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Nephrotic Syndrome Symptoms in Hindi: क्या आपकी किडनी से लीक हो रहा है प्रोटीन? इन 3 लक्षणों से पहचानें नेफ्रोटिक सिंड्रोम का खतरा

Nephrotic Syndrome Symptoms in Hindi: सुबह उठते ही आंखों और पैरों में सूजन नेफ्रोटिक सिंड्रोम का संकेत हो सकती है। जानें क्यों किडनी से प्रोटीन का लीक होना आपकी सेहत के लिए खतरनाक है और इसके शुरुआती लक्षण क्या हैं।

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भारत

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Dimple Yadav

Apr 21, 2026

Nephrotic Syndrome Symptoms in Hindi

Nephrotic Syndrome Symptoms in Hindi (photo- gemini ai)

Nephrotic Syndrome Symptoms in Hindi: अक्सर हम सुबह सोकर उठने के बाद आईने में अपनी सूजी हुई आंखें देखते हैं। ज्यादातर लोग इसे देर रात तक जागने, नमक ज्यादा खाने या थकान का नतीजा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर यह सूजन (Swelling) रोज सुबह आपके चेहरे पर दिख रही है और शाम होते-होते पैरों तक पहुंच रही है, तो यह आपकी किडनी की मदद की पुकार हो सकती है? मेडिकल भाषा में इसे नेफ्रोटिक सिंड्रोम (Nephrotic Syndrome) कहा जाता है।

क्या कहती है रिसर्च? किडनी और प्रोटीन का कनेक्शन

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की रिसर्च के अनुसार, हमारी किडनी में 'ग्लोमेरुली' (Glomeruli) नामक लाखों छोटे फिल्टर होते हैं। इनका काम खून को साफ करना और जरूरी तत्वों को शरीर में वापस भेजना है। लेकिन जब ये फिल्टर डैमेज हो जाते हैं, तो शरीर के लिए जरूरी एल्ब्यूमिन (Albumin) नामक प्रोटीन पेशाब के रास्ते बाहर निकलने लगता है।

जब खून में प्रोटीन का स्तर कम हो जाता है, तो नसों में पानी रुकने के बजाय ऊतकों (Tissues) में रिसने लगता है, जिससे शरीर के अंगों में सूजन आ जाती है। Mayo Clinic की स्टडी बताती है कि नेफ्रोटिक सिंड्रोम कोई एक बीमारी नहीं, बल्कि उन लक्षणों का समूह है जो किडनी की खराबी को दर्शाते हैं।

इन 3 चेतावनी संकेतों को कभी न करें नजरअंदाज

  • पेशाब में अत्यधिक झाग (Foamy Urine): अगर आपको पेशाब करते समय सामान्य से बहुत ज्यादा झाग दिख रहा है, तो यह 'प्रोटीनुरिया' (Proteinuria) का संकेत है। इसका मतलब है कि आपकी किडनी प्रोटीन को फिल्टर नहीं कर पा रही है।
  • सुबह आंखों के नीचे भारीपन (Periorbital Edema): सुबह उठने पर आंखों के निचले हिस्से का फूल जाना नेफ्रोटिक सिंड्रोम का सबसे शुरुआती और कॉमन लक्षण है।
  • अचानक वजन बढ़ना: शरीर में पानी का जमाव (Fluid Retention) होने के कारण मरीज का वजन बिना किसी कारण के तेजी से बढ़ने लगता है।

एक्सपर्ट की राय: क्या है सावधानी?

इस विषय पर वरिष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. संजीव मलिक ने बताया कि "नेफ्रोटिक सिंड्रोम को अक्सर लोग सामान्य सूजन समझ लेते हैं, लेकिन यह किडनी फेलियर की पहली सीढ़ी हो सकती है। जब किडनी से प्रोटीन लीक होता है, तो शरीर में संक्रमण का खतरा और कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी बढ़ जाता है। अगर पेशाब में झाग दिखे या सूजन बनी रहे, तो तुरंत एक साधारण 'यूरिन टेस्ट' कराना चाहिए।"

बचाव और लाइफस्टाइल में बदलाव

  • नमक पर नियंत्रण: आहार में सोडियम (नमक) की मात्रा कम करने से सूजन को नियंत्रित किया जा सकता है।
  • प्रोटीन की सही मात्रा: डॉक्टर की सलाह पर ही प्रोटीन की मात्रा तय करें, क्योंकि ज्यादा प्रोटीन किडनी पर दबाव बढ़ा सकता है।
  • नियमित जांच: अगर आपके परिवार में किडनी की बीमारी या डायबिटीज का इतिहास है, तो नियमित चेकअप कराएं।

हल्के में न लें सूजन

शरीर में दिखने वाला छोटा सा बदलाव भी बड़ी बीमारी की आहट हो सकता है। नेफ्रोटिक सिंड्रोम का समय पर इलाज न होने से किडनी डैमेज का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए अगली बार जब आप सुबह आईने में सूजन देखें, तो इसे हल्के में न लें।

किडनी हेल्थ चेकलिस्ट: क्या आपकी किडनी सुरक्षित है?

यदि आप अपनी किडनी को लंबे समय तक स्वस्थ रखना चाहते हैं, तो इस चेकलिस्ट के जरिए अपनी आदतों और शरीर के संकेतों को ट्रैक करें:

  • पर्याप्त पानी का सेवन: क्या आप दिन भर में कम से कम 2.5 से 3 लीटर पानी पी रहे हैं?
  • पेशाब की जांच: क्या पेशाब का रंग सामान्य (हल्का पीला) है और उसमें अत्यधिक झाग तो नहीं बन रहा?
  • सूजन पर नजर: क्या सुबह उठने पर आंखों के नीचे या शाम को पैरों में सूजन महसूस होती है?
  • ब्लड प्रेशर कंट्रोल: क्या आपका बीपी 120/80 के आसपास है? (हाई बीपी किडनी का सबसे बड़ा दुश्मन है)।
  • शुगर लेवल: क्या आप नियमित रूप से अपना ब्लड शुगर चेक करते हैं? (डायबिटीज किडनी डैमेज का मुख्य कारण है)।
  • पेनकिलर्स से दूरी: क्या आप बिना डॉक्टर की सलाह के बार-बार दर्द निवारक गोलियां (NSAIDs) लेते हैं?
  • नमक की मात्रा: क्या आप दिन भर में 5 ग्राम (एक छोटा चम्मच) से कम नमक का सेवन कर रहे हैं?
  • एक्टिव लाइफस्टाइल: क्या आप रोजाना कम से कम 30 मिनट पैदल चलते हैं या व्यायाम करते हैं?

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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