
बच्चों में दिखने वाले शुरुआती संकेत और कब कराएं जांच (photo- freepik)
Marfan Syndrome Diagnosis: हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा अच्छी तरह बढ़े और स्वस्थ रहे। अगर कोई बच्चा अपनी उम्र के दूसरे बच्चों से ज्यादा लंबा दिखता है, लेकिन अगर लंबाई के साथ-साथ बच्चा बहुत दुबला हो, उसके हाथ-पैर और उंगलियां असामान्य रूप से लंबी हों, बार-बार आंखों की परेशानी हो या परिवार में किसी को ऐसी ही समस्या रही हो, तो डॉक्टर कभी-कभी मार्फन सिंड्रोम जैसी आनुवंशिक (Genetic) स्थिति की जांच की सलाह दे सकते हैं।
मेयो क्लिनिक, क्लीवलैंड क्लिनिक और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आर्थराइटिस एंड मस्कुलोस्केलेटल एंड स्किन डिजीजेज (NIAMS) के अनुसार, केवल लंबा और दुबला होना मार्फन सिंड्रोम का प्रमाण नहीं है। इस स्थिति की पहचान कई शारीरिक संकेतों, पारिवारिक इतिहास और मेडिकल जांच के आधार पर की जाती है।
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार मार्फन सिंड्रोम एक आनुवंशिक बीमारी है, जो शरीर के संयोजी ऊतक को प्रभावित करती है। यही ऊतक शरीर की हड्डियों, आंखों, दिल, रक्त वाहिकाओं, त्वचा और जोड़ों को मजबूती और सहारा देने का काम करता है। जब इसमें बदलाव होता है, तो शरीर के कई अंग प्रभावित हो सकते हैं। कुछ लोगों में लक्षण हल्के होते हैं, जबकि कुछ में दिल और बड़ी रक्त वाहिका (Aorta) से जुड़ी गंभीर समस्याएं भी हो सकती हैं।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आर्थराइटिस एंड मस्कुलोस्केलेटल एंड स्किन डिजीजेज (NIAMS) के अनुसार, मार्फन सिंड्रोम वाले हर व्यक्ति में एक जैसे लक्षण नहीं होते। लेकिन कुछ सामान्य संकेत इस प्रकार हो सकते हैं-
उम्र के हिसाब से ज्यादा लंबा और पतला शरीर- ऐसे बच्चों की लंबाई परिवार के दूसरे सदस्यों की तुलना में भी ज्यादा हो सकती है। हालांकि, लंबा होना अकेले इस बीमारी का संकेत नहीं माना जाता।
हाथ, पैर और उंगलियां असामान्य रूप से लंबी होना- कुछ बच्चों की उंगलियां बहुत पतली और लंबी दिखाई देती हैं। डॉक्टर इसे जांच के दौरान एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखते हैं।
जोड़ों का जरूरत से ज्यादा लचीला होना- अगर बच्चा आसानी से हाथ-पैर सामान्य सीमा से ज्यादा मोड़ लेता है या जोड़ों में ढीलापन महसूस होता है, तो यह भी एक संकेत हो सकता है।
रीढ़ या सीने की हड्डी का आकार बदलना- कुछ बच्चों में रीढ़ टेढ़ी होना (Scoliosis) या सीने की हड्डी का अंदर या बाहर की ओर निकला होना देखा जा सकता है।
आंखों की समस्या- मार्फन सिंड्रोम में आंखों का लेंस अपनी सामान्य जगह से खिसक सकता है। कुछ लोगों में कम उम्र से ही चश्मे का नंबर तेजी से बदलना या धुंधला दिखाई देना भी देखा जाता है।
मार्फन सिंड्रोम का सबसे गंभीर असर दिल और महाधमनी पर पड़ सकता है। महाधमनी शरीर की सबसे बड़ी रक्त वाहिका है, जो दिल से पूरे शरीर में खून पहुंचाती है। अगर इसकी दीवार कमजोर होने लगे, तो समय के साथ इसके फैलने (Aortic Enlargement) या फटने का खतरा बढ़ सकता है। यही कारण है कि इस बीमारी में नियमित हार्ट चेकअप बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।
डॉक्टर केवल एक लक्षण देखकर मार्फन सिंड्रोम की पुष्टि नहीं करते। वे कई बातों पर ध्यान देते हैं, जैसे-
अगर डॉक्टर को मार्फन सिंड्रोम की आशंका होती है, तो वे सबसे पहले मरीज की शारीरिक जांच करते हैं और परिवार के मेडिकल इतिहास को समझते हैं। चूंकि यह बीमारी दिल और आंखों को ज्यादा प्रभावित करती है, इसलिए इकोकार्डियोग्राम (Echocardiogram) के जरिए दिल और महाधमनी (Aorta) की बारीकी से जांच की जाती है। इसके साथ ही आंखों का खास चेकअप होता है और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर जेनेटिक टेस्टिंग (Genetic Testing) की सलाह भी दे सकते हैं।
देखा जाए तो मार्फन सिंड्रोम को पूरी तरह से ठीक करने वाला कोई स्थायी इलाज उपलब्ध नहीं है। हालांकि, सही समय पर इसकी पहचान करके इसके गंभीर खतरों को टाला जा सकता है। इसके इलाज में मरीज की उम्र और प्रभावित अंगों के हिसाब से कदम उठाए जाते हैं। इसमें दिल की नियमित मॉनिटरिंग, ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखने वाली दवाएं, आंखों और रीढ़ की हड्डी की देखभाल शामिल है। गंभीर मामलों में डॉक्टर सर्जरी की सलाह भी देते हैं।
अगर आपका बच्चा केवल लंबा है और बाकी सब सामान्य है, तो चिंता की जरूरत नहीं है। लेकिन यदि लंबी कद-काठी के साथ आंखों की समस्या, बार-बार चश्मे का नंबर बदलना, जोड़ों का अत्यधिक लचीलापन, रीढ़ या सीने की हड्डी में बदलाव, या परिवार में मार्फन सिंड्रोम का इतिहास भी हो, तो बाल रोग विशेषज्ञ या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर रहेगा।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Published on:
02 Jul 2026 05:12 pm
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