हरदोई

कभी गूंजती थी विदेशी पक्षियों की चहचाहट, अब सुनसान पड़ा है सांडी पक्षी विहार, वजह- भ्रष्टाचार !

अखिलेश सरकार ने पानी की किल्लत से निपटने के लिए थे साढ़े चार करोड़ रुपए, दहर झील में अब तक नहीं पहुंचा पानी
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Dec 14, 2017
sandi bird sanctuary

हरदोई. उत्तर प्रदेश में प्रवासी पक्षियों को लेकर टॉप रैंकिंग में शुमार हरदोई की दहर झील जिसे सांडी पक्षी विहार के नाम से भी जाना जाता है, इन दिनों अपनी बदकिस्मती के आंसू बहा रहा है। ये आलम तब है जब देश-विदेश से आने वाले पक्षी जिनपर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विदेशी सरकारों की नज़र रहती है, वर्ल्ड वाइल्ड इस को लेकर हमेशा ही सक्रिय बना रहता है।

ये आलम आज का नहीं, बल्कि बीते तीन-चार सालों में यहां दिन-ब-दिन पानी कम होता जा रहा है। पानी की कमी के चलते चलते प्रवासी पक्षियों ने यहां पर आना बिल्कुल ही कम कर दिया है। अखिलेश सरकार ने इस झील के लिए करोड़ों रुपया दिया था, लेकिन उन रुपयों का बंदरबांट ऐसा हुआ कि जिस झील में जुलाई तक पानी पहुंचना था, वहां आज तक पानी नहीं पहुंच सका है।

दहर झील के नाम से भी जाना जाता है सांडी पक्षी विहार
सांडी पक्षी विहार हरदोई जिला मुख्यालय से महज 20 किलोमीटर की दूरी पर है, जिसे दहर झील के नाम से भी जाना जाता है। करीब 300 हेक्टेयर में बसे इस पक्षी विहार की खास बात यह थी कि दूर दूर देशों से आने वाले प्रवासी पक्षी ज्यादातर सांडी पक्षी विहार को ही अपना ठिकाना बनाते थे, लेकिन अब पानी की कमी यहां बड़ी समस्या बनी हुई है। पूरी झील एक तालाब के मानिंद दिख रही है।

पानी की कमी बनी बाधा
स्थानीय निवासी रामदास बताते हैं कि बीते 4 सालों से यह पक्षी विहार अपनी बदकिस्मती के आंसू बहा रहा है वजह साफ है कि यहां पर पानी की बेइंतिहा कमी हो गई है। सर्दियों में यानी अक्टूबर माह से मार्च तक जो पक्षी मंगोलिया, चीन, यूरोप और साइबेरिया जैसे देशों से यहां पर आते थे और शरण लेते थे, उन्होंने अब यहां पर आना बिल्कुल ही कम कर दिया है। इसकी वजह पानी की कमी है।

पर्यटक बोले- नहीं आए विदेशी पक्षी
पर्यटक अमित सक्सेना कहते हैं कि हर साल की अपेक्षा इस बार यहां विदेशी पक्षियों की आवक काफी कम है। इसके लिए वो सांडी पक्षी विहार का माहौल और पानी की कमी को जिम्मेदार मानते हैं। उन्होंने कहा कि अमूमन यहां पर सर्दियों में लाखों पक्षी आते थे, अब मुश्किल से 4-5 हजार पक्षी ही मौजूद हैं।

अखिलेश सरकार ने दिए साढ़े चार करोड़ रुपए
अभी तक इस झील में प्राकृतिक रूप से पानी रहता था। बारिश का पानी या फिर बगल से निकली गर्रा नदी यहां की पानी की किल्ल्त को दूर करती थी, लेकिन बारिश की कमी की वजह से ये झील सूख सी गयी है। पानी की किल्लत को दूर करने के लिए दो ट्यूबवेल लगवाए गए, लेकिन उससे भी किल्ल्त दूर न हो सकी। हालांकि, इस दिक्कत से उबारने के लिए अखिलेश यादव की सरकार ने 4 करोड़ 66 लाख रुपया नलकूप विभाग को दिया था, ताकि लिफ्ट कैनाल बन सके और दहर झील फिर से आबाद हो सके। लेकिन जिस नलकूप विभाग ने जुलाई माह में दहर झील को भरने का वादा किया था वो अब तक न पूरा हो सका है।

फॉरेस्टर बोले- सुनसान पड़ा हैं पक्षी विहार
फॉरेस्टर आशुतोष कुमार कहते हैं कि झील में पानी न होने की वजह से प्रवासी पक्षी इस बार भी काफी कम आये हैं। इसके चलते पर्यटकों ने यहां आना बंद कर दिया है। इसके चलते पक्षी विहार में भी टिकट काउंटर बंद कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि चिड़ियों की चहचाहट से आबाद रहने वाला पक्षी विहार सुनसान सा है।

वीडियो में देखें- क्या कहते हैं पर्यटक...

Published on:
14 Dec 2017 10:09 am