
Absence Seizure Cause: कई बार हम देखते हैं कि कोई बच्चा या बड़ा इंसान बात करते-करते या कोई काम करते हुए अचानक कुछ सेकंड के लिए थम जाता है। वह एक ही जगह एकटक (Blank Stare) देखने लगता है, जैसे कि वह किसी अलग ही दुनिया में खो गया हो। जब आप उसे पुकारते हैं, तो वह कोई जवाब नहीं देता और कुछ सेकंड बाद वह फिर से वैसे ही बात या काम करने लगता है जैसे कुछ हुआ ही न हो। अक्सर लोग इसे दिन में सपने देखना (Daydreaming), ध्यान न देना या आलस मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन मेडिकल साइंस में यह सिर्फ ध्यान भटकना नहीं, बल्कि दिमाग से जुड़ी एक खास स्थिति का संकेत हो सकता है। इसे एब्सेंस सीजर (Absence Seizure) कहा जाता है, जिसे पहले 'पेटिट मल सीजर' (Petit Mal Seizure) के नाम से भी जाना जाता था। आइए समझतें कि एब्सेंस सीज़र क्या है, इसके क्या लक्षण हैं और इसका सही इलाज कैसे संभव है।
मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) के अनुसार, जब भी हम मिर्गी या सीजर (दौरे) का नाम सुनते हैं, तो हमारे दिमाग में शरीर का कांपना, गिर जाना या मुंह से झाग आने जैसी तस्वीरें बनती हैं। लेकिन एब्सेंस सीजर बाकी दौरों से बिल्कुल अलग होता है। इसमें इंसान न तो जमीन पर गिरता है और न ही उसके शरीर में कोई तेज झटके लगते हैं। सरल शब्दों में कहें तो, यह दिमाग की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी में आने वाली एक छोटी सी रुकावट (Short Circuit) है। जब दिमाग की नसों में अचानक असंतुलित सिग्नल बहने लगते हैं, तो मरीज का दिमाग कुछ सेकंड के लिए आसपास की दुनिया से पूरी तरह कट जाता है। यह दौरा आमतौर पर सिर्फ 10 से 20 सेकंड का होता है।
क्लीवलैंड क्लिनिक के मुताबिक, एब्सेंस सीजर की सबसे बड़ी पहचान यह है कि यह अचानक आता है और अचानक ही खत्म हो जाता है। यह दौरा दिन में 10 से लेकर 100 बार तक भी आ सकता है। इसी वजह से बच्चों की पढ़ाई और ध्यान लगाने की क्षमता पर गहरा असर पड़ता है। इसके मुख्य लक्षणों में शामिल हैं;
मेयो क्लिनिक के मेडिकल रिसर्च के अनुसार, एब्सेंस सीजर होने की मुख्य वजह दिमाग की कोशिकाओं (Neurons) के बीच बहने वाले इलेक्ट्रिकल सिग्नलों का असंतुलित होना है। इसके पीछे दो मुख्य कारण हो सकते हैं;
अच्छी बात यह है कि सही समय पर पहचान होने पर एब्सेंस सीजर का इलाज बहुत आसान और असरदार है, डॉक्टर मरीज को दौरे रोकने की खास दवाएं देते हैं। ज्यादातर बच्चों में इन दवाओं से दौरे पूरी तरह बंद हो जाते हैं। थकावट और नींद की कमी से सीज़र आने का खतरा बढ़ता है, इसलिए बच्चे को पूरी नींद लेने दें।
यदि आपके बच्चे या आसपास किसी में यह लक्षण दिखें, तो घबराएं नहीं। बच्चे को डांटने या आलसी समझने के बजाय किसी न्यूरोलॉजिस्ट (Neurologist) या पीडियाट्रिशियन (बाल रोग विशेषज्ञ) को दिखाएं। स्कूल के शिक्षकों को भी इस स्थिति के बारे में बताएं ताकि वे क्लास में बच्चे के इस व्यवहार को सही से समझ सकें और उसे डॉक्टर तक पहुंचाने में मदद कर सकें। सही इलाज से बच्चा बिल्कुल सामान्य और स्वस्थ जीवन जी सकता है।