2 जुलाई 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

History of Gynecology: एनेस्थीसिया के बिना “गुलाम महिलाओं” पर हुए थे दर्जनों दर्दनाक प्रयोग! जानें आज की गायनेकोलॉजी का खौफनाक सच!

History of Gynecology: जब महिलाओं की जांच को पाप और सामाजिक शर्म माना जाता था! कोविंगटन विमेंस हेल्थ की रिपोर्ट से जानिए गायनेकोलॉजी का वो दर्दनाक इतिहास, जिसने आज महिलाओं को दर्द से मुक्त होकर जीने का हक दिया।
2 min read
Google source verification

भारत

image

Nidhi Yadav

Jul 02, 2026

history of gynecology,j marion sims experiments,anarcha betsey lucy story,

एनेस्थीसिया के बिना गुलाम महिलाओं पर हुए थे दर्जनों दर्दनाक प्रयोग- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- gemini)

History of Gynecology: आज के दौर में जब किसी महिला को सेहत से जुड़ी कोई परेशानी होती है, तो वह बिना झिझक गायनेकोलॉजिस्ट (महिला रोग विशेषज्ञ) के पास चली जाती है। लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब महिलाओं के शरीर और उनकी बीमारियों पर बात करना भी शर्म की बात मानी जाती थी। कोविंगटन विमेंस हेल्थ और पेशेंट मॉडेस्टी की रिपोर्ट्स के अनुसार, आज हम जिस आधुनिक गायनेकोलॉजी को देख रहे हैं, उसका सफर बेहद दर्दनाक और संघर्षों से भरा रहा है।

इलाज कराने से बेहतर है मर जाना

19वीं सदी और उससे पहले, समाज में महिलाओं की जांच को लेकर इतनी पाबंदियां थीं कि पुरुष डॉक्टरों को महिला मरीजों को छूने या उन्हें देखने तक की इजाजत नहीं होती थी। उस दौर की महिलाओं कई महिलाएं कहती थीं, किसी पराए मर्द (डॉक्टर) के सामने अपने शरीर की जांच कराने से तो बेहतर है कि मैं तड़प-तड़प कर मर जाऊं।

डॉ. मैरियन सिम्स: इतिहास के वो पन्ने जहां विज्ञान और दर्द दोनों थे

आधुनिक गायनेकोलॉजी का इतिहास डॉ. जे. मैरियन सिम्स के जिक्र के बिना अधूरा है, जिन्हें आधुनिक "गायनेकोलॉजी का पिता" भी कहा जाता है। उन्होंने वेसिकोवैजाइनल फिस्टुला (प्रसव के दौरान होने वाली एक बेहद दर्दनाक समस्या) का इलाज खोजा, जिसने आगे चलकर लाखों महिलाओं की जिंदगी बचाई। लेकिन इस कामयाबी के पीछे एक स्याह सच भी था। उस दौर में उन्होंने गुलाम अश्वेत महिलाओं पर बिना एनेस्थीसिया (बिना बेहोश किए) दर्जनों सर्जरी और प्रयोग किए थे।

छिपकर और कपड़ों के ऊपर से होती थी जांच

शुरुआत में जब पुरुष डॉक्टरों ने महिलाओं का इलाज करना शुरू भी किया, तो तौर-तरीके बेहद अजीब थे। डॉक्टर सीधे महिला को देख नहीं सकते थे। कई बार पूरी तरह से अंधेरे कमरे में सिर्फ छूकर बीमारी का अंदाजा लगाना पड़ता था, या फिर महिला को पूरे कपड़ों से ढक दिया जाता था और डॉक्टर को बिना देखे ही अपनी उंगलियों के सहारे जांच करनी होती थी।

जब मेडिकल की दुनिया में आईं महिलाएं, तो बदली तस्वीर

पेशेंट मॉडेस्टी की रिपोर्ट के मुताबिक, गायनेकोलॉजी के क्षेत्र में सुखद बदलाव तब आया जब महिलाओं ने खुद इस फील्ड में कदम रखा। मैरी पुटनम जैकोबी और एलिजाबेथ ब्लैकवेल जैसी साहसी महिलाओं ने तमाम बंदिशों को तोड़कर मेडिकल की पढ़ाई की और शुरुआती महिला डॉक्टर बनीं। जब महिला डॉक्टरों ने कमान संभाली, तो मरीज महिलाओं के मन से वो डर और शर्म पूरी तरह गायब हो गई। वे खुलकर अपनी तकलीफें बताने लगीं और यहीं से महिलाओं के स्वास्थ्य को एक नया सम्मान मिला।

आज की दुनिया पर इसका क्या असर हुआ?

आज जो हम प्रेग्नेंसी केयर, अल्ट्रासाउंड, पैप स्मीयर टेस्ट और सुरक्षित डिलीवरी जैसी सुविधाएं देखते हैं, वो इसी लंबे संघर्ष का नतीजा हैं। अब यह सिर्फ एक डॉक्टर और मरीज का रिश्ता नहीं है, बल्कि महिलाओं को अपनी सेहत पर फैसला लेने का पूरा अधिकार देता है। आज जब कोई महिला किसी क्लिनिक में जाकर बिना किसी खौफ या शर्म के अपनी तकलीफ डॉक्टर को बताती है, तो वह अनजाने में उन लाखों पूर्वज महिलाओं की चीखों और संघर्षों को सम्मान दे रही होती है, जिन्होंने इस हक के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी थी।