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Blood Sugar vs Diabetes: क्या ब्लड शुगर बढ़ने का मतलब डायबिटीज है? CDC से जानिए दोनों में क्या है अंतर

Blood Sugar High: क्या रिपोर्ट में ब्लड शुगर बढ़ने का मतलब डायबिटीज है? CDC, NIDDK और MedlinePlus की रिसर्च के आधार पर जानिए दोनों में असली अंतर और कब करानी चाहिए जांच।
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भारत

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Dimple Yadav

Jul 02, 2026

Blood Sugar vs Diabetes

ब्लड शुगर कंट्रोल रखने के आसान तरीके(photo- freepik)

Blood Sugar vs Diabetes: रिपोर्ट में शुगर थोड़ी बढ़ी हुई है, इतना सुनते ही कई लोगों की चिंता बढ़ जाती है। कुछ लोग उसी समय इंटरनेट पर डायबिटीज का इलाज खोजने लगते हैं, तो कुछ यह मान लेते हैं कि अब उन्हें जिंदगीभर दवा खानी पड़ेगी। लेकिन क्या सच में एक बार ब्लड शुगर बढ़ने का मतलब डायबिटीज होना है?

यहीं सबसे ज्यादा गलतफहमी होती है। आज भी बहुत से लोग ब्लड शुगर और डायबिटीज को एक ही चीज समझते हैं, जबकि दोनों का मतलब अलग है। ब्लड शुगर शरीर का एक सामान्य हिस्सा है, जबकि डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर लंबे समय तक ब्लड शुगर को नियंत्रित नहीं कर पाता।

अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC), नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डाइजेस्टिव एंड किडनी डिजीजेज (NIDDK) और MedlinePlus के अनुसार, किसी एक रिपोर्ट में ब्लड शुगर बढ़ी हुई आने से डायबिटीज की पुष्टि नहीं हो जाती। डॉक्टर हमेशा दूसरी जांचों, लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री को भी देखते हैं।

पहले समझिए, ब्लड शुगर आखिर है क्या?

NIDDK के अनुसार हम दिनभर जो रोटी, चावल, फल या दूसरी चीजें खाते हैं, उनसे शरीर को ऊर्जा मिलती है। खाना पचने के बाद उसका एक हिस्सा ग्लूकोज में बदल जाता है। यही ग्लूकोज खून के जरिए शरीर की हर कोशिका तक पहुंचता है, ताकि वे अपना काम कर सकें।

इसी ग्लूकोज के स्तर को ब्लड शुगर कहा जाता है। दिलचस्प बात यह है कि ब्लड शुगर पूरे दिन एक जैसी नहीं रहती। सुबह, खाना खाने के बाद, व्यायाम करने पर या लंबे समय तक भूखे रहने पर इसका स्तर बदल सकता है। यानी ब्लड शुगर का ऊपर-नीचे होना हमेशा बीमारी का संकेत नहीं होता।

फिर डायबिटीज क्या होती है?

शरीर में एक हार्मोन होता है, जिसे इंसुलिन कहा जाता है। इसका काम ब्लड में मौजूद ग्लूकोज को कोशिकाओं तक पहुंचाना होता है, ताकि वह ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल हो सके। लेकिन जब शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता या इंसुलिन सही तरीके से काम नहीं कर पाता, तब ग्लूकोज खून में ही जमा होने लगता है। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे, तो डॉक्टर इसे डायबिटीज कहते हैं।

क्या एक बार ब्लड शुगर बढ़ने से घबराना चाहिए?

मान लीजिए आपने सुबह मिठाई खाई, फिर तुरंत जाकर ब्लड टेस्ट करा लिया। ऐसे में रिपोर्ट में शुगर सामान्य से ज्यादा आ सकती है। इसी तरह अगर आपको तेज बुखार है, कोई गंभीर संक्रमण है, आप बहुत तनाव में हैं या कुछ खास दवाएं ले रहे हैं, तब भी ब्लड शुगर कुछ समय के लिए बढ़ सकती है। इसका मतलब यह नहीं कि आपको डायबिटीज हो गई है। यही वजह है कि डॉक्टर सिर्फ एक रिपोर्ट देखकर फैसला नहीं करते। अगर जरूरत हो, तो वे दोबारा जांच या कुछ दूसरे टेस्ट लिखते हैं।

लोग सबसे ज्यादा यही गलती करते हैं

कई लोग घर में ग्लूकोमीटर से एक बार शुगर चेक करते हैं। अगर रीडिंग थोड़ी ज्यादा आती है, तो बिना डॉक्टर से सलाह लिए खुद ही डायबिटीज का मरीज मान लेते हैं। कुछ लोग इसके उलट भी करते हैं। रिपोर्ट में शुगर बढ़ी हुई आने के बाद भी कहते हैं, आज तो ज्यादा मिठाई खा ली थी, इसलिए ऐसा आया होगा। दोनों ही तरीके सही नहीं हैं। अगर रिपोर्ट बार-बार हाई आ रही है या डॉक्टर को शक होता है, तभी आगे की जांच की जाती है।

किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

डायबिटीज धीरे-धीरे बढ़ने वाली बीमारी है। कई बार शुरुआत में कोई लक्षण नहीं होते। लेकिन कुछ लोगों में शरीर पहले से संकेत देने लगता है। जैसे-

  • बार-बार प्यास लगना
  • बार-बार पेशाब आना
  • बिना कोशिश के वजन कम होना
  • जल्दी थक जाना
  • धुंधला दिखाई देना
  • छोटी चोट का देर से भरना

बार-बार त्वचा या यूरिन का संक्रमण होना

ध्यान रहे, ये लक्षण सिर्फ डायबिटीज में ही नहीं, दूसरी समस्याओं में भी हो सकते हैं। इसलिए खुद से निष्कर्ष निकालने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।