
बड़ी आंत की इन बीमारियों में पड़ सकती है Colostomy की जरूरत (photo- freepik)
Colostomy Surgery: डॉक्टर ने कहा है कि अब पेट पर एक थैली लगानी पड़ेगी। यह सुनते ही ज्यादातर मरीज और उनके परिवार घबरा जाते हैं। सबसे पहले यही सवाल आता है, क्या अब पूरी जिंदगी ऐसे ही रहना होगा? क्या सामान्य खाना-पीना, नौकरी या यात्रा करना मुश्किल हो जाएगा? असल में, कोलोस्टोमी कोई बीमारी नहीं है, बल्कि एक सर्जिकल प्रक्रिया है। कई बार यह मरीज की जान बचाने या आंत (बड़ी आंत) को ठीक होने का समय देने के लिए की जाती है।
Mayo Clinic, Cleveland Clinic और Johns Hopkins Medicine के अनुसार, जब बड़ी आंत या मलाशय (Rectum) सामान्य तरीके से काम नहीं कर पाते या उन्हें कुछ समय के लिए आराम देना जरूरी होता है, तब सर्जन पेट की दीवार पर एक नया रास्ता बनाते हैं। इसी प्रक्रिया को कोलोस्टोमी कहा जाता है।
सामान्य स्थिति में मल शरीर से गुदा (Anus) के रास्ते बाहर निकलता है। लेकिन कुछ बीमारियों, गंभीर चोट या ऑपरेशन के बाद यह रास्ता सुरक्षित नहीं रहता। ऐसे में सर्जन बड़ी आंत के एक हिस्से को पेट की सतह तक लाकर एक छोटा-सा खुलाव (Stoma) बनाते हैं। इसके ऊपर एक विशेष कोलोस्टोमी बैग लगाई जाती है, जिसमें मल इकट्ठा होता है। यह व्यवस्था कुछ लोगों में अस्थायी (Temporary) होती है, जबकि कुछ मामलों में स्थायी (Permanent) भी हो सकती है। यह पूरी तरह बीमारी और ऑपरेशन के कारण पर निर्भर करता है।
अगर कैंसर बड़ी आंत या मलाशय के उस हिस्से में हो, जहां ऑपरेशन के बाद सामान्य रास्ता सुरक्षित नहीं रह जाता, तो कोलोस्टोमी की जरूरत पड़ सकती है। कुछ मरीजों में यह कुछ समय के लिए होती है, जबकि कुछ में स्थायी भी हो सकती है।
सड़क दुर्घटना, पेट में गहरी चोट या गोली लगने जैसी गंभीर परिस्थितियों में आंत को नुकसान पहुंच सकता है। ऐसे मामलों में शरीर को सुरक्षित रखने और संक्रमण का खतरा कम करने के लिए कोलोस्टोमी की जा सकती है।
डायवर्टीकुलिटिस में बड़ी आंत की छोटी थैलियों में सूजन या संक्रमण हो जाता है। अगर संक्रमण बहुत गंभीर हो जाए, आंत फट जाए या ऑपरेशन जरूरी हो, तो कुछ मरीजों में अस्थायी कोलोस्टोमी की जा सकती है।
कुछ लोगों में Crohn's Disease या Ulcerative Colitis जैसी बीमारियां इतनी गंभीर हो जाती हैं कि आंत को आराम देने या क्षतिग्रस्त हिस्से को हटाने के बाद Colostomy की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, IBD के हर मरीज को कोलोस्टोमी की जरूरत नहीं होती।
कुछ नवजात बच्चों में आंत या गुदा का विकास सामान्य तरीके से नहीं होता। ऐसे मामलों में डॉक्टर अस्थायी कोलोस्टोमी कर सकते हैं, ताकि आगे चलकर सही सर्जरी की जा सके।
अगर किसी कारण से बड़ी आंत पूरी तरह बंद हो जाए और मल बाहर न निकल पाए, तो कुछ परिस्थितियों में कोलोस्टोमी की जरूरत पड़ सकती है।
Mayo Clinic के अनुसार, कई मरीजों में कोलोस्टोमी केवल कुछ महीनों के लिए बनाई जाती है। जब आंत पूरी तरह ठीक हो जाती है, तो दूसरी सर्जरी करके सामान्य रास्ता फिर से जोड़ा जा सकता है। लेकिन अगर बड़ी आंत या मलाशय का बड़ा हिस्सा हटाना पड़े या बीमारी की स्थिति ऐसी हो कि सामान्य रास्ता सुरक्षित न रहे, तो कोलोस्टोमी स्थायी भी हो सकती है।
यह सवाल लगभग हर मरीज पूछता है। रिसर्च बताती है कि सही देखभाल और थोड़ी-सी ट्रेनिंग के बाद अधिकांश लोग फिर से अपनी सामान्य दिनचर्या में लौट सकते हैं। ऑफिस जा सकते हैं। यात्रा कर सकते हैं। हल्का व्यायाम कर सकते हैं। सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल हो सकते हैं। डॉक्टर और डाइटिशियन की सलाह के अनुसार सामान्य भोजन भी कर सकते हैं। शुरुआत में कोलोस्टोमी बैग बदलना और उसकी देखभाल सीखने में थोड़ा समय लग सकता है, लेकिन समय के साथ ज्यादातर लोग इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लेते हैं।
अगर बैग को समय पर न बदला जाए या त्वचा की सफाई ठीक से न की जाए, तो त्वचा में जलन, रिसाव (Leakage) या संक्रमण जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसीलिए अस्पताल में मरीज और उनके परिवार को Stoma Care की पूरी जानकारी दी जाती है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Published on:
02 Jul 2026 05:44 pm
