Zakir Hussain: तबला वादक जाकिर हुसैन को आज उनकी इच्छा के मुताबिक अमरीका में ही सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा... उनके निधन की खबर से देश-दुनिया में शोक की लहर है, फैंस की आंखें नम हैं... जाकिर से जुड़ीं कई यादें लोगों के जहन में ताजा हो चली हैं, ऐसा ही एक खूबसूरत यादगार लम्हा मध्य प्रदेश की संगीत नगरी से निकला, यहां तबला वादक जाकिर हुसैन और पाकिस्तानी गायक उस्ताद नुसरत फतेह अली खान की जुगलबंदी ने ऐसा समां बांधा था कि दर्शक थिरकने लगे थे...
Zakir Hussain: तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन ग्वालियर में दो बार आ चुके हैं। सबसे पहले वे 28 जनवरी 1997 को ग्वालियर आए थे। उन्होंने ग्वालियर में हाफिज अली खान अवॉर्ड सेरेमनी में उस्ताद जाकिर हुसैन ने पाकिस्तान के गायक उस्ताद नुसरत फतेह अली खान के साथ यादगार जुगलबंदी की थी। इस अवसर पर पंडित किशन महाराज महान तबला वादक, असगरी बाई आहान ध्रुपद गायिका, शिवकुमार शर्मा महान संतूर वादक, पंडित राजन साजन मिश्र, महमूद धौलपुरी हारमोनियम, उस्ताद अमजद अली खान उपस्थित थे। भारतीय शास्त्रीय संगीत जगत की यह यादगार और ऐतिहासिक महफिल थी। 8 दिसंबर-2022 को आईटीएम यूनिवर्सिटी में उस्ताद जाकिर हुसैन को मानक उपाधि से नवाजा गया था।
स्मृति शेष....
ग्वालियर की आईटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर ने 8 दिसंबर-2022 को तबला वादक जाकिर हुसैन को मानक उपाधि से नवाजा था। उन्होंने कहा था, बेटा कभी मास्टर बनने की कोशिश नहीं करता, वह अच्छा स्टूटेंट बनने की कोशिश करता है। यंत्र मंत्र पिता (उस्ताद अल्ला रक्खा) के सानिध्य में रोज सीखने को मिला। अगर आप विश्वास करते हो तो आप सब पा सकते हो। जिंदगी हर बार अगला कदम बढ़ाने के लिए है, रुकने के लिए नहीं।
आप अपने गुरु से अच्छे रिश्ते बनाएं, वे आपके भविष्य की आधारशिला रखते हैं। आप उनके सिखाने का इंतजार न करें, बल्कि आप उन्हें प्रभावित करें कि वो आपको सिखाने के लिए प्रेरित हों। पद्मभूषण उस्ताद जाकिर हुसैन ने इस दौरान छात्रों से संवाद भी किया था।