
Gwalior news: डेंगू मरीज का क्लेम खारिज करना स्टार हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी को भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता आयोग ने इसे सेवा में कमी मानते हुए कंपनी को उपचार खर्च के 59,142 रुपए लौटाने का आदेश दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि मरीज को अस्पताल में भर्ती करने या ओपीडी में उपचार देने का फैसला डॉक्टर का होता है, बीमा कंपनी का नहीं। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने स्पष्ट किया है कि मरीज की तात्कालिक स्थिति को देखते हुए उसे अस्पताल में भर्ती कर उपचार करना है या ओपीडी (घर पर) में, यह निर्णय उपचार करने वाले डॉक्टर के विवेक का विषय है, बीमा कंपनी का नहीं।
आयोग ने स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी द्वारा डेंगू मरीज का क्लेम निरस्त करने को सेवा में कमी माना है। आयोग के अध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद शर्मा और सदस्य रेवती रमण मिश्रा की पीठ ने बीमा कंपनी को आदेश दिया है कि वह परिवादी को उपचार खर्च के 59,142 रुपए 45 दिन के भीतर अदा करें। तय समय में राशि न देने पर 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा। इसके अलावा मानसिक प्रताड़ना मद में 3,000 रुपए और वाद व्यय के रूप में 2,000 रुपए भी देने होंगे।
आयोग ने पाया, कंपनी ने अपनी कथित मेडिकल टीम की न तो कोई अधिकृत रिपोर्ट पेश की और न ही किसी विशेषज्ञ का शपथ पत्र लगाया। भर्ती होने की आवश्यकता डॉक्टर तय करता है, न कि बीमा कंपनी। कंपनी द्वारा मनमाने आधार पर दावा खारिज करना सेवा में गंभीर कमी है।
ग्वालियर निवासी निधि अग्रवाल (28 वर्ष) ने स्टार हेल्थ इंश्योरेंस से हेल्थ पॉलिसी ले रखी थी। नवंबर 2023 में तेज बुखार, उल्टी और घबराहट की शिकायत पर डेंगू की जांच कराई गई। डॉक्टर की सलाह पर उन्हें 3 से 7 नवंबर 2023 तक हॉस्पिटल में भर्ती रखा गया। इलाज में कुल 59,142 रुपए खर्च हुए। जब उन्होंने क्लेम पेश किया, तो बीमा कंपनी ने 20 दिसंबर 2023 को यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि उन्हें अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं थी और इलाज घर पर रहकर (आउट पेशेंट) भी हो सकता था। इसके बाद उन्होंने अधिवक्ता के जरिए उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर किया।
बीमा कंपनी ने आयोग में तर्क दिया कि मरीज को आइसीयू में भर्ती नहीं किया गया था, प्लेटलेट्स कम नहीं हुए थे और सभी वाइटल्स सामान्य थे। कंपनी की मेडिकल टीम के अनुसार घर पर संभव था इसलिए क्लेम निरस्त करना उचित था।