
RPS Arvind Bishnoi: ग्रामीण परिवेश, सरकारी स्कूल की शिक्षा और सीमित संसाधन सफलता की राह में बाधा नहीं हैं। आत्मविश्वास, नियमित अध्ययन और स्पष्ट लक्ष्य के दम पर कोई भी युवा बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकता है। यह कहना है हनुमानगढ़ के एएसपी मुख्यालय अरविंद बिश्नोई का, जिन्होंने सरकारी विद्यालय से पढ़ाई कर 23 वर्ष की उम्र में सेल्फ स्टडी के बूते RAS परीक्षा में 41वीं रैंक हासिल की थी।
ननिहाल गांव मीठड़ा, अरविंद बिश्नोई का बाड़मेर के झोंपड़े में जन्म से लेकर सरकारी कोठी तक पहुंचने का उनका सफर सामान्य परिवारों व अभावग्रस्त गांवों के युवाओं के लिए प्रेरणादायी है।
राजस्थान पत्रिका से बातचीत में हनुमानगढ़ ASP बिश्नोई ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को कई बार कम्युनिकेशन स्किल और आत्मविश्वास की कमी महसूस होती है, लेकिन यह बड़ी बाधा नहीं है। एनसीईआरटी की पुस्तकों का अध्ययन, नियमित अभ्यास और मॉक टेस्ट सफलता का मजबूत आधार बन सकते हैं। वे युवाओं को नशे और मोबाइल के बढ़ते स्क्रीन टाइम से बचने की सलाह देते हुए कहते हैं कि मोबाइल का उपयोग अध्ययन के लिए करें, लेकिन ऐसा ना हो कि मोबाइल आपको नियंत्रित करने लगे।
मूलत: जोधपुर जिले के गांव गुड्डा बिश्नोइयान निवासी अरविंद बिश्नोई ने कक्षा 12 तक शिक्षा राजकीय विद्यालय में प्राप्त की। फिर राजकीय एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज, जोधपुर से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। पिता देवाराम बिश्नोई सरकारी विद्यालय में अध्यापक थे और खेती भी करते थे। घर में प्रतियोगिता दर्पण नियमित आती थी। उसमें यूपीएससी आदि परीक्षाओं में सफलता हासिल करने वालों के साक्षात्कार पढ़कर सिविल सर्विसेज में जाने की प्रेरणा मिली।
एएसपी अरविंद बिश्नोई कहते हैं कि स्कूलिंग के दौरान ही नियमित अखबार पढ़ना शुरू कर देना चाहिए। इससे प्रतियोगी परीक्षाओं में बहुत मदद मिलती है। युवाओं को नियमित रूप से अखबार पढऩा चाहिए। सम सामयिक मुद्दों व सामान्य ज्ञान के लिए यह बहुत अहम है।
एक पुलिस अधिकारी के रूप में अपने अनुभव साझा करते हुए एएसपी बिश्नोई कहते हैं कि जनता से संवाद ही प्रभावी पुलिसिंग की सबसे बड़ी ताकत है। संवाद और विश्वास के जरिए अधिकांश समस्याओं का समाधान आसान हो जाता है।