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Nephrotic Syndrome: पेशाब में झाग और पैरों में सूजन को न करें नजरअंदाज, मेयो क्लिनिक से जानें नेफ्रोटिक सिंड्रोम के खतरे

Nephrotic Syndrome Cause: टॉयलेट पॉट में बहुत ज्यादा झाग दिखना या पैरों में लगातार सूजन आना मामूली नहीं है! मेयो क्लिनिक की रिपोर्ट से जानिए नेफ्रोटिक सिंड्रोम के लक्षण, इसके बड़े खतरे और बचाव के आसान उपाय।
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भारत

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Nidhi Yadav

Jul 01, 2026

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टॉयलेट पॉट में बहुत ज्यादा झाग दिखना या पैरों में लगातार सूजन आना मामूली नहीं है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- gemini)

Nephrotic Syndrome Symptoms: अक्सर जब हमारे पैरों या टखनों में हल्की सूजन आती है, तो हम सोचते हैं कि दिनभर खड़े रहने या थकान की वजह से ऐसा हुआ होगा। इसी तरह, टॉयलेट पॉट में झाग दिखने पर भी हम उसे नॉर्मल मानकर फ्लश कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शरीर के ये छोटे-छोटे बदलाव असल में आपकी किडनी के संकट में होने का इशारा हो सकते हैं।

मेयो क्लिनिक के मुताबिक, जब हमारी किडनी का फिल्टर सिस्टम ठीक से काम नहीं करता, तो शरीर में प्रोटीन की भारी कमी होने लगती है, जिसे नेफ्रोटिक सिंड्रोम (Nephrotic Syndrome) कहा जाता है। क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, नेफ्रोटिक सिंड्रोम लाइलाज है। यह अक्सर बच्चों में किशोरावस्था के आखिरी सालों या 20 साल की उम्र के शुरुआती सालों में अपने आप ठीक हो जाता है। आइए जानते हैं कि यह बीमारी क्या है और इसे पहचानना क्यों जरूरी है।

क्या होता है नेफ्रोटिक सिंड्रोम?

नेफ्रोटिक सिंड्रोम खुद में कोई अकेली बीमारी नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि आपकी किडनी के अंदर मौजूद ग्लोमेरुली (Glomeruli) नाम के छोटे-छोटे ब्लड फिल्टर खराब या डैमेज हो रहे हैं। इन फिल्टरों का काम शरीर की गंदगी को बाहर निकालना और जरूरी चीजों (जैसे प्रोटीन) को शरीर के अंदर ही रोक कर रखना होता है। लेकिन जब ये फिल्टर खराब हो जाते हैं, तो शरीर के लिए जरूरी एल्ब्युमिन प्रोटीन लीक होकर पेशाब के रास्ते बाहर निकलने लगता है।

इन लक्षणों को भूलकर भी न समझें मामूली

  • पेशाब में बहुत ज्यादा झाग बनना।
  • पैरों और टखनों में भारी सूजन।
  • आंखों के आसपास सूजन (Puffy Eyes)।
  • वजन का अचानक बढ़ना।
  • थकान और भूख न लगना।

ये किडनी के फिल्टर खराब क्यों होते हैं?

मेयो क्लिनिक की रिसर्च के अनुसार, किडनी के फिल्टर खराब होने के पीछे कई बड़ी वजहें हो सकती हैं:

  • डायबिटीज (मधुमेह)।
  • लूपस या अन्य बीमारियां।
  • दवाइयों का अंधाधुंध इस्तेमाल।

नेफ्रोटिक सिंड्रोम से शरीर को क्या-क्या खतरे हैं?

  • खून के थक्के बनना (Blood Clots)।
  • हाई कोलेस्ट्रॉल।
  • किडनी फेलियर।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।