
MP News : साइबर ठग आम लोगों से लूट रुपए को खपाने के लिए मध्य प्रदेश को म्यूल खातों (किराए के बैंक अकाउंट्स) की मंडी बना रहा है। इसमें भी सूबे का ग्वालियर शहर उसकी सबसे मुफीद जगह बनता जा रहा है। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) के मनी रीस्टोरेशन मॉड्यूल के आंकड़ों ने चौंकाने वाला सच उजागर किया है। महज 135 दिन (1 अप्रेल से 13 अगस्त 2026) के भीतर राज्य साइबर सेल ने प्रदेश में 12,396 ऐसे बैंक खातों की पहचान की है, जिनमें ठगी के 2.29 करोड़ रुपए सीधे ट्रांसफर किए गए थे। बताते हैं कि, ठगों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे खातों की संख्या इससे कई गुना ज्यादा है।
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, ठगों की कार्यप्रणाली में खतरनाक बदलाव आया है। पहले जहां ठग गांव - देहात के जरूरतमंद लोगों लोगों को चंद रुपयों का लालच देकर उनके नाम पर खाते खुलवाते थे। लेकिन अब उनका मेन टारगेट जेन - जी यानी कॉलेज छात्र और युवा हैं। पॉकेट मनी और लग्जरी लाइफ स्टाइल के चक्कर में ये युवा अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड और यूपीआई क्रेडेंशियल्स साइबर अपराधियों को 5 से 10 हजार रुपए के कमीशन के किराए पर सौंप रहे हैं।
ग्वालियर और चंबल अंचल में साइबर अपराधियों का नेटवर्क बेहद गहरा हो चुका है। साइबर पुलिस की जांच में सामने आया है कि, अंचल में रोज सैकड़ों खातों की खरीद - फरोख्त हो रही है। छोटे और निजी बैंकों में खाता खुलवाने का ठेका लेने वाले डायरेक्ट सेलिंग एजेंट्स (डीएसए) कुछ जनसेवा कियोस्क संचालक और कुछ बैंकों के निचले स्तर के कर्मचारी साइबर गिरोहों के लिए स्लीपर सेल की तरह काम कर रहे हैं। ये बिना किसी जमीनी वेरिफिकेशन के धड़ाधड़ चालू और बचत खाते खोलकर उनकी किट सीधे साइबर ठगों तक पहुंचा रहे हैं।
नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के अनुसार, सिर्फ 135 दिनों के 12,398 बैंक अकाउंट्स चिह्नित किए गए हैं। ये म्यूल खाते 2.29 करोड़ रुपए इन्हीं खातों में फंसे हैं। 6,753 मामलों में पुलिस ने एफआइआर दर्ज की है, जबकि 3,869 मामलों में पीड़ितों को रिफंड ऑर्डर (पैसा वापसी के आदेश) हुए हैं।
राज्य साइबर सेल ग्वालियर के डीएसपी संजीव नयन शर्मा का कहना है कि, साइबर ठगी में इस्तेमाल खातों को चिह्नित करने और उनमें ट्रांसफर ठगी के रुपए ठगों के हाथों तक पहुंचने से रोके जा रहे हैं। इसके लिए एमआरएम और जीआरएम पोर्टल की मदद ली जा रही है। इन पर शिकायतों से ठगों के खातों को चिन्हित कर फ्रीज किया जा रहा है। इसी कड़ी में हजारों खाते चिन्हित किए गए हैं।