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सरहद से पासपोर्ट तक सुरक्षा में चूक, 5 जिलों को लॉन्च पैड बनाकर हासिल की भारतीय पहचान, एजेंसियां हैरान

धर्म का चोला ओढ़कर देश की आंतरिक सुरक्षा और खुफिया तंत्र को अंगूठा दिखाने वाले बांग्लादेशी घुसपैठियों के फर्जी पासपोर्ट कांड ने अब राष्ट्रीय स्तर पर हड़कंप मचा दिया है। मध्य प्रदेश के पांच जिलों-ग्वालियर (डबरा), भोपाल, बैतूल, छिंदवाड़ा और पांढुर्ना—को पूरी प्लानिंग के तहत लॉन्च पैड बनाया गया। इन इलाकों में बौद्ध भिक्षु (भंते) बनकर छुपे बांग्लादेशियों ने फर्जी पतों और दस्तावेजों के दम पर थोक के भाव 70 भारतीय पासपोर्ट हासिल कर लिए।
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फर्जी पासपोर्ट

फर्जी पासपोर्ट

ग्वालियर. धर्म का चोला ओढ़कर देश की आंतरिक सुरक्षा और खुफिया तंत्र को अंगूठा दिखाने वाले बांग्लादेशी घुसपैठियों के फर्जी पासपोर्ट कांड ने अब राष्ट्रीय स्तर पर हड़कंप मचा दिया है। मध्य प्रदेश के पांच जिलों—ग्वालियर (डबरा), भोपाल, बैतूल, छिंदवाड़ा और पांढुर्ना—को पूरी प्लानिंग के तहत लॉन्च पैड बनाया गया। इन इलाकों में बौद्ध भिक्षु (भंते) बनकर छुपे बांग्लादेशियों ने फर्जी पतों और दस्तावेजों के दम पर थोक के भाव 70 भारतीय पासपोर्ट हासिल कर लिए।
हैरानी की बात यह है कि इस बड़े षड्यंत्र को अंजाम देने के लिए घुसपैठियों के सिंडिकेट ने देश के सुरक्षा तंत्र के हर एक पहरे को फेल कर दिया। बॉर्डर की चौकसी से लेकर पुलिस, प्रशासन, आधार , स्थानीय निकाय, खुफिया ब्यूरो (आइबी), पासपोर्ट सेवा केंद्र और एयरपोर्ट के इमिग्रेशन तक—किसी भी एजेंसी को इस गहरी साजिश की भनक तक नहीं लगी। जब तक मामला खुला, तब तक कई घुसपैठिए इन्हीं फर्जी पासपोर्टों के सहारे विदेश भी भाग चुके हैं।

आठ और घुसपैठियों पर इनाम, 29 पर पहुंची गिनती
फर्जी दस्तावेजों से पासपोर्ट बनवाने वाले आठ और घुसपैठियों व उनके मददगारों पर एसटीएफ डीआइजी राहुल लोढ़ा ने मंगलवार को 20-20 हजार रुपए का इनाम घोषित किया। मामले में इनामी आरोपियों की संख्या 29 हो गई है। एसटीएफ के मुताबिक, कई आरोपियों के ठिकानों की जानकारी मिली है और उनकी तलाश में दबिश दी जा रही है। जांच में अब तक सामने आया है कि फर्जी पासपोर्ट का पूरा नेटवर्क मास्टरमाइंड रियाल चौधरी उर्फ मित्यानंद भिक्षु के इर्द-गिर्द घूम रहा है। एसटीएफ उन लोगों की भी पहचान कर रही है, जो रियाल के साथ फर्जी दस्तावेजों के जरिए पासपोर्ट बनवाने में शामिल थे। एसटीएफ पुलिस अधीक्षक राजेश सिंह भदौरिया ने बताया कि अब तक 29 आरोपियों पर इनाम घोषित किया जा चुका है। सभी की तलाश जारी है

सुरक्षा के इन 8 मोर्चों पर फेल हुआ सिस्टम

  1. सीमा सुरक्षा (बीएसएफ ): अंतरराष्ट्रीय सीमा की कड़ी चौकसी को चकमा देकर घुसपैठिए अवैध रूप से भारत में दाखिल हुए।
  2. स्थानीय निकाय: नगर पालिका और पंचायतों से फर्जी रिकॉर्ड तैयार करवाकर जन्म और निवास के जाली दस्तावेज बनवाए गए।
  3. यूआइडीएआई (आधार ): बिना किसी पुष्टिकृत रूट-वेरिफिकेशन के बायोमैट्रिक आधार कार्ड आसानी से जारी हो गए।
  4. केंद्रीय खुफिया एजेंसियां: संवेदनशील और संदिग्ध इलाकों में सक्रिय विदेशी तत्वों के इनपुट का पूरी तरह मिसमैच (चूक) रहा।
  5. राजस्व विभाग: तहसील कार्यालयों से मूल निवासी प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए।
  6. लोकल इंटेलिजेंस व पुलिस: फिजिकल एड्रेस वेरिफिकेशन के दौरान सिर्फ कागजी खानापूर्ति हुई, आवेदक के पिछले बैकग्राउंड की कोई जांच नहीं की गई।
  7. पासपोर्ट सेवा केंद्र : दस्तावेजों की प्राथमिक और द्वितीयक जांच में सिंडिकेट की मिलीभगत से फाइलें पास होती चली गईं।
  8. इमिग्रेशन: देश के एयरपोटर्स की सुरक्षा को धत्ता बताते हुए ये घुसपैठिए फर्जी पासपोर्ट पर विदेश उड़ गए।

एजेंसियों का शक अब दो प्रमुख बिंदुओं पर टिक गया है
ग्लोबल लॉन्च पैड: खाड़ी देशों, यूरोप और अमेरिका में आसान वीजा और एंट्री पाने के लिए भारतीय पासपोर्ट का इस्तेमाल लॉन्च पैड के रूप में किया जाना, क्योंकि पश्चिमी देशों में भारतीय पासपोर्ट की विश्वसनीयता अधिक मानी जाती है।
अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट और स्लीपर सेल: क्या ये लोग किसी अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी, संगठित वित्तीय अपराध या किसी ऐसे खतरनाक स्लीपर सेल का हिस्सा हैं, जिन्हें विदेशी धरती पर भारतीय पहचान के साथ किसी बड़े ऑपरेशन को अंजाम देना था?