
Gwalior news:एमपी के ग्वालियर शहर में विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र के सिटी सेंटर स्थित स्पा सेंटर में लंबे समय से चल रहे देह व्यापार के मामले में तत्कालीन बीट प्रभारी एसआइ विनोद कुमार प्रजापति को हाइकोर्ट से राहत नहीं मिली। जस्टिस आनंद सिंह बहरावत की एकलपीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि विभागीय जांच शुरू करना या आरोप-पत्र जारी करना कर्मचारी को दोषी ठहराना नहीं है। यह जांच प्रक्रिया का हिस्सा है।
बता दें कि विनोद कुमार प्रजापति अगस्त 2023 से विश्वविद्यालय थाने में पदस्थ थे और सिटी सेंटर बीट का प्रभार संभाल रहे थे। जनवरी 2025 में पुलिस ने सिटी सेंटर स्थित द हीलिंग हैंड स्पा सेंटर पर छापा मारकर देह व्यापार का खुलासा किया था। जांच में सामने आया कि स्पा सेंटर में जुलाई 2024 से अवैध गतिविधियां चल रही थीं। इसके बाद लापरवाही के आरोप में एसपी ने संयुक्त विभागीय जांच के निर्देश दिए। एसआइ ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।
याचिकाकर्ता ने कहा कि वह 10 से 14 जनवरी 2025 तक मेडिकल लीव पर था और 13 जनवरी को छापे के समय ड्यूटी पर नहीं था। मामला आइजी के समक्ष पहुंचा तो उन्होंने एसपी की राय स्वीकार नहीं की। आइजी ने माना कि स्पा सेंटर में जुलाई 2024 से अवैध गतिविधियां चल रही थीं और एसआइ वर्ष 2024 से उसी बीट के प्रभारी थे। ऐसे में छापे वाले दिन छुट्टी पर होना उन्हें लंबे समय से चल रही गतिविधियों की निगरानी की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं करता। जिसके बाद आगे का फैसला लिया गया।
हाईकोर्ट ने कहा कि विभागीय जांच में कर्मचारी को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलता है और आने वाले समय में वह गवाहों से जिरह भी कर सकता है। कोर्ट इस स्तर पर आरोपों की सत्यता पर फैसला नहीं करेगी, बल्कि यह देखेगी कि कार्रवाई कानून के अनुरूप है या नहीं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विभागीय जांच का आदेश अंतिम सजा या दोषसिद्धि नहीं है। इसलिए इसमें हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है। इसी के साथ एसआइ की याचिका खारिज कर दी गई।