हनुमानगढ़

Heart Transplant: 43 साल के किसान में धड़क रहा 18 साल का दिल, हनुमानगढ़ के सूरजभान की अनोखी कहानी

Farmer Heart Transplant: हनुमानगढ़ के किसान सूरजभान 11 साल से हार्ट ट्रांसप्लांट के बाद भी खेती कर रहे हैं और अनुशासन से स्वस्थ जीवन जी रहे हैं।

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11 साल से ट्रांसप्लांट दिल के साथ खेती कर रहे सूरजभानI Image Source: ChatGpt

Farmer Heart Transplant: हनुमानगढ़ जिले के जोरावरपुरा गांव के 43 वर्ष के किसान सूरजभान की कहानी बड़ी रोचक है। एक वाल्व सर्जरी के दौरान हुई गड़बड़ी के कारण उनके दिल पर बुरी तरह असर हुआ था और दिल के काम करने की क्षमता करीब 10 प्रतिशत ही रह गई थी।

आखिरकार 2 अगस्त 2015 को जयपुर के महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड हॉस्पिटल में कार्डियोवैस्कुलर-थोरेसिक सर्जरी के निदेशक डॉ. मुर्तजा अहमद चिश्ती की टीम ने राजस्थान का पहला सफल हार्ट ट्रांसप्लांट किया। आज सूरजभान पिछले 11 साल से एक 18 वर्षीय डोनर का दिल लेकर जी रहे हैं और रोज की तरह अपने खेतों में मेहनत भी कर रहे हैं।

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खेत और मंडी में सक्रिय किसान सूरजभान

सूरजभान अक्सर हनुमानगढ़ की अनाज मंडी में सरसों लेकर पहुंचते हैं। उनका रोज का रूटीन बेहद साधारण है। सूरज करीब 5 बजे उठते हैं और खेतों की ओर निकल जाते हैं। दोपहर में घर आकर थोड़ी देर आराम करते हैं और फिर शाम को दोबारा खेत में काम करते हैं। वे सादा भोजन करते हैं और नियमित दिनचर्या रखने को अपनी सेहत का सबसे बड़ा राज मानते हैं।

वहां उन्हें देखकर शायद ही कोई अंदाजा लगा पाए कि वे कभी गंभीर दिल की बीमारी से जूझ चुके हैं। सूरजभान का कहना है कि हार्ट ट्रांसप्लांट के बाद उन्होंने आरामदायक जिंदगी के बजाय मेहनत भरी जिंदगी चुनी।

गेहूं और कपास की खेती से चलता है सूरजभान का परिवार

सूरजभान के पास करीब 4 बीघा जमीन है। खेती के प्रति उनका जुड़ाव बहुत गहरा है। हालांकि उनका कहना है कि अब खेती पहले से ज्यादा मुश्किल भी हो गई है।

सादे जीवन से सेहत बेहतर

सूरजभान अपनी सेहत को लेकर भी काफी सजग हैं। वे हर तीन महीने में जयपुर जाकर मेडिकल जांच करवाते हैं। समय पर दवाएं लेना, बाहर का खाना न खाना और घर का बना भोजन करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है। उनका मानना है कि यही अनुशासन उन्हें स्वस्थ बनाए हुए है।

2 अप्रेल को उनके हार्ट ट्रांसप्लांट को 11 साल पूरे हुए। इस दौरान उन्होंने न सिर्फ सामान्य जिंदगी जीना सीखा, बल्कि खेती को भी पूरी लगन से जारी रखा। सूरजभान कहते हैं कि मेहनत और अनुशासन ने उन्हें नई जिंदगी जीने की ताकत दी।

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