
जब दौरा खत्म हो जाए, तो मरीज के पास ही रहें। उन्हें अकेला न छोड़ें। - प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- freepik)
Seizure First Aid In Hindi : अचानक किसी को मिर्गी का दौरा (Seizure) पड़ जाए, तो आस-पास के लोग घबरा जाते हैं। कोई मरीज के मुंह में कपड़ा ठूंसने लगता है, तो कोई उसे जबरदस्ती पकड़ने की कोशिश करता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अनजाने में की गई ये गलतियां मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं?
PMC की एक रिसर्च के अनुसार, नींद की कमी, तेज रोशनी के संपर्क में आना और नशीली दवाओं या शराब का सेवन मिर्गी से पीड़ित लोगों में दौरे को ट्रिगर कर सकता है। अमेरिका के हेल्थ डिपार्टमेंट सीडीसी (CDC) की गाइडलाइन के मुताबिक, दौरे के वक्त सही फर्स्ट एड (प्राथमिक उपचार) देना बहुत जरूरी है। आइए बहुत समझते हैं कि ऐसी स्थिति में आपको क्या करना चाहिए।
1. मरीज को सुरक्षित जगह लेटाएं- जैसे ही दौरा शुरू हो, मरीज को धीरे से जमीन पर एक तरफ (करवट लेकर) लेटा दें। करवट दिलाना इसलिए जरूरी है ताकि उनके मुंह का थूक या झाग बाहर निकल सके और सांस लेने में दिक्कत न हो।
2. आस-पास से खतरनाक चीजें हटाएं- मरीज के आस-पास मौजूद हर वो चीज हटा दें जिससे उन्हें चोट लग सकती है, जैसे- कांच का सामान, नुकीली चीजें, फर्नीचर या गर्म चाय-कॉफी।
3. सिर के नीचे कुछ मुलायम रखें- मरीज के सिर को जमीन पर टकराने से बचाने के लिए उनके सिर के नीचे कोई तकिया, मोड़ा हुआ कपड़ा या जैकेट रख दें। अगर उन्होंने चश्मा पहना है, तो उसे धीरे से उतार दें और शर्ट के कॉलर या टाई को ढीला कर दें ताकि सांस आसानी से आ सके।
1. मुंह में कुछ भी न डालें- यह सबसे बड़ी गलती है। लोग मरीज के मुंह में चम्मच, कपड़ा, उंगली या पानी डालने की कोशिश करते हैं। ऐसा बिल्कुल न करें। इससे मरीज के दांत टूट सकते हैं, या उनका दम घुट सकता है।
2. मरीज को जबरदस्ती न पकड़ें- कई लोग मरीज के हाथ-पैर को कसकर दबा देते हैं ताकि वो हिलना बंद कर दे। ऐसा करने से मरीज की हड्डियों या मांसपेशियों में गंभीर चोट लग सकती है। दौरा अपने आप शांत होता है, उसे जबरदस्ती रोकने की कोशिश न करें।
3 .होश में आने से पहले कुछ न खिलाएं-पिलाएं- जब तक मरीज पूरी तरह होश में न आ जाए और बात न करने लगे, तब तक उसे पानी या दवाई देने की गलती न करें। इससे पानी उनकी सांस की नली में जा सकता है।
जब दौरा खत्म हो जाए, तो मरीज के पास ही रहें। उन्हें अकेला न छोड़ें। जब वो होश में आएं, तो उन्हें प्यार से समझाएं कि वो सुरक्षित हैं, क्योंकि होश में आने के बाद मरीज अक्सर डरा हुआ या कन्फ्यूज महसूस करता है। उन्हें आराम से बैठने या लेटने दें।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Updated on:
02 Jul 2026 04:55 pm
Published on:
02 Jul 2026 04:55 pm
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