Hanumangarh News: हनुमानगढ़ के चूना फाटक पर प्रस्तावित अंडरपास निर्माण का विवाद आखिरकार समाप्त हो गया है। पीडब्ल्यूडी ने 35 करोड़ रुपए की इस परियोजना को निरस्त कर दिया, जिसे स्थानीय लोग अपनी बड़ी जीत मान रहे हैं।
हनुमानगढ़। चूना फाटक पर प्रस्तावित अंडरपास (आरयूबी) निर्माण को लेकर चल रहा विवाद आखिरकार खत्म हो गया है। सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के संयुक्त सचिव ने बजट घोषणा 2025-26 के तहत 35 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले इस अंडरपास के प्रस्ताव को निरस्त करने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। लंबे समय से विरोध जता रहे स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों और अधिवक्ताओं के लिए इसे बड़ी जीत माना जा रहा है।
दरअसल, चूना फाटक पर अंडरपास निर्माण को लेकर शुरू से ही संशय की स्थिति बनी हुई थी। पीडब्ल्यूडी के अधिकारी खुद यह तय नहीं कर पा रहे थे कि अंडरपास का निर्माण एच-शेप में किया जाए या यू-शेप में। तकनीकी असमंजस के बीच स्थानीय लोगों ने आशंका जताई कि इस निर्माण से क्षेत्र में ट्रैफिक और जलभराव जैसी गंभीर समस्याएं खड़ी होंगी, वहीं व्यापार पर भी विपरीत असर पड़ेगा।
स्थानीय नागरिकों और अधिवक्ताओं ने विरोध प्रदर्शन कर जिला प्रशासन को अवगत कराया कि इस स्थान पर अंडरपास की कोई आवश्यकता नहीं है। उनका तर्क था कि चूना फाटक से करीब आधा किलोमीटर पहले गांधी नगर अंडरपास मौजूद है, जबकि मात्र 200 मीटर आगे सौ फीट मार्ग के पास एक और छोटा अंडरपास पहले से बना हुआ है। इसके अलावा सतीपुरा रेलवे लाइन पर पिछले सात वर्षों से ओवरब्रिज निर्माणाधीन है, जो शुरू होने के बाद इस मार्ग पर ट्रैफिक दबाव स्वत: कम कर देगा।
जानकारों के अनुसार, वर्तमान में सतीपुरा फाटक पर ओवरब्रिज निर्माण के कारण ट्रैफिक का दबाव चूना फाटक पर अधिक है, लेकिन ओवरब्रिज चालू होने के बाद यहां अंडरपास की आवश्यकता पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। ऐसे में इस परियोजना को अव्यवहारिक बताते हुए इसे रद्द करने की मांग लगातार उठाई जा रही थी। पूर्व बार संघ अध्यक्ष जितेंद्र सारस्तव के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने इस आंदोलन का समर्थन किया। वहीं, स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों ने भी एकजुट होकर अंडरपास का विरोध किया। उनका कहना था कि अंडरपास बनने से पूरा क्षेत्र प्रभावित होता और कई व्यवसाय चौपट हो जाते।
इस पूरे मामले में राजस्थान पत्रिका ने भी निरंतर खबरों को प्रकाशित कर आमजन की आवाज को प्रमुखता से उठाया। 16 अप्रेल के अंक में ही यह संकेत दे दिया गया था कि पीडब्ल्यूडी ने अंडरपास निर्माण नहीं करने का प्रस्ताव मुख्यालय को भेज दिया है। राजस्थान पत्रिका में लगातार प्रकाशित खबरों के चलते प्रशासन पर दबाव बना और अंतत: विभाग को यह प्रस्ताव निरस्त करना पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह निर्णय जनहित में लिया गया है और इससे अनावश्यक खर्च के साथ-साथ भविष्य की संभावित समस्याओं से भी बचाव होगा।
चूना फाटक पर अंडरपास की कोई आवश्यकता नहीं थी। यदि यह बनता तो लोगों को उजाड़ने का कारण बनता और व्यापार पूरी तरह प्रभावित होता। सभी ने मिलकर इसका विरोध किया, जिसका परिणाम आज सामने है।
हमारे आंदोलन में राजस्थान पत्रिका ने लगातार सहयोग किया और हमारी मांगों को प्रमुखता से प्रकाशित किया। अगर यह अंडरपास बनता तो व्यापारियों का कामकाज पूरी तरह चौपट हो जाता।
पीडब्ल्यूडी के अधिकारी खुद तय नहीं कर पा रहे थे कि अंडरपास किस डिजाइन में बने। दोनों ही विकल्प भविष्य में नुकसानदायक साबित होते। जनता की एकजुटता और राजस्थान पत्रिका के सहयोग से यह फैसला संभव हुआ।