
''मुझे अमित के साथ ही रहना है।'' युवती की इस जिद के बीच जब प्रेमी को फोन लगाया तो उसका फोन बंद था। वो कोर्ट रूम में भी नहीं आया था। युवती की जिद पर ग्वालियर हाईकोर्ट ने कहा कि पहले यह तो पता लगाओ कि जिस अमित के साथ तुम रहना चाहती हो, वो भविष्य में तुम्हारी जिम्मेदारी उठा पाएगा या नहीं। हाईकोर्ट ने पुलिस को युवक की जांच के आदेश देकर युवती को सुरक्षा देने का फैसला किया। अब हाईकोर्ट के इस संतुलित फैसले की सभी जगह चर्चा हो रही है।
यह अनोखा मामला मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में सुनवाई के दौरान सामने आया। प्रेमी के साथ रहने की जिद पर अड़ी युवती को अदालत ने काफी समझाया, लेकिन जब वो नहीं मानी तो उसकी सुरक्षा को देखते हुए उसे छह दिन के लिए ग्वालियर के वन स्टॉप सेंटर भेजने का आदेश दे दिया। साथ ही सरकारी अधिवक्ता को युवती की काउंसलिंग कराने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई।
सुनवाई के दौरान युवती ने स्पष्ट कहा कि वह भिंड जिले के एक गांव के निवासी अमित के साथ ही रहना चाहती है। उसने बताया कि फिलहाल वह डबरा में अमित द्वारा किराए पर दिलाए गए मकान में रह रही है। दोनों का अभी विवाह नहीं हुआ है, इसलिए अलग-अलग रह रहे हैं। अदालत ने कई बार समझाने का प्रयास किया, लेकिन युवती अपने फैसले पर कायम रही।
मामले की सुनवाई के दौरान पता चला कि पुलिस ने जब अमित से संपर्क करने का प्रयास किया तो उसने अपना मोबाइल फोन बंद कर लिया। वह अदालत में भी उपस्थित नहीं हुआ। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि जिस युवक के भरोसे युवती रहना चाहती है, वही उसकी जिम्मेदारी लेने के लिए सामने नहीं आ रहा। ऐसे में उसकी नीयत और जिम्मेदारी दोनों की जांच जरूरी है।
कोर्ट ने कहा कि युवती बालिग है और उसे अपनी पसंद से जीवन का निर्णय लेने का अधिकार है। लेकिन यदि वह किसी ऐसे व्यक्ति के भरोसे रह रही है, जो खुद सामने नहीं आ रहा, तो अदालत उसकी सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं कर सकती। इसलिए पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि युवक वास्तव में उसकी जिम्मेदारी निभाने की स्थिति और इच्छा रखता है या नहीं।
डबल बेंच ने पुलिस को निर्देश दिए कि अमित के माता-पिता को मामले की जानकारी दी जाए। साथ ही उसकी सामाजिक, आर्थिक और पारिवारिक पृष्ठभूमि की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट और आवश्यक दस्तावेज अदालत में प्रस्तुत किए जाएं। कोर्ट ने सरकारी अधिवक्ता को युवती की काउंसलिंग कराने का भी निर्देश दिया।