हनुमानगढ़

Sucess Story: जानें कौन हैं अरविंद बिश्नोई? 23 वर्ष की उम्र में ऐसे तय किया झोंपड़े से सरकारी कोठी तक का सफर

RPS Arvind Bishnoi: हनुमानगढ़ के एएसपी मुख्यालय अरविंद बिश्नोई जिन्होंने सरकारी विद्यालय से पढ़ाई कर 23 वर्ष की उम्र में सेल्फ स्टडी के बूते आरएएस परीक्षा में 41वीं रैंक हासिल की थी।

2 min read
ASP Arvind Bishnoi,Rajasthan Police
ASP Arvind Bishnoi, patrika photo

RPS Arvind Bishnoi: ग्रामीण परिवेश, सरकारी स्कूल की शिक्षा और सीमित संसाधन सफलता की राह में बाधा नहीं हैं। आत्मविश्वास, नियमित अध्ययन और स्पष्ट लक्ष्य के दम पर कोई भी युवा बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकता है। यह कहना है हनुमानगढ़ के एएसपी मुख्यालय अरविंद बिश्नोई का, जिन्होंने सरकारी विद्यालय से पढ़ाई कर 23 वर्ष की उम्र में सेल्फ स्टडी के बूते RAS परीक्षा में 41वीं रैंक हासिल की थी।
ननिहाल गांव मीठड़ा, अरविंद बिश्नोई का बाड़मेर के झोंपड़े में जन्म से लेकर सरकारी कोठी तक पहुंचने का उनका सफर सामान्य परिवारों व अभावग्रस्त गांवों के युवाओं के लिए प्रेरणादायी है।

युवा नशे और मोबाइल फोन की लत से बचें

राजस्थान पत्रिका से बातचीत में हनुमानगढ़ ASP बिश्नोई ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को कई बार कम्युनिकेशन स्किल और आत्मविश्वास की कमी महसूस होती है, लेकिन यह बड़ी बाधा नहीं है। एनसीईआरटी की पुस्तकों का अध्ययन, नियमित अभ्यास और मॉक टेस्ट सफलता का मजबूत आधार बन सकते हैं। वे युवाओं को नशे और मोबाइल के बढ़ते स्क्रीन टाइम से बचने की सलाह देते हुए कहते हैं कि मोबाइल का उपयोग अध्ययन के लिए करें, लेकिन ऐसा ना हो कि मोबाइल आपको नियंत्रित करने लगे।

सरकारी स्कूल- कॉलेज में किया अध्ययन

मूलत: जोधपुर जिले के गांव गुड्डा बिश्नोइयान निवासी अरविंद बिश्नोई ने कक्षा 12 तक शिक्षा राजकीय विद्यालय में प्राप्त की। फिर राजकीय एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज, जोधपुर से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। पिता देवाराम बिश्नोई सरकारी विद्यालय में अध्यापक थे और खेती भी करते थे। घर में प्रतियोगिता दर्पण नियमित आती थी। उसमें यूपीएससी आदि परीक्षाओं में सफलता हासिल करने वालों के साक्षात्कार पढ़कर सिविल सर्विसेज में जाने की प्रेरणा मिली।

नियमित रूप से पढ़ें अखबार

एएसपी अरविंद बिश्नोई कहते हैं कि स्कूलिंग के दौरान ही नियमित अखबार पढ़ना शुरू कर देना चाहिए। इससे प्रतियोगी परीक्षाओं में बहुत मदद मिलती है। युवाओं को नियमित रूप से अखबार पढऩा चाहिए। सम सामयिक मुद्दों व सामान्य ज्ञान के लिए यह बहुत अहम है।

संवाद बेहद जरूरी

एक पुलिस अधिकारी के रूप में अपने अनुभव साझा करते हुए एएसपी बिश्नोई कहते हैं कि जनता से संवाद ही प्रभावी पुलिसिंग की सबसे बड़ी ताकत है। संवाद और विश्वास के जरिए अधिकांश समस्याओं का समाधान आसान हो जाता है।

युवाओं और अभिभावकों के लिए संदेश

  • सफलता का मूल मंत्र : आत्मविश्वास, नियमित अध्ययन और स्पष्ट लक्ष्य।
  • पढ़ाई की रणनीति : एनसीईआरटी पुस्तकों का अध्ययन, नियमित अभ्यास और मॉक टेस्ट।
  • मोबाइल फोन उपयोग : सिर्फ अध्ययन के लिए उपयोग करें, मोबाइल का गुलाम न बनें।
  • नशे से दूर रहें और युवा खुद पर विश्वास रखे।
  • अध्ययन अवधि : प्रतिदिन 8 घंटे नियमित व एकाग्र पढ़ाई।
  • समसामयिक ज्ञान : समाचारों और मुद्दों पर चर्चा करें।
  • विफलता पर नजरिया : एक परीक्षा का परिणाम जीवन तय नहीं करता। हार तभी होती है जब हार मान ली जाए। सफलता और विफलता दोनों से सीखकर आगे बढ़ें।
  • अभिभावकों के लिए सलाह : संकाय चयन में विद्यार्थी की रुचि और काउंसलिंग को महत्व दें। (जैसा कि एएसपी ने पत्रिका को बताया।)
Published on:
08 Jun 2026 11:28 am