनप्रतिनिधियों को प्रमुखता मिलनी चाहिए थी। कार्यक्रम में प्रदेश के मंत्री नारायण सिंह कुशवाह मौजूद थे, जबकि ग्वालियर सांसद भारत सिंह कुशवाह को आमंत्रित नहीं किए जाने की बात सामने आई।

इसी को लेकर नाराजगी जताए जाने की बात कही जा रही है। विरोध करने वाले पक्ष का तर्क था कि समाज के कार्यक्रम में समाज से जुड़े अन्य जनप्रतिनिधियों को भी मंच पर स्थान मिलना चाहिए था। वहीं विरोध का सामना करने वाले पक्ष ने काले झंडे दिखाए जाने को अनुचित बताते हुए इसका विरोध किया। इसके बाद दोनों पक्षों में टकराव बढ़ गया। भाजपा संगठन के स्थानीय पदाधिकारियों ने घटनाक्रम पर तत्काल सार्वजनिक टिप्पणी करने से दूरी बनाए रखी।

Updated on:
23 Sept 2026 08:25 am
Published on:
23 Sept 2026 08:25 am