
बुखार के साथ दिखने वाले 7 गंभीर संकेत (photo- freepik)
Septic Shock Symptoms: बुखार होना एक आम बात है। मौसम बदलने, वायरल इंफेक्शन या किसी दूसरी वजह से भी शरीर का तापमान बढ़ सकता है। लेकिन अगर बुखार के साथ कुछ गंभीर लक्षण भी नजर आने लगें, तो इसे सिर्फ सामान्य बुखार समझकर घर पर इंतजार करना खतरनाक साबित हो सकता है।
मेयो क्लिनिक, क्लीवलैंड क्लिनिक और नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, जब शरीर का कोई संक्रमण (Infection) नियंत्रण से बाहर हो जाता है, तो वह Sepsis और गंभीर मामलों में सेप्टिक शॉक का रूप ले सकता है। यह एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें हर मिनट की देरी मरीज की जान के लिए जोखिम बढ़ा सकती है।
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार जब बैक्टीरिया, वायरस, फंगस या किसी अन्य संक्रमण के खिलाफ लड़ते समय शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया देने लगती है, तो पूरे शरीर में सूजन (Inflammation) फैल सकती है। इससे अंगों तक पर्याप्त खून और ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। अगर स्थिति और गंभीर हो जाए, ब्लड प्रेशर बहुत नीचे गिर जाए और दवाओं के बावजूद सामान्य न हो, तो इसे सेप्टिक शॉक कहा जाता है। यह स्थिति दिल, किडनी, फेफड़े और मस्तिष्क जैसे महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकती है।
अधिकांश लोगों में तेज बुखार हो सकता है, लेकिन कुछ गंभीर मामलों में शरीर का तापमान सामान्य से कम भी हो सकता है। इसलिए केवल बुखार की तीव्रता से स्थिति का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।
अगर मरीज को सामान्य से ज्यादा तेजी से सांस आ रही है या सांस लेने में परेशानी महसूस हो रही है, तो यह गंभीर संक्रमण का संकेत हो सकता है।
संक्रमण के दौरान शरीर ज्यादा मेहनत करता है, जिससे दिल की धड़कन सामान्य से तेज हो सकती है। अगर इसके साथ कमजोरी या चक्कर भी हों, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए।
अगर मरीज इतना कमजोर महसूस करे कि उठने-बैठने में भी परेशानी होने लगे या लगातार नींद जैसी हालत बनी रहे, तो यह सामान्य बुखार नहीं भी हो सकता है।
अगर मरीज अचानक भ्रमित हो जाए, ठीक से बात न कर पाए, पहचानने में दिक्कत हो या असामान्य व्यवहार करने लगे, तो इसे गंभीर चेतावनी माना जाता है। बुजुर्गों में यह लक्षण खासतौर पर दिखाई दे सकता है।
किडनी तक पर्याप्त खून न पहुंचने पर पेशाब की मात्रा कम हो सकती है। यह इस बात का संकेत हो सकता है कि संक्रमण शरीर के दूसरे अंगों को भी प्रभावित कर रहा है।
अगर हाथ-पैर ठंडे महसूस हों, त्वचा पीली या नीली पड़ने लगे या धब्बेदार दिखाई दे, तो यह खराब रक्त संचार का संकेत हो सकता है और तत्काल इलाज की जरूरत होती है।
रिसर्च के अनुसार कुछ लोगों में Sepsis और सेप्टिक शॉक का जोखिम अधिक हो सकता है-
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार सेप्सिस कोई एक बीमारी नहीं है, बल्कि शरीर में किसी संक्रमण के प्रति होने वाला एक जानलेवा रिएक्शन है। यह अक्सर निमोनिया जैसे फेफड़ों के गंभीर संक्रमण, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI), पेट की दिक्कतों, त्वचा या किसी खुले घाव में बैक्टीरिया फैलने से हो सकता है। इसके अलावा, सर्जरी के बाद होने वाले इन्फेक्शन भी इसका बड़ा कारण बनते हैं।
जब डॉक्टर को सेप्सिस या सेप्टिक शॉक की आशंका होती है, तो वे बिना समय गंवाए तुरंत इलाज शुरू करते हैं। सबसे पहले ब्लड टेस्ट और अन्य जांचों से संक्रमण की वजह तलाशी जाती है। मरीज को नस के जरिए फ्लूइड्स (IV Fluids) और असरदार एंटीबायोटिक्स दिए जाते हैं। ब्लड प्रेशर नॉर्मल रखने की दवाइयां, ऑक्सीजन सपोर्ट और जरूरत पड़ने पर मरीज को तुरंत ICU में रखकर कड़ी निगरानी की जाती है।
हर संक्रमण सेप्टिक शॉक में नहीं बदलता। लेकिन समय पर इलाज कराने से जोखिम काफी कम किया जा सकता है।
अगर बुखार के साथ तेज सांस, भ्रम, बहुत कम ब्लड प्रेशर जैसा महसूस होना, बेहोशी, पेशाब कम होना या त्वचा ठंडी और पीली पड़ने जैसे लक्षण दिखें, तो घर पर इलाज करने या इंटरनेट पर घरेलू उपाय खोजने में समय न गंवाएं। ऐसी स्थिति में तुरंत नजदीकी अस्पताल या इमरजेंसी विभाग पहुंचना सबसे सुरक्षित कदम है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Published on:
02 Jul 2026 01:31 pm
बड़ी खबरें
View Allस्वास्थ्य
ट्रेंडिंग
लाइफस्टाइल
