हनुमानगढ़

World Blood Donor Day : हनुमानगढ़ के ब्लडमैन की कहानियां पढ़कर कहेंगे… वाह, 106 बार चुके हैं रक्तदान

World Blood Donor Day Special : रक्तदान के महत्व को समझते हुए इसे जीवन का ध्येय बनाकर जरूरतमंदों की मदद में बरसों से जुटे हैं अमरसिंह नायक। उन्होंने अपनी माता के बारहवें तथा बेटे की ब्याह पर भी रक्तदान शिविर लगाया था। बारातियों के लिए यह शर्त लगा दी थी कि रक्तदान करने पर ही वे बारात में जा सकेंगे।
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World Blood Donor Day

World Blood Donor Day : रक्तदान के महत्व को समझते हुए इसे जीवन का ध्येय बनाकर जरूरतमंदों की मदद में बरसों से जुटे हैं अमरसिंह नायक। उन्होंने अपनी माता के बारहवें तथा बेटे की ब्याह पर भी रक्तदान शिविर लगाया था। बारातियों के लिए यह शर्त लगा दी थी कि रक्तदान करने पर ही वे बारात में जा सकेंगे। टिब्बी क्षेत्र के गांव श्योदानपुरा निवासी 57 वर्षीय अमर सिंह एक सामान्य मजदूर परिवार से हैं और अब तक 106 बार रक्तदान कर चुके हैं।

एक हजार से अधिक रक्तदान शिविरों में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से भाग ले चुके हैं। जिले में कहीं भी रक्तदान शिविर की उन्हें जानकारी मिलती है तो वे अपने सभी जरूरी काम छोड़कर वहां पहुंच जाते हैं। उनके साथ परिवार के सदस्य भी रक्तदान में आगे रहते हैं। खास बात यह कि वे अधिकतर शिविरों में अपनी साइकिल पर जाते हैं। अमर सिंह कहते हैं कि वे अब तक 42 हजार किलोमीटर की साइकिल यात्रा कर चुके हैं।

यूं मिली प्रेरणा

अमर सिंह को रक्तदान की प्रेरणा मिलने का किस्सा भी बड़ा रोचक है। वे बताते हैं कि वर्ष 1985 में सिरसा में सड़क हादसे में घायल युवक को उन्होंने चिकित्सालय पहुंचाया तथा वहां पहली बार रक्तदान कर घायल की जान बचाई। बाद में घायल युवक व उसके परिजनों ने जो दुआएं दी, उसने रक्तदान की अलख सी उनके भीतर जला दी। तब से रक्तदान का सिलसिला चल पड़ा जिसका परिणाम यह है कि अब तक 106 बार रक्तदान कर चुके हैं।

जन सहयोग से शिविर

अमरसिंह नायक मजदूर परिवार से जुड़े होने के कारण उनकी आय सीमित है। वे बताते हैं कि रक्तदान शिविर जन सहयोग से लगाते हैं। मित्र मण्डली भी आर्थिक सहयोग करती है। हर बार रक्तदान के बाद गौरवान्वित महसूस करता हूं कि किसी की जान बचाने में सहयोग किया। रक्तदान की मुहिम केवल राजस्थान ही नहीं है बल्कि पंजाब व हरियाणा क्षेत्र में भी जारी है।

अमर सिंह नायक ने अपने बेटे की शादी के दौरान रक्तदान शिविर लगाया और सबसे कहा कि वही बारात में जाएगा जो रक्तदान करेगा। 23 फरवरी 2007 को नोहर में आयोजित इस शिविर में 117 बारातियों ने रक्तदान किया था। उन्होंने अपनी माता के निधन के दौरान उनके बारहवें पर मृत्यु भोज जैसी बुराई को त्याग कर गांव श्योदानपुरा में रक्तदान शिविर लगाया। पांच अगस्त 2011 को आयोजित इस शिविर में 29 यूनिट रक्त का संग्रहण किया गया गया। एक जनवरी को उन्होंने अपने 57वें जन्मदिन पर भी नोहर में रक्तदान शिविर आयोजित किया। रक्तदान के प्रति उनके जुनून के कारण कई बार उन्हें प्रशासन व समाजसेवी संस्थाएं समानित कर चुकी हैं।

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Updated on:
14 Jun 2024 03:15 pm
Published on:
14 Jun 2024 03:15 pm